Colon Cancer Prevention Tips: कैंसर की जल्द पहचान ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। कोलोरेक्टल कैंसर जिसे बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर कहा जाता है, इसके मामले दुनिया भर में तेजी से बढ़ने लगे हैं। बड़ी आंत के इस कैंसर के हर साल लगभग 12 लाख नए मामले सामने आते हैं। कोलोरेक्टल कैंसर तब होता है जब आंत की कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। आमतौर पर ये छोटे-छोटे पॉलीप्स (polyps) से शुरू होता है, जो समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं। इस कैंसर के लिए फैमिली हिस्ट्री और जेनेटिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इस बीमारी के लिए खराब डाइट, बिगड़ता लाइफस्टाइल, मोटापा, स्मोकिंग, अल्कोहल का ज्यादा सेवन और बढ़ती उम्र जिम्मेदार हो सकती है।
गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल कानपुर में गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉक्टर वीके मिश्रा के मुताबिक अगर इस कैंसर का जल्दी पता लग जाए, साथ ही डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव किया जाए तो इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि इस कैंसर के बॉडी में कौन कौन लक्षण दिखते हैं और कैसे इससे बचाव किया जा सकता है।
Colorectal Cancer के लक्षण
- मल त्याग की आदत में बदलाव होना। कभी कब्ज या कभी दस्त होना।
- मल में खून आना
- पेट में दर्द, ऐंठन या लगातार असहजता होना
- बार-बार गैस या ब्लोटिंग
- शौच के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न लगना
- बिना कारण वजन कम होना
- कमजोरी और थकान होना
- पतला या रिबन जैसा मल आना
कोलोरेक्टल कैंसर से कैसे करें बचाव
हेल्दी डाइट है सबसे जरूरी
बड़ी आंत के कैंसर से बचाव करना चाहते हैं तो हेल्दी डाइट का सेवन करें। डाइट में फाइबर रिच फूड्स का सेवन करना बेहद जरूरी है। डाइट को संतुलित रखने के लिए जरूरी है कि डाइट में फल और सब्जियां ज्यादा खाएं। खाने में होल ग्रेन्स जैसे दलिया, ओट्स, ब्राउन राइस शामिल करें।
नट्स जैसे बादाम, अखरोट का सेवन करें। बीन्स जैसे राजमा और बीन्स को डाइट में शामिल करें।
डाइट में इन फूड्स से करें परहेज
कोलन कैंसर से बचाव करना चाहते हैं तो डाइट में रेड मीट,प्रोसेस्ड फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करने से बचें। ये फूड आपका पाचन बिगाड़ सकते हैं और कोलन कैंसर के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
रोजाना करें फिजिकल एक्टिविटी
सीडेंट्री लाइफस्टाइल कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। रोज कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें। हफ्ते में 5 दिन ब्रिस्क वॉक, गार्डनिंग या कोई स्पोर्ट्स खेलें। एक्सरसाइज से आंतों की मूवमेंट बेहतर होती है और सूजन कम होती है।
वजन को रखें कंट्रोल
ओवरवेट या मोटापा कोलोरेक्टल कैंसर का बड़ा रिस्क फैक्टर है। BMI 25 से ज्यादा होने पर खतरा बढ़ सकता है। शरीर में ज्यादा फैट होने से इंफ्लेमेशन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन होता है।
अल्कोहल से दूर रखना है जरूरी
ज्यादा मात्रा में शराब पीना कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। शरीर में अल्कोहल टूटकर एसीटेल्डिहाइड बनाता है। ये केमिकल DNA को नुकसान पहुंचा सकता है।
स्मोकिंग की आदत छोड़े
कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव करना है तो आप बीड़ी, सिगरेट, गुटखा या तंबाकू का सेवन करने से परहेज करें। किसी भी रूप में निकोटीन का सेवन कैंसर का खतरा बढ़ाता है।
फैमिली हिस्ट्री को न करें नजरअंदाज
अगर परिवार में किसी को यह कैंसर रहा है, तो आपको कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को ज्यादा सतर्क रहने और नियमित जांच कराने की जरूरत है।
समय पर कराएं स्क्रीनिंग
45 साल की उम्र के बाद पहली कोलोनोस्कोपी कराना जरूरी। इसके बाद डॉक्टर की सलाह से नियमित जांच कराते रहें। समय पर जांच से कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग सकता है, जिससे इलाज आसान हो जाता है। समय पर जांच से कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग सकता है, जिससे इलाज आसान हो जाता है।
निष्कर्ष
कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ जरूर रहा है, लेकिन सही डाइट, एक्टिव लाइफस्टाइल और नियमित स्क्रीनिंग से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या जांच के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
