पेट फूलना यानी ब्लोटिंग आज के समय में एक आम लेकिन बेहद परेशान करने वाली समस्या बन चुकी है। कभी पेट में भारीपन, कभी गैस, तो कभी बिना वजह पेट तना-तना सा महसूस होना रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है। अक्सर लोग इसे छोटी परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसके पीछे हमारी रोज की कुछ गलत आदतें जिम्मेदार होती हैं। लखनऊ के हेल्थ और वेलनेस कोच कपिल कनोडिया ने ब्लोटिंग के 8 बड़े कारण बताए हैं और उनसे राहत पाने के आसान उपाय भी साझा किए हैं।
फाइबर का असंतुलन
फाइबर पाचन के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी कमी या अधिकता दोनों ही नुकसान पहुंचा सकती हैं। बहुत कम फाइबर लेने से कब्ज और गैस होती है, जबकि अचानक ज्यादा फाइबर लेने से पेट फूलने लगता है। कपिल कनोडिया के अनुसार, फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए। रोजाना 2-3 ग्राम से ज्यादा फाइबर न बढ़ाएं और इसके साथ पानी की मात्रा भी बढ़ाएं।
पानी कम या ज्यादा पीना
कुछ लोग जरूरत से कम पानी पीते हैं, जबकि कुछ बहुत ज्यादा। दोनों ही स्थितियां पाचन तंत्र को बिगाड़ सकती हैं। कपिल कनोडिया कहते हैं कि अगर पेशाब का रंग हल्का पीला है, तो पानी की मात्रा सही मानी जाती है। खासकर फाइबर बढ़ाते समय एक अतिरिक्त गिलास पानी जरूर पिएं।
बहुत तेजी से खाना
जल्दी-जल्दी खाने से हम ज्यादा हवा निगल लेते हैं, जिससे पेट में गैस और भारीपन बढ़ता है। हर निवाले को अच्छी तरह चबाकर खाएं और मोबाइल या टीवी देखते हुए खाने से बचें।
जरूरत से ज्यादा खाना
पेट भरकर या असहज होने तक खाना ब्लोटिंग की बड़ी वजह है। कपिल कनोडिया के मुताबिक, पेट की 70 प्रतिशत क्षमता तक ही खाना चाहिए। इससे एसिडिटी कम होती है और पेट पर दबाव नहीं पड़ता।
देर रात खाना
देर रात खाना पाचन क्रिया को धीमा कर देता है, क्योंकि इस समय शरीर आराम की तैयारी करता है। बेहतर है कि सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले डिनर कर लिया जाए।
बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल
अगर आप दिन में एक घंटा वर्कआउट करते हैं लेकिन बाकी समय कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तो भी पाचन प्रभावित हो सकता है। हर 30–40 मिनट में उठकर थोड़ा चलें या स्ट्रेच करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और ब्लोटिंग कम होती है।
फूड इंटॉलरेंस
कुछ लोगों को दूध, गेहूं या किसी खास फूड से ब्लोटिंग होती है, लेकिन उन्हें इसका पता नहीं चल पाता। ऐसे में 2-4 हफ्ते तक एक-एक फूड को हटाकर देखें और फिर दोबारा शामिल करें। अगर बार-बार उसी फूड से परेशानी हो, तो वही वजह हो सकती है। बिना डॉक्टर की सलाह के महंगे टेस्ट कराने से बचें।
तनाव
लगातार तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो पाचन क्रिया को धीमा कर देता है। इससे गैस, एसिडिटी और कब्ज की समस्या हो सकती है। रोजाना हल्की वॉक, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, तय समय पर सोना और 10-15 मिनट ध्यान करना काफी मददगार साबित होता है।
सही फाइबर और पानी की मात्रा कैसे पहचानें?
हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. जगदीश हिरेमठ के अनुसार, फाइबर और पानी की जरूरत उम्र, शारीरिक गतिविधि और खानपान पर निर्भर करती है। अचानक बदलाव करने की बजाय धीरे-धीरे आदत बदलें और एक हफ्ते तक शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। अगर फाइबर बढ़ाने के बाद गैस और भारीपन हो रहा है, तो समझिए बढ़ोतरी ज्यादा तेज है। वहीं सूखा स्टूल या कब्ज पानी की कमी का संकेत हो सकता है। लक्ष्य होना चाहिए रोज साफ पेट और बिना भारीपन के महसूस करना।
निष्कर्ष
पेट फूलना कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन इसे लगातार नजरअंदाज करना भी सही नहीं। सही खानपान, पानी की उचित मात्रा, समय पर भोजन, एक्टिव लाइफस्टाइल और तनाव को कंट्रोल करके इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। अगर फिर भी ब्लोटिंग बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
