डिप्रेशन एक ऐसी परेशानी है जो बच्चे से लेकर युवा और बुजुर्ग किसी को भी अपनी चपेट में ले सकती है। दुनिया भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो महिलाओं में डिप्रेशन की दर पुरुषों की तुलना में अधिक है। इसके पीछे जैविक, हार्मोनल, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। बढ़ते मानसिक तनाव के बीच डिप्रेशन (Depression) और एंग्जायटी (Anxiety) से राहत पाने के लिए एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं (Antidepressants) का सेवन काफी आम हो गया है। ये दवाएं दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के संतुलन को ठीक करके मूड को बेहतर बनाने का काम करती हैं।
फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग, दिल्ली में डायरेक्टर ऑफ एकेडमिक, अदायु माइंडफुलनेस में हेड ऑफ डिपार्टमेंट और वरिष्ठ कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. विशाल छाबड़ा ने जनसत्ता को बताया एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं डिप्रेशन और उससे जुड़ी कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का एक समूह हैं। समय के साथ इन दवाओं की कई अलग-अलग श्रेणियां विकसित हुई हैं, जो दिमाग के अलग-अलग केमिकल और हिस्सों पर काम करती हैं। इनमें SSRIs (Selective Serotonin Reuptake Inhibitors) एंटी-डिप्रेसेंट की एक आम श्रेणी है। ये दवाएं दिमाग में सेरोटोनिन की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करती हैं और डिप्रेशन, चिंता, घबराहट और नकारात्मक विचारों जैसे लक्षणों को कम कर सकती हैं।
एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं के कॉमन साइड इफेक्ट
ये दवाएं दिमागी हालात में सुधार करती है लेकिन इनका लम्बे समय तक सेवन करने से बॉडी में कुछ साइड इफेक्ट भी देखने को मिल सकते हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने से नींद न आना, वजन बढ़ना, थकान और पाचन संबंधी साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। एंटी-डिप्रेसेंट लेने वाले कुछ लोगों में मुंह सूखना, ज्यादा नींद आना, भूख बढ़ना जैसे साइड इफेक्ट्स भी दिख सकते हैं। कुछ लोगों में सेक्स की इच्छा कम होने जैसी समस्या भी हो सकती है। इन साइड इफेक्ट्स की तीव्रता हर व्यक्ति और इस्तेमाल की जा रही दवा व डोज के अनुसार अलग हो सकती है।
एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं दिमाग पर कैसे असर करती हैं?
इन दवाओं का काम दिमाग में मौजूद न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को प्रभावित करके मूड और भावनात्मक स्थिति को बेहतर करना है। SSRIs मुख्य रूप से सेरोटोनिन की उपलब्धता बढ़ाने का काम करती हैं। डॉक्टर के अनुसार, इससे व्यक्ति का मूड बेहतर हो सकता है, मन शांत हो सकता है और नींद व भूख में भी सुधार हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में दवा का असर और प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
क्या एंटी-डिप्रेसेंट से लिवर या किडनी खराब होती है?
डॉक्टर के अनुसार, सामान्य रूप से डॉक्टर की निगरानी में एंटी-डिप्रेसेंट लेने से लिवर या किडनी खराब होने की आशंका को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के कई दवाओं को एक साथ लेना, गलत डोज लेना या दूसरी चीजों के साथ मिलाकर लेना नुकसान और साइड इफेक्ट्स का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए इन दवाओं का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर की सलाह से होना चाहिए।
एंटी-डिप्रेसेंट कितने समय में असर करती हैं?
मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर में एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं का असर तुरंत दिखाई नहीं देता। डॉक्टर के मुताबिक, आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह में असर दिखना शुरू हो सकता है। दवा की सही डोज तय करने और मरीज की प्रतिक्रिया के अनुसार उसे एडजस्ट करने में कई बार 2-3 महीने तक लग सकते हैं।
डिप्रेशन ठीक होने के बाद भी दवा क्यों चलती रहती है?
डॉक्टर के अनुसार, मरीज के लक्षण बेहतर होने के बाद भी तुरंत दवा बंद नहीं की जाती। एक बार मरीज स्थिर हो जाए तो दोबारा डिप्रेशन होने यानी रिलैप्स के जोखिम को कम करने के लिए कुछ समय तक दवा जारी रखी जाती है।
डिप्रेशन की पहचान कैसे होती है?
डॉक्टर ने बताया कि सिर्फ उदास महसूस करने या खुद को ‘डिप्रेस्ड’ कहने से डिप्रेशन का मेडिकल डायग्नोसिस नहीं हो जाता। मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (MDD) की पहचान के लिए चिकित्सकीय मानदंड देखे जाते हैं। प्रमुख लक्षणों में लगातार उदास मूड, पहले पसंद आने वाली चीजों में रुचि या आनंद कम होना और ऊर्जा की कमी शामिल हैं। इसके साथ नींद में बदलाव, भूख में बदलाव, नकारात्मक विचार, रोने की इच्छा, शरीर में दर्द या आत्महत्या के विचार जैसे अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। लक्षणों की अवधि और संख्या को देखकर डॉक्टर निदान करते हैं।
क्या हर तनाव या उदासी में एंटी-डिप्रेसेंट जरूरी है?
डॉक्टर ने बताया हर तनाव और उदासी में टी-डिप्रेसेंट जरूरी नहीं है। सामान्य तनाव, कभी-कभार होने वाली उदासी और क्लिनिकल डिप्रेशन एक जैसी स्थितियां नहीं हैं। एंटी-डिप्रेसेंट शुरू करने का फैसला डॉक्टर मरीज के लक्षणों, उनकी अवधि, गंभीरता और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद करते हैं। खुद से एंटी-डिप्रेसेंट शुरू करना सही नहीं है।
क्या एंटी-डिप्रेसेंट से मेमोरी और कंसंट्रेशन प्रभावित होते हैं?
डॉक्टर छाबरा के मुताबिक, डिप्रेशन के दौरान ही व्यक्ति को ध्यान लगाने और याद रखने में परेशानी महसूस हो सकती है, क्योंकि डिप्रेशन में सोचने की प्रक्रिया धीमी महसूस हो सकती है। एंटी-डिप्रेसेंट को सीधे मेमोरी कमजोर करने वाली दवा मानना सही नहीं है। हालांकि, अलग-अलग दवाओं और डोज का असर अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी नए लक्षण की जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए।
दवा अचानक बंद करने पर क्या हो सकता है?
एंटी-डिप्रेसेंट को अचानक बंद करना उचित नहीं है। लंबे समय से दवा लेने के बाद अचानक रोकने पर कुछ लोगों में बेचैनी, घबराहट, नींद में परेशानी, उदासी, रोने की इच्छा या नकारात्मक विचार जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा मूल बीमारी के लक्षण दोबारा उभर सकते हैं। इसलिए दवा बंद करनी हो तो डॉक्टर की निगरानी में धीरे-धीरे डोज कम यानी taper की जाती है।
क्या थेरेपी और एक्सरसाइज भी मदद कर सकती हैं?
डिप्रेशन की गंभीरता के अनुसार इलाज अलग हो सकता है। डॉक्टर ने बताया कि हल्के डिप्रेशन में एक्सरसाइज और योग मददगार हो सकते हैं। हल्के से मध्यम डिप्रेशन में थेरेपी/साइकोथेरेपी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मध्यम से गंभीर डिप्रेशन में डॉक्टर दवाओं को इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। कई मरीजों में दवा और थेरेपी दोनों का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल किया जाता है।
किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
दवा शुरू करने के बाद बहुत ज्यादा चक्कर, अत्यधिक घबराहट या बेचैनी, भ्रम यानी कन्फ्यूजन जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। किसी भी असामान्य या गंभीर लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एंटी-डिप्रेसेंट लेते समय कौन कौन सी सावधानियां बरतें?
दवा लेते समय शराब या अन्य नशीले पदार्थों से बचना जरूरी है, खासकर क्योंकि इनके साथ दवा के साइड इफेक्ट्स बढ़ सकते हैं। डॉक्टर ने यह भी सलाह दी कि दवा शुरू करने के शुरुआती दिनों में यह देखा जाए कि उससे अत्यधिक नींद, चक्कर या सुस्ती तो नहीं हो रही। जब तक दवा का असर स्पष्ट न हो जाए, ड्राइविंग और भारी मशीनरी चलाने जैसे कामों में सावधानी बरतनी चाहिए।
क्या एंटी-डिप्रेसेंट सेक्सुअल लाइफ को प्रभावित करती हैं?
कुछ एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं के कारण कुछ लोगों में सेक्स की इच्छा कम हो सकती है या सेक्सुअल फंक्शन में बदलाव महसूस हो सकता है। हालांकि, यह हर व्यक्ति में नहीं होता। डॉक्टर के अनुसार, दवा की डोज में बदलाव या दवा बदलने से यह समस्या कम हो सकती है। इसलिए ऐसी परेशानी होने पर दवा खुद से बंद करने के बजाय डॉक्टर को बताना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं का असर, डोज और साइड इफेक्ट हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। दवा डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू, बंद या उसकी डोज में बदलाव न करें।
