भारत में डायबिटीज और प्री-डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच खानपान में बदलाव बेहद जरूरी हो गया है। हम अपनी डाइट में जो अनाज शामिल करते हैं, उसका सीधा असर हमारे ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए गेहूं का आटा ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत अधिक होता है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स साबुत अनाज (Whole Grains) के सेवन की सलाह देते हैं, जो धीरे-धीरे ग्लूकोज रिलीज करते हैं और शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करते हैं। इसी दिशा में एक भारतीय किसान ने खास तरह का मल्टीग्रेन यूनिक आटा तैयार किया है, जो डायबिटीज और प्री-डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यह आटा अलग-अलग अनाजों को मिलाकर बनाया गया है, जो न सिर्फ पोषण से भरपूर है बल्कि ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है।
हरियाणा के भिवानी जिले के मंडान गांव के किसान वीरेंद्र सिंह ने अपने साथी के साथ मिलकर ये खास तरह का स्प्राउटेड मल्टीग्रेन आटा तैयार किया है। यह आटा पारंपरिक वैदिक चक्कियों पर कम गति (लो RPM) में पीसा जाता है, जिससे इसके पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। इस पहल का उद्देश्य लोगों तक ज्यादा पौष्टिक और हेल्दी डाइट पहुंचाना है, खासकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज या प्रीडायबिटीज है। किसान ने दावा किया है कि ये आटा पारंपरिक अनाजों के सही मिश्रण से तैयार किया गया है जो न केवल पाचन में सहायक है, बल्कि शरीर में ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा करने की क्षमता रखता है। हालिया शोध ने हेल्थ एक्सपर्ट का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। आइए जानते हैं कि इस आटे की सच्चाई क्या है और इसके पीछे की रिसर्च क्या कहती हैं।
स्प्राउटेड मल्टीग्रेन आटा कैसे तैयार किया गया
इस खास आटे को तैयार करने के लिए पांच तरह के अनाज का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें गेहूं के साथ जौ, बाजरा, ज्वार और रागी को मिक्स किया जाता है। सबसे पहले इन सभी अनाजों को लगभग 12 घंटे तक भिगोया जाता है। इसके बाद उन्हें अंकुरित किया जाता है। अंकुरित होने के बाद अनाज को अच्छी तरह सुखाया जाता है। फिर हर अनाज को अलग-अलग पीसकर एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है। चार अनाज समान मात्रा में और रागी थोड़ी कम मात्रा में मिलाई जाती है, जिससे संतुलित पोषण मिलता है।
डायबिटीज के लिए क्यों फायदेमंद है यह आटा
यह मल्टीग्रेन स्प्राउटेड आटा डायबिटीज मरीजों के लिए कई तरह से फायदेमंद माना जा रहा है। इस आटे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसमें मौजूद अनाज धीरे-धीरे ग्लूकोज रिलीज करते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। अंकुरित अनाज पचने में आसान होते हैं और शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। इस अनाज की रोटी का सेवन करने से पाचन दुरुस्त रहता है। स्प्राउटिंग से विटामिन, मिनरल्स और एंजाइम्स की मात्रा बढ़ जाती है जो बॉडी को ज्यादा पोषण देते हैं। इस अनाज के अंकुरण की प्रक्रिया से फाइटिक एसिड घटता है, जिससे पोषक तत्व शरीर को ज्यादा मिलते हैं। ये अनाज बॉडी को लंबे समय तक एनर्जी देता है। यह आटा पेट को देर तक भरा रखता है और बार-बार भूख लगने से बचाता है।
रिसर्च से समझें कैसे ये यूनिक अनाज डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान है ?
गेहूं के साथ जौ , बाजरा , ज्वार और रागी का मिश्रण जिसे अक्सर ‘मल्टीग्रेन आटा’ कहा जाता है Diabetes कंट्रोल करने के लिए एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका है। Journal of Food Science and Technology के अनुसार, अकेले गेहूं का GI मध्यम से उच्च होता है, जो शुगर को तुरंत बढ़ा सकता है। लेकिन जब इसमें मोटे अनाज (Millets) मिलाए जाते हैं, तो पूरे मिश्रण का GI काफी गिर जाता है। मोटे अनाज में जटिल कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो धीरे-धीरे पचते हैं। इससे खाने के बाद ब्लड में शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता। जौ में ‘बीटा-ग्लूकन’नामक एक विशेष घुलनशील फाइबर होता है। क्लिनिकल स्टडीज बताती हैं कि बीटा-ग्लूकॉन पेट में एक जैल बनाता है जो शुगर के अवशोषण (Absorption) को धीमा कर देता है। ये न केवल डायबिटीज कंट्रोल करता है, बल्कि खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को भी कम करता है।
बाजरा और ज्वार मैग्नीशियम के बेहतरीन स्रोत हैं। मैग्नीशियम शरीर में 300 से अधिक एंजाइमी प्रतिक्रियाओं के लिए जिम्मेदार है, जिसमें इंसुलिन का स्राव और ग्लूकोज का उपयोग शामिल है। रिसर्च के अनुसार, मैग्नीशियम युक्त डाइट लेने से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल कर पाती हैं। रागी में सभी अनाजों की तुलना में सबसे अधिक कैल्शियम और पॉलीफेनोल्स होते हैं। शोध बताते हैं कि रागी में मौजूद एंटी-फिंगरल गुण अल्फा-ग्लूकोसिडेस एंजाइम को रोकते हैं, जो कार्बोहाइड्रेट को शुगर में बदलने की गति को धीमा कर देता है। FSSAI और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार में मिलने वाले पैकेज्ड मल्टीग्रेन आटे के बजाय खुद अनाज पिसवाएं, क्योंकि बाजार वाले आटे में अक्सर चोकर (Fiber) निकाल दिया जाता है। साथ ही रागी और बाजरा की तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में इनकी मात्रा संतुलित रखें और पानी का खूब सेवन करें।
निष्कर्ष
स्प्राउटेड मल्टीग्रेन आटा पारंपरिक तरीकों और आधुनिक पोषण विज्ञान का एक बेहतरीन मिश्रण है। यह न सिर्फ डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद है, बल्कि हेल्थ कॉन्शियस लोगों के लिए भी एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। सही डाइट के साथ ऐसे छोटे बदलाव लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य दे सकते हैं।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। डायबिटीज एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है। किसी भी नए खाद्य पदार्थ या विशेष आटे को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर या प्रमाणित डायटीशियन की सलाह जरूर लें। यह आटा चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है।
