जब हाल ही में एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने 18-20 घंटे के इंटरमिटेंट फास्टिंग रूटीन को फॉलो करने और दिन में लगभग डेढ़ बार खाना खाने के बारे में बात की, तो उनकी डाइट ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। सेलिब्रिटी वेलनेस रूटीन अक्सर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है, लोगों को सेलिब्रिटी के फिटनेस फंडे अनुशासित, सरल और आज़माने में आकर्षक लगते हैं। सोनाली की फास्टिंग रूटीन से ये संदेश मिलता है कि कम बार खाएं, ज़्यादा देर तक उपवास करें और हेल्दी रहें। मैं डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य अपोलो हॉस्पिटल में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हूं, एक डॉक्टर होने के नाते मैं इंटरमिटेंट फास्टिंग में थोड़ा सुधार करने पर जोर दूंगा।
इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर हो रही सार्वजनिक चर्चा में कुछ बातों को सही संदर्भ में समझने की जरूरत है। इंटरमिटेंट फास्टिंग कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन यह कोई जादुई तरीका नहीं है। वजन घटाने में सबसे जरूरी कैलोरी की कमी (Calorie Deficit) की होती है। यह कमी इंटरमिटेंट फास्टिंग के जरिए भी लाई जा सकती है और सामान्य संतुलित आहार में भोजन की मात्रा कम करके भी। यानी खाने का समय मददगार हो सकता है, लेकिन वजन कम करने का असली कारण कैलोरी की कमी ही है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है?
इंटरमिटेंट फास्टिंग कई तरह की होती है। इसमें 14:10, 16:8 या 18:6 जैसे टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग पैटर्न, ऑल्टरनेट-डे फास्टिंग और लोकप्रिय 5:2 डाइट शामिल हैं, जिसमें सप्ताह के दो दिनों में बहुत कम कैलोरी ली जाती है। इन सभी तरीकों का मूल सिद्धांत एक ही है-खाने के अवसर कम करना। इससे देर रात स्नैकिंग, बार-बार मीठी चाय, बिस्कुट, नमकीन, शुगर ड्रिंक्स और बिना भूख के बार-बार कुछ खाते रहने की आदत अपने-आप कम हो जाती है। यही वजह है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग कई लोगों में असर दिखाती है। इसका कारण यह नहीं कि शरीर अचानक कैलोरी को नजरअंदाज करने लगता है, बल्कि इसलिए कि इंसान पूरे दिन या सप्ताह में कुल मिलाकर कम कैलोरी लेता है।
यह अंतर समझना जरूरी है। कई लोग सोचते हैं कि जितनी लंबी फास्टिंग होगी, उतनी तेजी से वजन घटेगा। ऐसे लोग नाश्ता छोड़ देते हैं, दोपहर का खाना देर से खाते हैं, केवल कॉफी पर दिन निकालते हैं और रात तक बहुत ज्यादा भूखे हो जाते हैं। नतीजतन वे एक बार में जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं। इससे मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है, एसिडिटी, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या और शारीरिक गतिविधि में कमी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। यानी फास्टिंग का समय चाहे लंबा हो, लेकिन अगर कुल कैलोरी ज्यादा है तो वजन कम होने की संभावना कम ही रहेगी।
रिसर्च क्या कहती है?
28 रैंडमाइज्ड क्लीनिकल ट्रायल्स के संयुक्त विश्लेषण में टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग, अल्टरनेट-डे फास्टिंग और 5:2 डाइट का 2 से 52 सप्ताह तक अध्ययन किया गया। रिसर्च में पाया गया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन घटाने का परिणाम लगातार कैलोरी कम करने वाली सामान्य डाइट की तुलना में बेहतर नहीं था। दोनों समूहों में वजन और शरीर की चर्बी (Fat Mass) में लगभग समान कमी देखी गई। कमर की चौड़ाई में हल्की अतिरिक्त कमी और फैट-फ्री मास में कुछ बदलाव जरूर दिखे, लेकिन ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल या ब्लड प्रेशर पर कोई खास असर नहीं दिखा। शोधकर्ताओं का निष्कर्ष था कि इंटरमिटेंट फास्टिंग शरीर की संरचना (Body Composition) या हृदय एवं मेटाबॉलिक हेल्थ के जोखिमों को कम करने में सामान्य कैलोरी कंट्रोल से बेहतर साबित नहीं हुई।
सबसे महत्वपूर्ण बात
इस रिसर्च से सबसे बड़ा संदेश यही मिलता है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग, बिना किसी कंट्रोल के खाने से तो बेहतर हो सकती है, लेकिन सामान्य कैलोरी कंट्रोल डाइट से जरूरी नहीं कि ज्यादा प्रभावी हो। अगर दो लोग समान मात्रा में कैलोरी कम करते हैं एक इंटरमिटेंट फास्टिंग के जरिए और दूसरा नियमित समय पर छोटे-छोटे संतुलित भोजन लेकर तो दोनों का वजन लगभग समान रूप से कम हो सकता है। इसका मतलब यह है कि वजन घटाने के लिए हर किसी को 18–20 घंटे का कठिन फास्ट करने की जरूरत नहीं है। कुछ लोगों के लिए टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग बेहतर विकल्प हो सकती है, जबकि कुछ लोग दिन में तीन संतुलित भोजन, नियंत्रित मात्रा, कम रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, पर्याप्त प्रोटीन और बिना अनावश्यक स्नैकिंग के बेहतर रिजल्ट पा सकते हैं।
सेलिब्रिटी डाइट्स की समस्या
सेलिब्रिटी की डाइट देखकर लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि उनका लाइफस्टाइल आम लोगों से अलग होता है। उनके पास एक्सपर्ट की सलाह,पर्सनल ट्रेनर, पहले से डिसाइड डाइट प्लान और सालों का अनुभव होता है। जो तरीका किसी अभिनेता के लिए उपयुक्त हो, जरूरी नहीं कि वही किसी शिक्षक, नाइट शिफ्ट में काम करने वाले डॉक्टर, डायबिटीज मरीज, मेनोपॉज के दौर से गुजर रही महिला या कम मांसपेशियों वाले बुजुर्ग के लिए भी सही हो।
मांसपेशियों को बचाना भी जरूरी
40 वर्ष की उम्र के बाद और विशेष रूप से 50 वर्ष के बाद वजन घटाने के दौरान मांसपेशियों का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। मांसपेशियां ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने, शरीर का संतुलन बनाए रखने और चलने-फिरने की क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अगर कोई व्यक्ति दिनभर में केवल एक या डेढ़ बार भोजन करता है, तो पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, विटामिन B12 और दूसरे जरूरी पोषक तत्व लेना कठिन हो सकता है, जब तक कि भोजन की योजना बहुत सोच-समझकर न बनाई जाए। मांसपेशियां घटाकर वजन कम करना हेल्दी वेट लॉस नहीं माना जाता।
भारतीयों के लिए यह क्यों ज्यादा जरूरी है?
भारत में बहुत से लोगों में पेट के आसपास चर्बी अधिक होती है, जबकि शरीर में मांसपेशियां अपेक्षाकृत कम होती हैं। ऐसे लोग बहुत मोटे दिखाई नहीं देते, लेकिन उनमें फैटी लिवर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, प्रीडायबिटीज या डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लोगों के लिए लक्ष्य सिर्फ कम बार खाना नहीं होना चाहिए, बल्कि अतिरिक्त कैलोरी कम करना, मांसपेशियों को सुरक्षित रखना और मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार करना होना चाहिए।
डायबिटीज मरीजों के लिए खास सावधानी
डायबिटीज के मरीजों को इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले खास सावधानी बरतनी चाहिए। इंसुलिन या सल्फोनिलयूरिया दवाएं लेने वाले लोगों में लंबे समय तक भूखे रहने से ब्लड शुगर बहुत कम हो सकती है। वहीं कुछ लोग फास्ट तोड़ते समय एक साथ अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट खा लेते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। गर्भवती महिलाओं, इटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों, कमजोर बुजुर्गों, क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित मरीजों या गंभीर बीमारी से गुजर रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक फास्टिंग नहीं करनी चाहिए।
अधिकांश लोगों के लिए क्या बेहतर रहेगा?
ज्यादातर लोगों के लिए अधिक व्यावहारिक तरीका यह है कि रात के खाने और अगले दिन के नाश्ते के बीच 12–14 घंटे का अंतर रखा जाए। रात का भोजन जल्दी करें, देर रात स्नैकिंग से बचें और सुबह नियमित समय पर नाश्ता करें।
- इसके साथ ही खाने की क्वालिटी पर ध्यान दें
- हर खाने में पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करें।
खाने में भरपूर सब्जियों का सेवन करें। फाइबर का इनटेक बढ़ाएं।
चावल और रोटी का सेवन कंट्रोल करें।
फ्राइड फूड और मिठाईयों का सेवन कंट्रोल करें।
मीठी चीजों से परहेज करें।
खाने के बाद 10-15 मिनट तक जरूर टलहें।
हफ्ते में दो से तीन दिन स्ट्रेंथ या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज जरूर करें।
क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी को अपनाना चाहिए?
अगर आपका लाइफस्टाइल, काम का समय, दवाओं, नींद और मानसिक स्वास्थ्य के अनुरूप है तो आप इंटरमिटेंट फास्टिंग कर सकते हैं। फास्टिंग को प्रतियोगिता नहीं बनाएं कि कौन लम्बे समय तक भूखा रह सकता है। किसी भी नॉर्मल इंसान के लिए 18–20 घंटे का फास्ट काम कर सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी या उपयुक्त नहीं है। कोई भी डाइट तभी सफल होती है, जब उसे लंबे समय तक वास्तविक जीवन में अपनाया जा सके। कई डाइट इसलिए असफल हो जाती हैं क्योंकि वे वैज्ञानिक रूप से गलत नहीं होतीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा कठोर होती हैं। अगर कोई व्यक्ति कुछ सप्ताह तक तो लंबे समय तक उपवास कर ले, लेकिन लगातार भूख, कम ऊर्जा, खराब नींद, सामाजिक असुविधा या बार-बार ज्यादा खाने की समस्या होने लगे, तो ऐसी डाइट लंबे समय तक टिक नहीं पाएगी।
सबसे अच्छी डाइट वह नहीं है जो कागज पर सबसे अनुशासित दिखे, बल्कि वह है जिसे व्यक्ति अपने कामकाजी दिनों, छुट्टियों, यात्रा, पारिवारिक समारोहों और त्योहारों के दौरान भी आसानी से अपनाए रख सके। ऐसी डाइट में परिचित और किफायती भोजन शामिल हों, पर्याप्त प्रोटीन, सब्जियां और फाइबर मिलें, भोजन की मात्रा कंट्रोल रहे और हर बार खाना किसी परीक्षा जैसा महसूस न हो।
(Dr Bhattacharya is endocrinologist at Apollo Hospital, Delhi)
