अक्सर हम भारतीय लोगों की आदत है कि हम खाने के तुरंत बाद एक से दो गिलास पानी पी लेते हैं। जब तक पेट तन नहीं जाता पानी का गिलास रुकता नहीं है। आप जानते हैं कि खाना खाने के तुरंत बाद ठंडा या ढेर सारा पानी पीना आपकी पाचन प्रक्रिया (Digestion Process) को प्रभावित कर सकता है। एलोपैथी और आयुर्वेद के अनुसार, भोजन के तुरंत बाद पानी पीने से पाचक एंजाइम (Digestive Enzymes) हल्के हो जाते हैं, जिससे गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और डायबिटीज, थायराइड या बीपी के मरीजों के लिए यह नियम अलग हो सकता है।
सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. (प्रो.) अनिल अरोड़ा ने जनसत्ता को बताया खाना खाते समय या खाने के तुरंत बाद पानी पीने को लेकर लोगों में कई तरह की धारणाएं हैं। कुछ लोग मानते हैं कि भोजन के साथ पानी पीने से पाचन खराब होता है, जबकि कुछ लोग खाना खाते समय पर्याप्त पानी पीते हैं। डॉक्टर अनिल ने बताया फिलहाल इस विषय पर यह साबित करने वाला स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि हर व्यक्ति को खाना खाने के बाद एक निश्चित समय तक पानी नहीं पीना चाहिए।
आयुर्वेद के मुताबिक खाने के बाद पानी पीने से पाचन पर असर?
आयुर्वेद के अनुसार, भोजन और पानी पीने के समय का शरीर पर असर पड़ सकता है। आयुर्वेद में खाने से तुरंत पहले पानी पीने से जठराग्नि मंद होने, भूख कम लगने और पाचन प्रभावित होने की बात कही जाती है। वहीं, भोजन के तुरंत बाद अधिक पानी पीने से कफ दोष और मेद धातु बढ़ने तथा शरीर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ सकता है। आयुर्वेद में भोजन के बीच-बीच में जरूरत के अनुसार थोड़ा-थोड़ा पानी पीने को बेहतर बताया गया है।
क्या खाना खाने के साथ पानी पीने से पाचन रस पतले होते हैं?
डॉक्टर अनिल अरोड़ा के अनुसार, खाना खाने के दौरान पेट में भोजन को पचाने के लिए पाचक रस और एसिड बनते हैं। एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने से पेट में मौजूद भोजन और तरल की मात्रा बढ़ जाती है और पाचक रस कुछ हद तक पतले हो सकते हैं। हालांकि, सामान्य मात्रा में पानी पीने से पाचन खराब हो जाता है या पाचक रस का असर खत्म हो जाता है, ऐसा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुआ है। इसलिए खाने के साथ जरूरत के मुताबिक पानी पीना ठीक है, लेकिन एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने से बचना बेहतर है।
पेट में खाना कैसे पचता है?
पेट का एक महत्वपूर्ण काम भोजन को मथना और उसे छोटे-छोटे कणों में बदलना है। पेट में मौजूद एसिड और पाचक रस इस प्रक्रिया में मदद करते हैं। इसके बाद भोजन धीरे-धीरे छोटी आंत में पहुंचता है, जहां पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण मुख्य रूप से होता है। एक साथ बहुत अधिक पानी पीने से पेट का कुल आयतन बढ़ जाता है। इससे कुछ लोगों को पेट भारी या भरा हुआ महसूस हो सकता है। खाने के बाद पेट पहले ही भोजन से भरा होता है, ऐसे में एक साथ दो-तीन गिलास या पूरी बोतल पानी पीने से असहजता और पेट फूलने की समस्या महसूस हो सकती है।
क्या खाना खाने के बाद तुरंत पानी पीना गलत है?
खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने के लिए 30 मिनट, एक घंटे या दो घंटे का निश्चित अंतर रखने की सलाह के पीछे मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। स्वस्थ व्यक्ति को प्यास लगने पर पानी पीना चाहिए। भोजन बहुत सूखा हो या निगलने में परेशानी हो रही हो, तो खाने के दौरान पानी पीना जरूरी भी हो सकता है।
ब्लोटिंग की समस्या में पानी कितना पियें?
ब्लोटिंग केवल पानी पीने की वजह से नहीं होती। कुछ खाद्य पदार्थ जैसे चना,राजमा,लोबिया, अधिक मात्रा में खाना, हाई-फैट भोजन और आंतों में भोजन के किण्वन से भी गैस और ब्लोटिंग हो सकती है। चने, छोले और राजमा जैसी दालों में मौजूद कुछ कार्बोहाइड्रेट आंतों में बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंट होकर गैस पैदा कर सकते हैं। बहुत ज्यादा तैलीय भोजन पेट के खाली होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है।
एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स वालों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स से परेशान लोगों में बहुत ज्यादा खाना और तैलीय भोजन लक्षणों को बढ़ा सकता है। ऐसे लोगों के लिए एक साथ बहुत अधिक पानी पीने के बजाय जरूरत के अनुसार थोड़ी मात्रा में पानी लेना अधिक फायदेमंद हो सकता है। अगर पानी या भोजन के बाद बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार या खाना ऊपर आने जैसी समस्या होती है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
क्या ज्यादा पानी पीने से किडनी पर ज्यादा काम पड़ता है?
शरीर अतिरिक्त पानी को पेशाब के जरिए बाहर निकालता है और किडनी पानी तथा सोडियम का संतुलन बनाए रखने में अहम किरदार निभाती है। लेकिन “जितना ज्यादा पानी पिएंगे, उतनी किडनी स्वस्थ रहेगी” यह धारणा सही नहीं है। जरूरत से बहुत ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में खून में सोडियम का स्तर बहुत कम कर सकता है।
पानी कब और कितना पीना चाहिए?
पानी की जरूरत हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। मौसम, शारीरिक गतिविधि, खानपान और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पानी की आवश्यकता बदलती है। इसलिए हर व्यक्ति को रोजाना निश्चित रूप से 3-4 लीटर पानी पीना जरूरी नहीं है। प्यास शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन बहुत अधिक पसीना आने, गर्मी, व्यायाम या बीमारी जैसी स्थितियों में तरल पदार्थ की जरूरत बढ़ सकती है। डॉक्टर ने बताया एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने से बचना चाहिए और शरीर की जरूरत के अनुसार पानी लेना चाहिए। अगर खाना खाते समय प्यास लगती है या भोजन सूखा होने के कारण निगलने में परेशानी होती है, तो पानी पीना बिल्कुल उचित है।
डिस्क्लेमर: खाना खाने के साथ या बाद में पानी पीने को लेकर हर व्यक्ति की जरूरत अलग हो सकती है। सामान्य मात्रा में पानी पीना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन बहुत ज्यादा पानी एक साथ पीने से असहजता हो सकती है। यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है, इसे डॉक्टर की सलाह का विकल्प न मानें। किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में पानी की मात्रा को लेकर अपने डॉक्टर की सलाह लें।
