ताज़ा खबर
 

International Epilepsy Day 2020: मिर्गी का संभव है इलाज, जानिए इस बीमारी से जुड़े कुछ आम मिथक और इनकी सच्चाई

International Epilepsy Day 2020, Date, Myths, Theme, Cause, Treatment, Prevention: इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस, मेदांता के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आत्मा राम बंसल ने मिर्गी के मरीजों के लिए कई जरूरी बातें बताईं। जानिए क्या है वो बातें

mirgi, internatioal epilepsy day, international epilepsy day 2020, world epilepsy day 2020, epilepsy awareness day 2020, 11th February 2020, mirgi divas, health, health experts, medanta hospital, neuroscience, institute of neuroscience, mirgi in india, mirgi ke mareej, epilepsy, doctors statement on mirgi, mirgi ke mithak, myths of epilepsy, epilepsy in india, mirgi patients in india, tips for mirgi patients, how to cure epilepsy, who's statement on epilepsy, causes of epilepsy, epilepsy symptoms, precautions for epilepsy, epilepsy and exercise, home remedies for epilepsy, mirgi se bachne ke gharelu upaay, mirgi ke lakshan, mirgi ke kaaran, health report on epilepsy, epilepsy in hindiमिर्गी बीमारी से जुड़े कुछ आम मिथक जिन पर आसानी से लोग करते हैं विश्वास

International Epilepsy Day 2020, Date, Theme, Cause, Treatment, Prevention: इंडियन एपिलेप्सी एसोसिएशन के अनुसार दुनियाभर में करीब 5 से 6 करोड़ लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। अकेले भारत में ही इनकी संख्या करीब 1 से 2 करोड़ है। मिर्गी यानि कि एपिलेप्सी एक न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है जिसमें मस्तिषक में किसी गड़बड़ी के कारण लोगों को दौरे (Seizures) पड़ते हैं। हालांकि, अन्य बीमारियों के जैसे मिर्गी का इलाज भी संभव है लेकिन लोग सही जानकारी के अभाव में इस बीमारी से जुड़े कई मिथकों पर विश्वास कर लेते हैं। बाबा-तांत्रिक के चक्कर से लेकर लोग मिर्गी पीड़ितों का सामाजिक बहिष्कार तक कर देते हैं।

जबकि सच्चाई ये है कि मिर्गी होना उतनी बड़ी समस्या नहीं है जितना इससे जुड़ी बदनामी के साथ रहना है। इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस, मेदांता के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आत्मा राम बंसल मिर्गी बीमारी से जुड़ी कुछ ऐसी ही मिथकों के बारे में बता रहे हैं।

शादी और मिर्गी: मिर्गी के मरीजों की जल्दी शादी नहीं होती क्योंकि लोगों को लगता है कि ये एक संक्रमक बीमारी है और मरीज के संपर्क में आने से फैलती है। इसके विपरीत, एक शोध में यह खुलासा हुआ है कि मिर्गी पीड़ितों में सामान्य, सफल और स्वस्थ गर्भावस्था की संभावना 90 प्रतिशत अधिक है, साथ ही शिशु पर भी इसका कोई असर नहीं होता। इसके अलावा, कई लोगों को ये भी लगता है कि मरीज हिंसक होते हैं जबकि वो भी दूसरों की तरह सामान्य जिंदगी बिताते हैं।

बच्चों में मिर्गी: डॉ. बंसल के अनुसार, मिर्गी से पीड़ित बच्चे भी दूसरे बच्चों की तरह ही नॉर्मल जिंदगी जी सकते हैं। इसलिए इन्हें भेदभाव के नजर से नहीं देखना चाहिए क्योंकि इसका असर बच्चों के व्यक्तित्व पर पड़ता है। वो कहते हैं कि सुरक्षा की व्यवस्था में बच्चों के खेलने देना चाहिए, खेलना स्वास्थ्यकर होता है। इसके अलावा, बच्चों के तैराकी करने पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। किसी बड़े या परिवारवालों की देखरेख में मिर्गी की समस्या से जूझ रहे बच्चे तैराकी भी कर सकते हैं।

इन्हें रहना चाहिए सतर्क: उन्होंने कहा कि वैसे तो मिर्गी बच्चों और किशोरों में ज्यादा होती है पर यह किसी भी आयु में हो सकती है। स्ट्रोक, सिर में चोट या अलजाइमर जैसी बीमारियों के शिकार लोगों को बुढ़ापे में मिर्गी होने की आशंका ज्यादा रहती है। इसके अलावा, डॉ. बंसल ने बताया कि अल्फ्रेड नोबल, जूलियस सीजर और कई मशहूर खिलाड़ी जैसे लिएंडर पेस मिर्गी के शिकार रहे चुके हैं। मिर्गी के कई मरीज चिकित्सक, नेता, बैंकर और वकील हैं पर इससे वो विचलित नहीं होते।

Next Stories
1 41 प्रतिशत लोगों में इस तरह फैला Corona Virus, जानिए नए शोध से क्या हुआ खुलासा
2 भारत Corona Virus के मामले में 17वें रैंक पर है, नए शोध में सामने आई ये बात
3 एक दिन के नवजात बच्चे में मिला Corona Virus, जानें- प्रेगनेंट महिलाओं को क्या सावधानी बरतनी चाहिए
ये पढ़ा क्या?
X