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Diabetes के इलाज में कारगर साबित हो सकती है होमियोपैथी, जानें किन बातों का रखें ध्यान

Homeopathy for Diabetes: मूल रूप से होमियोपैथी मधुमेह के लक्षणों के इलाज के लिए प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करती है

होमियोपैथी के उपायों का इस्तेमाल करने के साथ जो दवाइयां आप आम दिनों में खाते हैं, उन्हें खाते रहें (फोटो क्रेडिट – जनसत्ता)

Tips for Diabetes Patients: अगर किसी व्यक्ति को एक बार डायबिटीज बीमारी हो गई, तो उससे जीवन भर जूझना पड़ जाता है। इस स्थिति में मरीज के ब्लड शुगर का स्तर काफी बढ़ जाता है। ये बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती है। पिछले कुछ सालों में इस रोग से ग्रस्त मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा ही हुआ है। मरीजों के लिए जरूरी है कि वो अपने दिनचर्या और दवाइयों को लेकर सजग रहें जिससे रक्त शर्करा के स्तर पर काबू पाना आसान हो जाए। अधिकांश लोग मधुमेह रोग के इलाज के लिए एलोपैथी दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि होमियोपैथी भी डायबिटीज रोगियों के लिए कारगर साबित हो सकता है। आइए जानते हैं –

चिकित्सा पद्धति का एक विकल्प होमियोपैथी भी है। मधुमेह रोगियों के लिए होमियोपैथी का मुख्य उद्देश्य, डायबिटिक व्यक्ति का इलाज करते हुए उसके संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर करना है। ऐसा इसलिए ये बीमारी सिर्फ ब्लड स्ट्रीम तक ही अपनी पहुंच को सीमित नहीं करती है। बल्कि यह शरीर के विभिन्न हिस्सों और अंगों को भी प्रभावित करता है।

किस तरह करता है इलाज: मूल रूप से होमियोपैथी मधुमेह के लक्षणों के इलाज के लिए प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करती है। खासकर इसमें दवाएं खनिज, पौधों या जानवरों से बनाई जाती हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक होमियोपैथी डायबिटीज को जड़ से खत्म तो नहीं कर सकता है लेकिन उसपर काबू करने में मददगार जरूर है।

बता दें कि मेटाबॉलिक और लाइफस्टाइल डिसॉर्डर डायबिटीज को काबू करना तब तक मुमकिन नहीं है जब तक आप दवाइयों के साथ अपने दैनिक रूटीन में हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज को शामिल नहीं कर लेते हैं।

इन होमियोपैथिक उपायों की लें मदद: सिज़ेगियम जंबोलनम या ब्लैक प्लम के इस्तेमाल से डायबिटीज के लक्षणों जैसे कि प्यास, बार-बार पेशाब लगना, कमजोर, स्किन संबंधी दिक्कतों को कम करने में मददगार है। वहीं, यूरेनियम नाइट्रिकम के उपयोग से भी अत्यधिक पेशाब और मतली की समस्या दूर होती है। इसके अलावा, कोनियम (हेमलॉक) यूज करने से पैरों और हाथों में सुन्नता के इलाज के लिए किया जाता है। साथ ही, कैलेंडुला यानी गेंदा के फूल से बनी दवाई संक्रमित अल्सर के इलाज में काम आता है।

हालांकि, ध्यान रखें कि होमियोपैथी के उपायों का इस्तेमाल करने के साथ जो दवाइयां आप आम दिनों में खाते हैं, उन्हें खाते रहें।

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