Brown Phlegm After Smoking: सिगरेट का धुआं आपके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और उनकी कार्यक्षमता को धीरे-धीरे कम कर सकता है। यही कारण है कि हर सिगरेट के पैकेट पर इसके स्वास्थ्य संबंधी खतरों की चेतावनी साफ-साफ लिखी होती है। सिगरेट के पैकेट पर इस जानकारी को पढ़ने और समझने के बावजूद लोग सिगरेट का सेवन धड़ल्ले से कर रहे हैं। हाल ही में एक शख्स ने सोशल मीडिया पर धूम्रपान से जुड़ा एक सवाल पूछा। शख्स ने पूछा कि क्या धूम्रपान के कारण भूरा बलगम आना कैंसर का संकेत हो सकता है? इस सवाल को हमने गंभीरता से लेते हुए कैंसर के डॉक्टर से बात की है।

SSO कैंसर हॉस्पिटल के थोरैसिक सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जितेश राजपुरोहित ने इस सवाल के जवाब में बताया भूरा कफ आना कैंसर नहीं होता। कई धूम्रपान करने वालों में यह इसलिए दिखाई देता है क्योंकि फेफड़े समय के साथ जमा हुए टार, धुएं के कण और पुराने म्यूकस को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे होते हैं। एक्सपर्ट ने बताया अगर भूरा कफ लगातार बना रहे या बढ़ता जाए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस कफ के लिए कैंसर संभावित कारणों में से एक हो सकता है। एक्सपर्ट ने बताया भूरा कफ आना ऐसा संकेत है कि जैसे फेफड़े बता रहे हो कि मुझे कुछ परेशानी हो रही है।

धूम्रपान करने वालों में भूरा कफ आने के कारण

डॉ. राजपुरोहित के अनुसार भूरा या गहरे रंग का कफ आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे

  • धूम्रपान से वायु मार्ग में चिपचिपा भूरा टार जमा हो जाता है। खांसी के दौरान यह कफ के साथ बाहर आ सकता है।
  • क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस की वजह से भी मुंह से भूरे रंग का कफ आ सकता है। धूम्रपान के कारण श्वास नलियों में लंबे समय तक जलन रहती है। इससे रोज खांसी और गाढ़ा, गहरे रंग का म्यूकस बनता है।
  • छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं जलन के कारण थोड़ा खून रिसा सकती हैं, जो समय के साथ भूरा हो जाता है।
  • चेस्ट इंफेक्शन के कारण कफ गाढ़ा और गहरा हो सकता है।

धुआं और प्रदूषण म्यूकस को गहरा और चिपचिपा बना देते हैं। इनमें से अधिकांश कारणों का इलाज किया जा सकता हैं, खासकर अगर व्यक्ति धूम्रपान छोड़ दे। लेकिन अगर लक्षण 2–3 सप्ताह से अधिक बने रहें, कफ ज्यादा गाढ़ा या गहरा हो जाए तो तुरंत सतर्क हो जाएं। 

लंग्स कैंसर के कौन-कौन से दिखते हैं लक्षण? 

बलगम में खून की लकीरें या थक्के दिखनाआवाज बैठना
असामान्य थकान होना, बिना कारण वजन घटना, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ होना लंग्स कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। अगर आप अपनी बॉडी में ये असामान्य बदलाव महसूस करें तो आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। डॉक्टर के अनुसार ये लक्षण निश्चित रूप से कैंसर का संकेत नहीं हैं, लेकिन इन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है।
धूम्रपान छोड़ने के फायदे

यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान छोड़ देता है, तो कुछ ही हफ्तों में म्यूकस का उत्पादन कम हो जाता है, फेफड़े खुद को साफ करना शुरू कर देते हैं और भूरा कफ अक्सर साफ हो जाता है या खत्म हो जाता है। खांसी और जलन धीरे-धीरे कम होने लगती है और गंभीर फेफड़ों की बीमारियों का खतरा समय के साथ घटता है। लंबे समय से धूम्रपान करने वालों को भी फायदा होता है, धूम्रपान छोड़ने में कभी देर नहीं होती।

कौन-से मेडिकल टेस्ट कराएं?

अगर भूरा कफ बना रहता है तो डॉक्टर ये जांच कराने की सलाह दे सकते हैं जैसे

  • चेस्ट एक्स-रे जो संक्रमण या फेफड़ों को होने वाले नुकसान की जानकारी देते हैं।
  • सीटी स्कैन लक्षण दिखने पर विस्तृत इमेजिंग के लिए
  • स्पुटम टेस्ट संक्रमण या असामान्य कोशिकाओं की जांच के लिए किया जाता है।
  • पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट फेफड़ों की कार्यक्षमता जानने के लिए
  • ब्रोंकोस्कोपी जरूरत पड़ने पर फेफड़ों को सीधे देखने के लिए

अगर किसी नॉन स्मोकर को भूरा कफ की शिकायत होती है तो इसके संभावित कारण प्रदूषण, सीने का संक्रमण, साइनस की जलन, धूल-धुएं का संपर्क या गंभीर एसिड रिफ्लक्स हो सकता हैं। गैर-धूम्रपान करने वालों में कैंसर की संभावना कम होती है, लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें तो जांच कराना जरूरी है।

डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। स्मोकिंग के बाद बलगम के रंग में बदलाव या फेफड़ों से जुड़ी किसी भी समस्या को हल्के में न लें। यह कैंसर या किसी गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है। कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले कृपया किसी विशेषज्ञ डॉक्टर या ऑन्कोलॉजिस्ट (Oncologist) से परामर्श जरूर लें।