आज के समय में खराब लाइफस्टाइल, तनाव और बढ़ते प्रदूषण के कारण कई दंपतियों को माता-पिता बनने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ‘आईवीएफ’ (In Vitro Fertilization) यानी टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक विज्ञान का एक ऐसा वरदान बनकर उभरी है, जिसने देश-दुनिया के लाखों परिवारों में किलकारियां गूंजाई हैं। सरल शब्दों में कहें तो, जब महिला प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं कर पाती, तब लैब में महिला के अंडाणु (Egg) और पुरुष के शुक्राणु (Sperm) का मिलान कराकर भ्रूण तैयार किया जाता है और उसे महिला के गर्भाशय में डाला जाता है। हालांकि, देश में अभी भी एक बड़ी आबादी इस तकनीक की बारीकियों से अनजान है। आईवीएफ की इसी प्रक्रिया को सफल बनाने में ‘एग डोनेशन’ (अंडाणु दान) की भी एक बहुत बड़ी भूमिका होती है, जो उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है जिनकी बॉडी में खुद के अंडे नहीं बनते या हेल्दी एग नहीं बनते। लेकिन एग डोनेशन से जुड़े कई मेडिकल और कानूनी सवाल हैं जैसे एक महिला कितनी बार एग डोनेशन कर सकती है? क्या बार-बार अंडाणु निकालना उसकी अपनी सेहत के लिए सुरक्षित है? इन सभी संवेदनशील और जरूरी सवालों के जवाब हमने Birla Fertility and IVF सेंटर में स्पेशलिस्ट और सेंटर हेड डॉक्टर मुस्कान छाबरा से जाना।

Egg Donation क्या है? किन महिलाओं को इसकी जरूरत पड़ती है?

एग डोनेशन (Egg Donation) को मेडिकल भाषा में थर्ड पार्टी रिप्रोडक्शन (Third Party Reproduction) कहा जाता है। इसमें एक स्वस्थ महिला अपने अंडाणु (Eggs) दान करती है, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरी महिला के IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) उपचार में किया जाता है। इसकी जरूरत मुख्य रूप से उन महिलाओं को पड़ती है जिनमें अंडाशय उम्र बढ़ने के कारण पर्याप्त अंडाणु नहीं बना रहे होते या उनका अंडाशय में बचे अंडों की संख्या (Ovarian Reserve) खत्म हो चुकी होती है। इसके अलावा, यदि किसी महिला में ऐसी आनुवंशिक बीमारी हो जिसे आधुनिक तकनीकों जैसे PGT (Preimplantation Genetic Testing) से भी रोका नहीं जा सकता, तब भी डॉक्टर एग डोनेशन की सलाह दे सकते हैं।

भारत के कानून ART Act 2021 के मुताबिक एक महिला कितनी बार एग डोनेट  कर सकती है?

भारत के ‘असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी यानी सहायक प्रजनन तकनीक कानून (Regulation) ART एक्ट, 2021’ के तहत कोई भी महिला अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक ही बार एग डोनेट कर सकती है। इसलिए, भारत के संदर्भ में कानूनी रूप से बार-बार अंडाणु निकालना प्रतिबंधित है। इस एक्ट के मुताबिक केवल 23 से 35 वर्ष की हेल्दी महिला ही एग डोनेट कर सकती है। यह नियम महिला की शारीरिक सुरक्षा और भविष्य की प्रजनन क्षमता (Fertility) को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

एग डोनेशन से पहले किन जांचों और कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है?

एग डोनेशन शुरू करने से पहले डॉक्टर सबसे पहले उस दंपति की जांच करते हैं जिन्हें डोनर एग की जरूरत होती है। महिला का AMH (Anti-Müllerian Hormone) टेस्ट किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके अंडाशय में अंडाणुओं का भंडार कितना बचा है। यदि एग डोनेशन की जरूरत होती है, तब उपयुक्त डोनर का चयन किया जाता है। इस दौरान डोनर का ब्लड ग्रुप, अल्ट्रासाउंड, AMH, संक्रामक बीमारियों की जांच और दूसरे ब्लड टेस्ट किए जाते हैं। इसके साथ ही डोनर और दंपति दोनों से कानूनी शपथपत्र (Affidavit) भरवाया जाता है। डोनर यह लिखित घोषणा करती है कि उसने पहले कभी एग डोनेट नहीं किया है और भविष्य में भी दोबारा नहीं करेगी। वहीं दंपति यह स्वीकार करता है कि जन्म लेने वाला बच्चा उनका कानूनी उत्तराधिकारी होगा। इसके अलावा, डोनर के लिए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस भी कराया जाता है ताकि किसी मेडिकल जटिलता की स्थिति में उसका इलाज सुनिश्चित हो सके।

एग डोनेशन की पूरी प्रक्रिया कितने दिन की होती है?

डॉक्टर ने बताया कि एग डोनेशन की प्रक्रिया लगभग 10 से 12 दिन में पूरी होती है। डोनर महिला को करीब 10 दिनों तक हार्मोन इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि सामान्य रूप से हर महीने बनने वाले एक अंडे की बजाय कई अंडाणु एक साथ विकसित हो सकें। इस दौरान लगातार अल्ट्रासाउंड से उनकी निगरानी की जाती है। जब अंडाणु लगभग 18 से 20 मिलीमीटर के आकार तक पहुंच जाते हैं, तब उन्हें निकालने की तैयारी की जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, ART कानून के तहत डोनर से अधिकतम 7 अंडाणु ही निकाले जाने चाहिए, इसलिए हार्मोन की बहुत हल्की (Mild) डोज दी जाती है।

अंडाणु निकालने की प्रक्रिया (Egg Retrieval) कैसे की जाती है?

अंडाणु निकालने की प्रक्रिया को एग रिट्रीवल कहा जाता है। यह लगभग 15 से 20 मिनट की डे-केयर प्रक्रिया होती है। इसे शॉर्ट जनरल एनेस्थीसिया (बेहोशी) में किया जाता है, इसलिए महिला को प्रक्रिया के दौरान कोई दर्द महसूस नहीं होता। डॉक्टर Vagina के रास्ते एक पतली सुई की मदद से अंडाशय से अंडाणु निकालते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के कुछ घंटों बाद महिला को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।

क्या एक बार एग डोनेट करना सुरक्षित है?

डॉक्टर का कहना है कि यदि एग डोनेशन ART कानून के नियमों के अनुसार किया जाए, यानी सीमित हार्मोनल स्टिमुलेशन हो और केवल 7 अंडाणु निकाले जाएं, तो यह सामान्यतः सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है। अधिकतर महिलाओं को कोई गंभीर दिक्कत नहीं होती। कुछ महिलाओं को हार्मोन इंजेक्शन के कारण एक-दो दिन तक हल्की कमजोरी, थकान या असहजता महसूस हो सकती है, जो जल्दी ठीक हो जाती है।

बार-बार एग डोनेशन क्यों खतरनाक है?

विशेषज्ञ ने स्पष्ट कहा कि बार-बार एग डोनेशन कराना बिल्कुल गलत है। हर बार शरीर को दोबारा हार्मोन देकर अंडाशय को अधिक अंडाणु बनाने के लिए मजबूर किया जाता है और फिर सर्जिकल प्रक्रिया से अंडाणु निकाले जाते हैं। यदि यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाए तो शरीर पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

डॉक्टर के मुताबिक, बार-बार हाई डोज हार्मोन देना और बार-बार एग रिट्रीवल कराना महिलाओं की सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है। यही वजह है कि कानून ने महिला के पूरे जीवन में केवल एक बार एग डोनेशन की अनुमति दी है।

बार-बार एग डोनेशन से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर किसी महिला से बार-बार एग रिट्रीवल कराया जाए, तो उसके प्रजनन तंत्र (Reproductive System) पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। डॉक्टर के अनुसार, इससे लगातार कमजोरी, एनीमिया (खून की कमी), हार्मोनल गड़बड़ी और अन्य शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। बार-बार हार्मोन लेने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, जिसे किसी भी स्थिति में सामान्य या सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

ओवेरियन हाइपर सिमुलेशन सिंड्रोम (OHSS) क्या है?

यदि डोनर को जरूरत से ज्यादा हार्मोन दिए जाएं और बहुत अधिक संख्या में अंडाणु विकसित किए जाएं, तो ओवेरियन हाइपर सिमुलेशन सिंड्रोम (OHSS) होने का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में अंडाशय सामान्य से काफी बड़े हो जाते हैं और पेट में पानी भर सकता है। यह एक गंभीर मेडिकल जटिलता है, जिसके कारण महिला को अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है।

क्या बार-बार एग डोनेशन से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है?

डॉक्टर के अनुसार, बार-बार एग डोनेट करना महिला की अपनी फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। लगातार अंडाणु निकालने और बार-बार हार्मोनल सिमुलेशन के कारण भविष्य में गर्भधारण करने की क्षमता कम होने का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि मेडिकल विशेषज्ञ इस प्रक्रिया के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी देते हैं।

क्या इससे जल्दी मेनोपॉज आ सकता है?

विशेषज्ञ ने बताया कि यदि किसी महिला से कई बार एग डोनेशन कराया जाए तो समय से पहले मेनोपॉज (Early Menopause) आने की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इस विषय पर और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है, लेकिन बार-बार हार्मोनल हस्तक्षेप और एग रिट्रीवल को सुरक्षित नहीं माना जाता।

क्या बार-बार एग डोनेशन से हार्मोनल असंतुलन होता है?

एक बार नियमों के अनुसार एग डोनेशन करने से लंबे समय तक हार्मोनल असंतुलन नहीं रहता, क्योंकि दिए जाने वाले हार्मोन शरीर से जल्दी बाहर निकल जाते हैं। लेकिन यदि कोई महिला कई बार एग डोनेट करती है, तो लंबे समय तक हार्मोनल गड़बड़ी होने की संभावना बढ़ सकती है।

क्या एग डोनेशन से ओवरी कैंसर का खतरा बढ़ता है?

डॉक्टर ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि एग डोनेशन से ओवरी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इस विषय पर अब तक सीमित रिसर्च हुई है और उपलब्ध अध्ययन इतने बड़े नहीं हैं कि निश्चित निष्कर्ष निकाला जा सके।

महिलाएं एग डोनेशन से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

विशेषज्ञ की सलाह है कि कोई भी महिला केवल सरकार से पंजीकृत ART बैंक और नेशनल ART बोर्ड से रजिस्टर्ड IVF क्लीनिक के माध्यम से ही एग डोनेट करे। उसे सभी कानूनी दस्तावेज ध्यान से पढ़ने चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रक्रिया पूरी तरह ART एक्ट, 2021 के नियमों के अनुसार हो रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी परिस्थिति में एक महिला को जीवन में एक से अधिक बार एग डोनेशन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कानून के खिलाफ है और उसकी सेहत के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

डिस्क्लेमर : यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। आईवीएफ (IVF) या एग डोनेशन (अंडाणु दान) एक संवेदनशील चिकित्सा और कानूनी प्रक्रिया है। इससे जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले कृपया ‘असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) एक्ट 2021’ के नियमों को ध्यान से समझें और किसी प्रमाणित चिकित्सा विशेषज्ञ या कानूनी सलाहकार से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें।