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चढ़ता पारा बढ़ा रहा बीमारियों का खतरा

गर्मी से जुड़े रोग भी सामने आने लगे हैं। इन दिनों अस्पतालों में आने वाले मरीजों में सामान्य तौर पर लू लगने, हीट स्ट्रोक, डायरिया, बुखार व पेचिश के मामले सामने आ रहे हैं।

Author नई दिल्ली | June 14, 2017 3:42 AM
शिमला में गर्मी का सात साल का रिकॉर्ड टूटा है।

चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी के बीच रोजाना बदलता मौसम का मिजाज कई तरह की बीमारियों को न्योता देने लगा है। छात्र हों, पेशेवर हों, बुजुर्ग हों या बच्चे, सभी को किसी न किसी रूप में इस गर्मी व बदलते मौसम का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में, गर्मी से जुड़े रोग भी सामने आने लगे हैं। इन दिनों अस्पतालों में आने वाले मरीजों में सामान्य तौर पर लू लगने, हीट स्ट्रोक, डायरिया, बुखार व पेचिश के मामले सामने आ रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के मुताबिक साल 2015 में तेज गर्मी (हीट स्ट्रेस) से देश में 2000 लोगों की मौत हो गई थी। हीट स्ट्रेस एक ऐसी अवस्था है जब मानव शरीर बर्दाश्त करने की सीमा से अधिक गर्म हो जाता है। इस बारे में बताते हुए आइएमए के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल ने कहा कि गर्मी में कई तरह के रोग हमला बोल सकते हैं। अतिताप (हाइपरथर्मिया) घमौरियां, ऐंठन, एडिमा, तापघात (हीट स्ट्रोक) ऐसे ही कुछ रोग हैं।

गर्मी से होने वाली थकान एक अन्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अधिक गर्मी में रहने के बाद शरीर में से निकले द्रव्य व लवणों की क्षतिपूर्ति नहीं कर पाता। इस हालत में शरीर की मांसपेशियां थकने लगती हैं और उनमें दर्द भी होने लगता है। अगर इस पर ध्यान न दिया गया तो व्यक्ति चक्कर खाकर गिर भी सकता है। इन दिनों पेट व अंतड़ियों से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं, जैसे- डायरिया, पेचिश और उल्टी वगैरह। इन दिनों भोजन में पानी व खनिज लवणों की मात्रा अधिक रखनी चाहिए, तभी गर्मी की परेशानियों से बचाव संभव है। ठंडक पहुंचाने वाली और तरोताजा करने वाली सब्जियों व फलों का सेवन करना चाहिए। साथ ही अधिक प्रोटीन वाले भोजन से बचना चाहिए। कैफीन, चाय, कॉफी और अल्कोहल से शरीर में डिहाइड्रेशन होता है, अत: इनका सेवन कम ही करें तो अच्छा होगा। इस मौसम में अधिक देर तक धूप में रहना वो भी बिना किसी सावधानी के भी खतरनाक हो सकता है। ऐसे में, शरीर में तरल पदार्थों व पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।

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