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इन घरेलू तरीकों को अपनाकर हो सकती है स्वाइन फ्लू से सुरक्षा

एच1 एन1 नाम का यह वायरस सुअरों के श्वसन तंत्र से निकलता है, इसीलिए इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है।
स्वाइन फ्लू एक प्रकार संक्रामक रोग है जो सीधे हमारी श्वसन प्रणाली पर हमला बोलता है।

स्वाइन फ्लू एक इंफ्लूएंजा वायरस के संक्रमण की वजह से फैलता है। एच1 एन1 नाम का यह वायरस सुअरों के श्वसन तंत्र से निकलता है, इसीलिए इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है। किसी भी संक्रमित व्यक्ति से यह वायरस खांसने और छींकने जैसी क्रियाओं से आसानी से फैलता है। इसकी चपेट में आने से कई बार लोगों की मौत भी हो जाती है। खांसी, थकान, उल्टी आना, बुखार, दस्त और शरीर में दर्द आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। इस जानलेवा बीमारी से बचने के लिए आपको कई तरह की सहूलियतों को अपनाना बहुत जरूरी होता है। अपने आस-पास साफ-सफाई रखना, किसी भी चीज को छूने के बाद हाथ साबुन से धुलना, बाहर निकलने पर मुंह पर मॉस्क लगाकर रखना आदि कुछ छोटे-मोटे ऐसे उपाय हैं जिसे अपनाकर इसे फैलने से रोका जा सकता है।

स्वाइन फ्लू की चपेट में आने पर आप घरेलू उपचार से भी इस बीमारी से निपट सकते हैं। आज हम स्वाइन फ्लू से बचाने वाले उन्हीं घरेलू तरीकों के बारे में चर्चा करेंगे। तुलसी नैसर्गिक गुणों वाली औषधि है, इसमें कोई दो राय नहीं है। स्वाइन फ्लू से लड़ने में यह काफी मददगार है। दोनों तरफ से धुली हुई तुलसी की पत्तियाँ रोज सुबह खाने से यह गले और फेफड़े को साफ रखती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचाती है। गिलोई की एक फुट लंबी शाखा लेकर इसमें तुलसी की 5-6 पत्तियाँ मिला लें। अब इसे 15-20 मिनट तक उबाल कर इसमें स्वादानुसार काली मिर्च, काला नमक और मिश्री मिला लें| अब इसे ठंडा होने दें और गुनगुने का सेवन करें| यह इम्यूनिटी के लिए भी काफी कारगर उपाय है|

आरती के लिए इस्तेमाल होने वाला कपूर भी स्वाइन फ्लू के लिए काफी उपयोगी है। गोली के आकार का कपूर का टुकड़ा लेकर इसे पानी के साथ निगल लें। छोटे बच्चों को इसे आलू या केले के साथ मलकर दिया जा सकता है। साथ ही साथ यह ध्यान रखें कि इसे महीने में एक बार ही लेना है। लहसुन की दो कलियाँ हर सुबह चबाकर स्वाइन फ्लू से बचा जा सकता है। इसे गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। इसके अलावा जिन लोगों को दूध से एलर्जी नहीं है वे रोज रात को दूध में थोड़ी हल्दी मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं।

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