सीड्स यानी बीजों का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण लोग कई तरह के सीड्स को अपनी डाइट में शामिल करते हैं। कद्दू, खरबूजे और तरबूज के बीजों के अलावा काला तिल भी पोषण से भरपूर विकल्प है। तिल मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं सफेद और काला।  हालांकि, सफेद तिल की तुलना में काले तिल का इस्तेमाल कम किया जाता है। दोनों में प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर, कैल्शियम और अन्य जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। काले तिल में एंटीऑक्सीडेंट यौगिक भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ये छोटे-से बीज हेल्दी फैट, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन व जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स का अच्छा स्रोत हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में काले तिल को डाइट में शामिल करने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं।

आर्टेमिस हॉस्पिटल्स की इंटरनल मेडिसिन यूनिट हेड और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सीमा धीर के अनुसार, काले तिल में एंटीऑक्सीडेंट जैसे नेचुरल प्लांट बेस्ड यौगिक पाए जाते हैं, जो कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाले नुकसान से बचाने में भूमिका निभाते हैं। अगर डाइट में इन सीड्स का सेवन किया जाए तो दिल की सेहत दुरुस्त रहती है। काले तिल में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर रखने और संतुलित भोजन के साथ लेने पर ब्लड शुगर को मैनेज करने में भी मदद कर सकता है। गर्मियों में भी काले तिल का सेवन किया जा सकता है। हालांकि, इसे बहुत ज्यादा मात्रा में खाने से कुछ लोगों को पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए मौसम चाहे गर्मी का हो या सर्दी का, काले तिल का सेवन सीमित और संतुलित मात्रा में करना बेहतर है।

100 ग्राम काले तिल में कितने पोषक तत्व होते हैं?  

मारेंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम की क्लिनिकल डाइटिशियन मीनाक्षी अग्रवाल बताती हैं कि काले तिल में लिग्नान भी पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। 100 ग्राम काले तिल में मौजूद कैलोरी और प्रोटीन की बात करें तो इंडियन फूड कंपोजिशन टेबल्स (IFCT) के अनुसार 100 ग्राम काले तिल में लगभग 506 कैलोरी, 19.2 ग्राम प्रोटीन,17.2 ग्राम डाइटरी फाइबर मौजूद होता है। हालांकि, काले तिल कैलोरी से भरपूर होते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है, खासकर अगर आप कुल कैलोरी का ध्यान रख रहे हैं।

काले तिल के 6 संभावित फायदे

दिल की सेहत के लिए है फायदेमंद

काले तिल का सेवन करने से दिल की सेहत में सुधार होता है। काले तिल में मौजूद अनसैचुरेटेड फैट और तिल के लिग्नान गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करते हैं और दिल की हेल्थ दुरुस्त रखते हैं। फाइबर रिच इन सीड्स की तासीर गर्म होती है लेकिन आप इन्हें गर्मी में भी खास तरीके से खा सकते हैं। Nutrition Research और Journal of Agricultural and Food Chemistry में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक तिल में पाए जाने वाले विशिष्ट एंटीऑक्सीडेंट सेसामिन (Sesamin) और सेसामोलिन (Sesamolin) शरीर में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं। ये लिवर में कोलेस्ट्रॉल के निर्माण को कम करता है, जिससे LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर घटता है और गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार होता है।

एंटीऑक्सीडेंट से हैं भरपूर

इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं। Food Chemistry और Journal of Agricultural and Food Chemistry में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक काले तिल में पाए जाने वाले लिग्नान शक्तिशाली फ्री-रेडिकल स्कैवेंजर्स हैं। ये यौगिक शरीर में हानिकारक फ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं, जिससे कोशिकाओं के DNA, प्रोटीन और लिपिड को नुकसान पहुंचाने से बचाव होता है।

पाचन के लिए भी है जरूरी

काले तिल में मौजूद डाइटरी फाइबर पाचन को बेहतर रखने और नियमित मल त्याग में मदद करता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में भी मदद कर सकता है। International Journal for Research in Applied Science and Engineering Technology (IJRASET) और Indian Food Composition Tables (IFCT) के डेटा के अनुसार, काले तिल में लगभग 12% से 17% तक डाइटरी फाइबर पाया जाता है। इसका अघुलनशील फाइबर मल का आकार बढ़ाता है, आंतों की पेरीस्टाल्सिस गति को तेज करता है, जिससे कब्ज और कठोर मल की समस्या से तुरंत राहत मिलती है। इसमें मौजूद  घुलनशील फाइबर आंतों में पानी को सोखकर एक जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जो पाचन क्रिया को सुगम बनाता है।  

हड्डियों के लिए उपयोगी भी है उपयोगी

इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो हड्डियों और मांसपेशियों को हेल्दी रखने में मदद करते हैं।

ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी हैं असरदार

काले तिल में फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट का कॉम्बिनेशन होता जो खाने के बाद ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल रखने में मदद करता है।  डायबिटीज मरीज रोजाना सीमित मात्रा में इसका सेवन करें तो फायदा होगा।

स्किन और बालों को देते हैं पोषण

काले तिल में मौजूद हेल्दी फैट, जिंक, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट स्किन और बालों को पोषण देने में भी मददगार साबित होते हैं।

रोज कितने काले तिल खाने चाहिए?

डायटीशियन के मुताबिक रोजाना 1–2 बड़े चम्मच यानी लगभग 10–20 ग्राम काले तिल का सेवन किया जा सकता है। इन्हें दही, सलाद, सब्जियों, चटनी, स्मूदी या दूसरे भारतीय व्यंजनों में मिलाकर खाया जा सकता है। काले तिल के फायदे तभी बेहतर तरीके से मिल सकते हैं, जब इन्हें संतुलित और पौष्टिक डाइट का हिस्सा बनाया जाए। ज्यादा मात्रा में खाने से अतिरिक्त कैलोरी का सेवन हो सकता है, इसलिए पोर्शन का ध्यान रखना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: काले तिल पौष्टिक खाद्य पदार्थ हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। इनका सेवन संतुलित मात्रा में करें। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या या एलर्जी की स्थिति में डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।