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Diabetes से ग्रस्त हैं माता-पिता तो जानिये आपको कितना है इस बीमारी से पीड़ित होने का खतरा?

What is Diabetes Disease: टाइप 1 डायबिटीज ऑटो-इम्युन डिजीज है जो कई बार आनुवांशिक कारणों से होती है। इसलिए इसे वंशानुगत डायबिटीज भी कहा जाता है

माना जाता है कि अगर माता-पिता या फिर इनमें से किसी एक को उच्च रक्त शर्करा की शिकायत है तो बच्चों में मधुमेह की समस्या देखने को मिलती है

How to avoid diabetes risk: डायबिटीज यानी मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो शरीर में ब्लड शुगर बढ़ जाने के कारण होती है। पिछले कुछ वर्षों में इस बीमारी के मरीजों की संख्या पूरी दुनिया में बढ़ी है। खराब जीवन शैली के कारण होने वाली इस बीमारी का खतरा वैसे तो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। हालांकि, बढ़ती उम्र में इसे नियंत्रित कर पाना आसान नहीं है।

कितना होता है खतरा: मधुमेह जिसे आमतौर पर शुगर की बीमारी कहते हैं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि मधुमेह एक आनुवांशिक बीमारी है, इसमें जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को ये बीमारी होती है तो दूसरों में भी इससे पीड़ित होने का खतरा बना रहता है। माना जाता है कि अगर माता-पिता या फिर इनमें से किसी एक को उच्च रक्त शर्करा की शिकायत है तो बच्चों में मधुमेह की समस्या देखने को मिलती है।

एक शोध के मुताबिक जिनके माता-पिता में से कोई एक डायबिटिक्स हैं, उनमें मधुमेह का जोखिम 4 गुना अधिक होता है। वहीं, यदि दोनों ही अभिभावकों को मधुमेह की दिक्कत है तो बच्चों में इस बीमारी का खतरा 50 फीसदी बढ़ जाता है। किन कारणों से लोग आ जाते हैं शुगर की बीमारी की चपेट में, जानिये

जेनेटिक होती है टाइप 1  डायबिटीज: आमतौर पर डायबिटीज 2 प्रकार की होती है, टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज। टाइप 1 डायबिटीज ऑटो-इम्युन डिजीज है जो कई बार आनुवांशिक कारणों से होती है। इसलिए इसे वंशानुगत डायबिटीज भी कहा जाता है। टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के शरीर की कोशिकाएं पैंक्रिएटिक सेल्स जहां इंसुलिन का निर्माण होता है, उन्हें ही खत्म कर देती हैं। कोरोना वायरस के दौर में बच्चों में बढ़ा है टाइप 1 डायबिटीज का खतरा

खराब जीवन शैली है टाइप 2 डायबिटीज की वजह: डायबिटीज टाइप 2 में बॉडी सेल्स इंसुलिन को रिस्पॉन्ड नहीं कर पाती हैं, इसके अलावा शरीर में इंसुलिन कम बनना भी डायबिटीज टाइप 2 के कारण हो सकता है। डॉक्टर्स के अनुसार खराब जीवन शैली, शारीरिक असक्रियता, ब्लड में फैट और कोलेस्ट्रॉल की अधिकता, मोटापा, ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस और नींद की कमी से ये बीमारी लोगों को अपनी चपेट में लेती है।

किन बातों का रखें ख्याल: टाइप 1 डाबिटीज के खतरे को कम करने के लिए जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अधिक सतर्क रहें ताकि नवजात शिशु स्वस्थ पैदा हों और उनका वजन संतुलित रहे। साथ ही, शिशु को संक्रमण से बचाएं और सभी जरूरी टीके लगाएं। वहीं, डायबिटीज टाइप 2 के खतरे को कम करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का चुनाव करें।

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