आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और हसल कल्चर (Hustle Culture) के बीच नींद को अक्सर समय की बर्बादी मान लिया जाता है। बहुत से लोग यह सवाल पूछते हैं कि क्या वाकई शरीर को 8 घंटे की नींद की जरूरत है या कम सोकर भी सेहत को दुरुस्त रखा जा सकता है। योग और वेलनेस की जानी-मानी विशेषज्ञ हंसा जी योगेंद्र (Hansaji Yogendra) के अनुसार, नींद केवल आराम नहीं बल्कि शरीर की मरम्मत करने की एक जरूरी प्रक्रिया है। अच्छी नींद शरीर के टिश्यू को रिपेयर करती है, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है और हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करती है। उम्र और शारीरिक जरूरत के हिसाब से नींद की रिक्वायरमेंट अलग-अलग होती है।
जिंदगी की मसरूफियत और कामकाज और जिम्मेदारियों के बोझ ने नींद के समय को भी प्रभावित कर दिया है जिसका असर ना सिर्फ ब्रेन पर पड़ता है बल्कि बॉडी भी बीमारियों का घर बन जाती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि रात में कितने घंटों की नींद सोना जरूरी है। कम नींद कैसे सेहत कैसे प्रभावित होती है।
नींद का ब्रेन पर कैसा होता है असर?
नींद और हमारे ब्रेन का बेहद कनेक्शन है। सोते समय हमारा दिमाग शरीर में जमा टॉक्सिन्स को साफ करता है और यादों को व्यवस्थित करता है। यही कारण है कि अच्छी नींद के बाद सुबह उठने पर हम ज्यादा फोकस और मानसिक स्पष्टता महसूस करते हैं। University of Rochester Medical Center (2013) की एक प्रसिद्ध रिपोर्ट के मुताबिक नींद के दौरान मस्तिष्क में ग्लाइम्फैटिक सिस्टम (Glymphatic System) सक्रिय हो जाता है। ये सिस्टम मस्तिष्क से एमाइलॉयड-बीटा (Amyloid-beta) जैसे हानिकारक प्रोटीन को बाहर निकालता है, जो अल्जाइमर रोग का कारण बनते हैं। नींद का सीधा संबंध हमारे मूड और स्ट्रेस मैनेजमेंट से भी होता है। अगर हम रात में 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लेकर सोते हैं तो सुबह ब्रेन से लेकर बॉडी तक हेल्दी रहती है।
कम नींद का सेहत पर असर
अगर हम रात में 5 घंटे या उससे भी कम सोते हैं तो हमारी बॉडी में तनाव का स्तर बढ़ने लगता है। बढ़ता तनाव एकाग्रता को कम करता है और इम्यूनिटी को कमजोर करता है। European Heart Journal में प्रकाशित एक बड़े मेटा-विश्लेषण के अनुसार, जो लोग रात में 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें कोरोनरी हार्ट डिजीज या स्ट्रोक विकसित होने का खतरा 48% तक बढ़ जाता है। कम नींद लेने से ब्लड प्रेशर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता तो दिल और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है। लम्बे समय तक कम सोने की आदत दिल के रोगों का जोखिम बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं, कम नींद लेने से मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान जैसी समस्याएं भी बढ़ती हैं।
कई बार यह डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं का कारण भी बन सकती है। साथ ही, नींद की कमी शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है, जिससे वजन बढ़ने और डायबिटीज की बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है। इन सभी बदलावों से साफ है कि लगातार 5 घंटे या उससे कम नींद लेना शरीर और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदायक है। इसलिए बेहतर स्वास्थ्य के लिए रोजाना पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद लेना बेहद जरूरी है। बॉडी में होने वाले ये सभी बदलाव बताते हैं कि 5 घंटों से कम नींद सोना सेहत के लिए खराब है।
कितनी नींद है सेहत के लिए जरूरी?
एक्सपर्ट के मुताबिक ज्यादातर लोगों को रात में रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है। यह समय शरीर को पूरी तरह से रिस्टोर करने और बॉडी को रिकवर करने में मदद करता है। Journal of Sleep Research के अनुसार, नींद की कमी दो मुख्य हार्मोन्स को बिगाड़ देती है। घ्रेलिन हॉर्मोन (Ghrelin) भूख बढ़ाता है और लेप्टिन हॉर्मोन पेट भरने का संकेत देता है। जो लोग कम सोते हैं उनमें घ्रेलिन बढ़ जाता है, जिससे उन्हें जंक फूड की ‘क्रेविंग’ होती है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
अच्छी नींद के सेहत के लिए फायदे
पर्याप्त नींद लेने से शरीर दिनभर की थकान और अनुभवों को प्रोसेस कर पाता है। यह हमें अगले दिन बेहतर प्रदर्शन करने, सही निर्णय लेने और मानसिक रूप से संतुलित रहने में मदद करता है। नींद पूरी लेने से हमारी याददाश्त तेज होती है और एकाग्रता बढ़ती है। अच्छी नींद हमारे मूड को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। नींद पूरी होने पर चिड़चिड़ापन कम होता है और भावनाओं पर कंट्रोल बेहतर होता है। नींद हमारे हार्मोनल संतुलन को भी बनाए रखने में मदद करती है, जिससे भूख कंट्रोल रहती है और वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है। अच्छी नींद लेने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और बॉडी का बीमारियों से बचाव होता है। पर्याप्त और अच्छी क्वालिटी की नींद न सिर्फ शरीर को आराम देती है, बल्कि ये हमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाकर एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने में मदद करती है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य जानकारी और योग विशेषज्ञ के विचारों पर आधारित है। नींद की जरूरत हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। यदि आप अनिद्रा (Insomnia) या नींद से जुड़ी किसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। जंसत्ता किसी भी जीवनशैली परिवर्तन के परिणामों का व्यक्तिगत दावा नहीं करता है।
