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Diabetes Control: डायबिटीज मरीजों को कब इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है? देखिए इंसुलिन चार्ट

जब लाइफस्टाइल में बदलाव, खान-पान पर कंट्रोल करने और दवाईयों का सेवन करने के बावजूद शुगर कम नहीं होता तो मरीज को इंसुलिन लेने की सलाह दी जाती है।

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टाइप-1 डायबिटीज के मरीज डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए दिन में दो से चार बार इंसुलिन लेते हैं। photo-freepik

डायबिटीज एक क्रॉनिक और जिंदगी को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है। जब शरीर में इंसुलिन का उत्पादन करने की क्षमता कम हो जाती है या फिर इंसुलिन का उत्पादन होना बंद हो जाता है तो ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। ब्लड में शुगर का स्तर अधिक होने को हाइपरग्लाइकेमिया कहते हैं। शुगर बढ़ने का असर बॉडी के बाकी अंगों पर भी देखने को मिलता है। डायबिटीज दो तरह की होती है टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज। दोनों तरह की डायबिटीज बढ़ने का असर दिल, किडनी और बॉडी के बाकी अंगों पर देखने को मिल सकता है।

टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के लिए डायबिटीज को कंट्रोल करना मुश्किल होता है। उन्हें शुगर को कंट्रोल करने के लिए दिन में दो से चार बार इंसुलिन लेना पड़ता है। टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है तो उसे कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को कब इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है।

डायबिटीज के मरीज कब लें इंसुलिन: जब डायबिटीज के मरीजों के ब्लड में शुगर का स्तर अधिक हो जाता है तो खाने के बाद या खाने के बीच में इंसुलिन के स्तर को मेंटेन करने के लिए बेसल इंसुलिन दिया जाता है। बेसल इंसुलिन का काम ब्लड ग्लूकोज लेवल को मेंटेन रखना है। अक्सर इस इंसुलिन का इस्तेमाल फास्ट के दौरान मरीज की शुगर बढ़ने पर उसे कंट्रोल करने के लिए किया जाता है।

जब भी कोई व्यक्ति फास्ट करता है तो उस समय लिवर ग्लूकोज निकालता है, जो हमारी रक्त कोशिकाओं से होते हुए शरीर में जाता है। बेसल इंसुलिन इसी ग्लूकोज लेवल को कंट्रोल में रखने का काम करता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब लाइफस्टाइल में बदलाव, खान-पान पर कंट्रोल करने और दवाईयों का सेवन करने के बावजूद शुगर कम नहीं होता तो मरीज को इंसुलिन लेने की सलाह दी जाती है।

इंसुलिन चार तरह के होते हैं
1- शॉर्ट एक्टिंग इंसुलिन – इसका असर बहुत तेजी से 30-36 मिनट में होने लगता है। ये इंसुलिन 6-8 घंटे तक असरदार होता है।
2- इंटरमीडिएटएक्टिंग इंसुलिन धीरे-धीरे काम करता है। इसका बॉडी में 10-14 घंटे तक असर रहता है।
3- लॉग एक्टिंग इंसुलिन 24 घंटे तक ही असरदार रहता है। एक्टिंग इंसुलिन का इस्तेमाल दिन में तीन बार कर सकते हैं। अगर आप लॉग एक्टिंग इंसुलिन का प्रयोग कर रहे हैं तो इसे
दिन में एक बार सोने से पहले इस्तेमाल करें।
4-इंसुलिन का मिश्रण जो सबको मिलाकर किया जाता है।

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