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Diabetes के मरीजों को कैसे प्रभावित कर रहा है कोरोना, जानें क्या करें और क्या नहीं

Black Fungus during Corona: जारी गाइडलाइन के मुताबिक म्यूकोरमाइकोसिस का इलाज अगर समय रहते न किया जाए तो ये जानलेवा साबित हो सकता है

एक्सपर्ट्स के अनुसार म्यूकोरमाइकोसिस को आम भाषा में ब्लैक फंगस कहा जाता है

Coronavirus and Diabetes: कोरोना महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले करीब सप्ताह भर से रोज 4 लाख के लगभग कोरोना के नए मरीज सामने आ रहे हैं। पिछले बार से ज्यादा खतरनाक और जानलेवा ये वायरस डायबिटीज के मरीजों के लिए अधिक खतरनाक है। यही नहीं, हालिया रिसर्च में ये बात सामने आई है कि कोविड के मरीजों को उबरने के दौरान डायबिटीज के लक्षण देखने को मिलते हैं।

इतना ही नहीं, लंबे समय से जो लोग ICU में हैं या फिर डायबिटीज के गंभीर मरीज अगर कोरोना से ग्रस्त हो जाते हैं तो उन मरीजों को म्यूकोरमाइकोसिस फंगल इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर समय रहते इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाए तो जान भी जा सकती है। आइए जानते हैं विस्तार से –

ब्लैक फंगस है खतरनाक: एक्सपर्ट्स के अनुसार म्यूकोरमाइकोसिस को आम भाषा में ब्लैक फंगस कहा जाता है। उनके मुताबिक जिन मरीजों का शुगर लेवल अनियंत्रित हो जाता है उन पर ये फंगस अटैक करता है। वहीं, अगर मरीज डायबिटीज के साथ किसी और बीमारी से भी पीड़ित है तो इम्युन सिस्टम पर दबाव बढ़ने से मधुमेह रोगियों में ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ जाता है। ये इंफेक्शन शरीर के गीले हिस्से पर हमला करता है।

ICMR ने गाइडलाइन की जारी: जारी गाइडलाइन के मुताबिक म्यूकोरमाइकोसिस का इलाज अगर समय रहते न किया जाए तो ये जानलेवा साबित हो सकता है। इसके अनुसार ये फंगल हवा में मौजूद होता है जो सांस के जरिये शरीर के भीतर पहुंचता है और मरीजों के फेफड़े व साइनस पर असर करता है।

बताए गए हैं ये लक्षण: गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना के वो मरीज जो डायबिटीज से ग्रस्त व कमजोर इम्युनिटी से परेशान हैं, अगर उनको चेहरे के ओर दर्द, धुंधला दिखना, बदन दर्द, नाक में सूजन, सीने में दर्द, नाक की रेखा पर कालापन, त्वचा में बदलाव और सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो उन्हें इसे हल्के में नहीं लेन चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान: स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कोई भी लक्षण दिखाई देने पर अपने डॉक्टर को बताएं। साथ ही, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बावजूद भी अपनी सेहत का ध्यान रखें। उन्हें अपने रक्त शर्करा के स्तर को चेक करते रहना चाहिए। वहीं स्टीरॉयड्स के इस्तेमाल के दौरान भी समय व मात्रा का ख्याल रखें। मरीज को जब ऑक्सीजन मिलती है तो उसकी नमी से पानी इकट्ठा होने लगता है। ऐसे में पानी साफ व संक्रमणमुक्त होना चाहिए।

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