साइलेंट किलर के रूप में जाना जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर आज घर-घर की समस्या बन चुका है। अक्सर लोग बीपी को केवल दवाओं के भरोसे छोड़ देते हैं, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं के साथ-साथ लाइफस्टाइल में किए गए छोटे बदलाव इसे नेचुरल तरीके से कंट्रोल कर सकते हैं।  एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झाजर के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन आज के समय में एक बेहद आम समस्या बन चुकी है। भारत में करीब 30% वयस्क इससे प्रभावित हैं। डॉक्टर के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन के ज्यादातर मामलों में कोई एक स्पष्ट कारण नहीं मिलता, इसलिए इसे एसेंशियल हाइपरटेंशन कहा जाता है। फिर भी कुछ मुख्य कारण और जोखिम कारक जैसे तनाव, खराब लाइफस्टाइल,मोटापा,ज्यादा नमक का सेवन,किडनी से जुड़ी समस्या,दवाइयों या स्टेरॉयड का असर इसे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि नेचुरल तरीके से बीपी को कैसे कंट्रोल करें।

नॉर्मल और हाई बीपी में अंतर

डॉक्टरों के अनुसार, सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 होना चाहिए, जबकि 130 तक को प्री-हाइपरटेंशन माना जाता है। अगर बीपी 120/80 से ज्यादा आता रहे तो मरीज को हाई बीपी की परेशानी है। अगर इसे समय रहते कंट्रोल न किया जाए, तो यह दिल, किडनी, आंखों और दिमाग पर गंभीर असर डाल सकता है। डॉक्टर विमल के अनुसार, लाइफस्टाइल में बदलाव करके कई मामलों में बिना दवा के भी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए कौन-कौन से नेचुरल तरीके अपना सकते हैं।

डाइट में सुधार करें

हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और दालों को शामिल करें। ये फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना भी जरूरी है, क्योंकि ये शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और बीपी को खराब कर सकते हैं।

नमक (सोडियम) का सेवन कम करें

ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। कोशिश करें कि रोजाना नमक का सेवन सीमित रखें और खाने में अतिरिक्त नमक डालने से बचें। पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड्स में छिपा हुआ नमक भी काफी ज्यादा होता है, इसलिए लेबल पढ़कर ही चीजें चुनें। कम नमक वाला आहार बीपी को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाता है।

पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम बढ़ाएं

ये तीनों मिनरल्स ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पोटैशियम शरीर से अतिरिक्त सोडियम को बाहर निकालने में मदद करता है, जबकि कैल्शियम और मैग्नीशियम रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करते हैं। इसके लिए केले, पालक, दही, नट्स और बीजों का सेवन बढ़ाएं। प्राकृतिक स्रोतों से इन पोषक तत्वों को लेना ज्यादा फायदेमंद होता है।

फैट और कोलेस्ट्रॉल से बचें

ज्यादा फैट और कोलेस्ट्रॉल युक्त भोजन ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। तले-भुने और ऑयली फूड्स का सेवन कम करें और हेल्दी फैट जैसे ओमेगा-3 युक्त आहार को अपनाएं। रेड मीट, फास्ट फूड और ट्रांस फैट से दूर रहना बेहतर होता है। संतुलित मात्रा में हेल्दी फैट लेना शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

नियमित योग और मेडिटेशन करें

तनाव हाई ब्लड प्रेशर का एक बड़ा कारण है, इसलिए इसे कंट्रोल करना जरूरी है। रोजाना योग, प्राणायाम और मेडिटेशन करने से मन शांत रहता है और शरीर रिलैक्स होता है। इससे ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर आने लगता है। गहरी सांस लेने की तकनीकें और ध्यान (मेडिटेशन) मानसिक तनाव को कम करके दिल और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

वजन कम करें

ओवरवेट या मोटापा हाई ब्लड प्रेशर का बड़ा कारण होता है। वजन कम करने से बीपी पर सीधा सकारात्मक असर पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार, केवल 1 किलो वजन घटाने से भी ब्लड प्रेशर में गिरावट आ सकती है। इसके लिए नियमित एक्सरसाइज, संतुलित डाइट और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है। धीरे-धीरे और स्थायी रूप से वजन कम करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।

शुगर और अनहेल्दी फैट कम करें

अधिक शुगर और अनहेल्दी फैट का सेवन वजन बढ़ाने और ब्लड प्रेशर को खराब करने में योगदान देता है। मीठे पेय, मिठाइयां और प्रोसेस्ड फूड्स से दूरी बनाएं। इनकी जगह फल, ड्राई फ्रूट्स और हेल्दी स्नैक्स को शामिल करें। संतुलित मात्रा में शुगर लेना ठीक है, लेकिन ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सही खानपान से बीपी को नियंत्रित रखना आसान हो जाता है।

 डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। ब्लड प्रेशर एक गंभीर स्थिति है। डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी कोई भी दवा बंद न करें और न ही दवा की खुराक में बदलाव करें। लाइफस्टाइल में बदलाव दवाओं का विकल्प नहीं बल्कि सहायक हो सकते हैं। किसी भी बदलाव से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। जंसत्ता इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता है।