ताज़ा खबर
 

भारतीय अमेरिकी किशोर ने बनाई कान की सस्ती मशीन

इस मशीन का इस्तेमाल सस्ते हेडफोन की मदद से भी किया जा सकता है।

Author ह्यूस्टन | April 13, 2016 2:40 AM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भारतीय मूल के 16 वर्षीय अमेरिकी लड़के ने सुनने में मदद करने वाली एक सस्ती मशीन (हियरिंग एड) बनाई है। 60 डॉलर की यह मशीन उन लोगों के लिए मददगार साबित हो सकती है, जो महंगी मशीनें नहीं खरीद सकते। केंटुकी के लुइविल शहर के निवासी मुुकुंद वेंकटकृष्णन ने इस मशीन पर दो साल तक काम किया और जेफरसन काउंटी पब्लिक स्कूल्स आइडिया फेस्ट में इसे पेश किया। हाल ही में उन्होंने इस मशीन के लिए केंटुकी स्टेट साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में पहला स्थान प्राप्त किया है।

इस मशीन का इस्तेमाल सस्ते हेडफोन की मदद से भी किया जा सकता है। इसमें पहले विभिन्न आवृत्तियों की आवाजें बजाकर हेडफोन के जरिए व्यक्ति की सुनने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है। इसके बाद यह अपनी प्रोग्रामिंग एक हियरिंग एड के रूप में कर लेती है। इस क्रम में यह परीक्षण के नतीजों के आधार पर आवाज बढ़ा देती है।

डूपोंट मैनुअल हाई स्कूल के छात्र मुकुंद ने कहा,‘यह एक डॉक्टर की जरूरत को खत्म कर देती है। वास्तव में यह एंप्लीफायर (ध्वनि संवर्धक) है। आपको जितना ऊंचा सुनना है, उसके हिसाब से आवाज बढ़ा लीजिए। इसके लिए 1500 डॉलर तक लिए जाते हैं, जबकि आप 60 डॉलर में ऐसा कर सकते हैं।’

उन्होंने बताया कि आने वाले किसी सिगनल की आवाज बढ़ाने के लिए जरूरी प्रोसेसर ही इसका सबसे महंगा हिस्सा है। यह 45 डॉलर का पड़ता है। बाकी हिस्सों की कीमत लगभग 15 डॉलर है। इस मशीन को बनाने की प्रेरणा मुकुंद को दो साल पहले मिली थी, जब वह अपने दादा-दादी से मिलने भारत गए थे। उन्हें अपने दादा का परीक्षण करवाने और सुनने की मशीन लेने में मदद करने का काम दिया गया था। मुकुंद ने इस महंगी और मुश्किल प्रक्रिया को देखकर इसका विकल्प तलाशने का संकल्प लिया।

मुकुंद ने कहा,‘श्रवण विज्ञानी विशेषज्ञ होते हैं। भारत में किसी श्रवण विज्ञानी को ढूंढ़ पाना और उनका अपॉइंटमेंट ले पाना बेहद मुश्किल है। और फिर हम ठगे गए।’ उन्होंने कहा कि उन लोगों ने डॉक्टर के अपॉइंटमेंट पर 400 से 500 डॉलर खर्च कर दिए और हियरिंग एड पर उन्हें 1900 डॉलर खर्च करने पड़े। मुकुंद ने महसूस किया कि सुनने की शक्ति एक महंगी सुविधा है, जो विकासशील देशों में बहुत से लोग प्राप्त नहीं कर सकते। उन्होंने कहा,‘भारत में, एक मध्यमवर्गीय परिवार की आय 616 डॉलर प्रति वर्ष है। यदि भारत में कोई व्यक्ति एक भी पैसा खर्च किए बिना पूरे साल इस राशि को बचाए तो भी वह हियरिंग एड नहीं खरीद सकता।’

उन्होंने कहा,‘पारंपरिक हियरिंग एड से इतर इस मशीन में अगर ईयरपीस खराब हो जाता है तो इसे बदलना महंगा नहीं है। आपको केवल ईयर बड का दूसरा सेट खरीदना होगा। अपने मौजूदा स्वरूप में यह मशीन दो इंच की है और यह कंप्यूटर प्रोसेसर की तरह दिखती है।’

मुकुंद का लक्ष्य है कि वह इस मशीन को सुनने में दिक्कत का सामना करने वाले उन लोगों में वितरित करे, जो 1000 डॉलर की हियरिंग एड नहीं खरीद सकते। कई संस्थाएं बड़ी संख्या में इस मशीन को बनाने और वितरित करने के लिए मुकुंद से संपर्क कर रही हैं। मुकुंद ने कहा कि वह इन गर्मियों में अपने दादा के पास बंगलुरु जाएगा और उन्हें यह हियरिंग एड देगा।

Hindi News से