बदलते मौसम और प्रदूषण के कारण खांसी एक आम समस्या बन गई है, लेकिन जब खांसी इतनी बढ़ जाए कि गला छिलने लगे और छाती में जमा बलगम (Congestion) बाहर न निकले, तो यह स्थिति काफी परेशान करती है। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग तुरंत राहत पाने के लिए दवाइयों का रुख करते हैं। एलोपैथिक दवाएं कुछ हद तक तुरंत राहत तो देती हैं लेकिन उन्हें खाने के बाद नींद ज्यादा आती है जिसकी वजह से कामकाज प्रभावित होता है। अगर आप देसी तरीके से खांसी का इलाज करना चाहते हैं तो आप कुछ आयुर्वेदिक तरीके भी अपना सकते हैं। कुछ आयुर्वेदिक हर्ब्स ऐसे हैं जो हमारे किचन में मौजूद हैं जिनका सेवन करके आसानी से खांसी की वजह से छिल रहे गले को राहत मिल सकती है और छाती का बलगम कंट्रोल हो सकता है।
यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक आयुर्वेद में कुछ ऐसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय बताए गए हैं जो न केवल श्वास नली की सूजन को कम करते हैं, बल्कि फेफड़ों में जमा जिद्दी बलगम को ढीला करने में भी मदद कर सकते हैं। इन प्राकृतिक घरेलू नुस्खों को सही तरीके से अपनाकर आप बिना किसी दुष्प्रभाव के गले की खराश और जकड़न से राहत पा सकते हैं। ये घरेलू नुस्खे सूखी खांसी से लेकर बलगम वाली खांसी तक से राहत दिला सकते हैं। डॉक्टर सलीम ने बताया किचन में मौजूद काली मिर्च, काला नमक, अजवाइन, छोटी इलायची और अदरक का इस्तेमाल करके आप आसानी से गले की खराश, खांसी और सर्दी से राहत पा सकते हैं। ये मसाले गले की खराश कम करते हैं, बलगम ढीला करते हैं और सांस की नलियों को आराम देने में मददगार साबित होते हैं।
किन मसालों से करें खांसी का इलाज
इस नुस्खे को बनाने के लिए आप काली मिर्च (ब्लैक पेपर), काला नमक, अजवाइन, छोटी इलायची, अदरक और गुड़ का इस्तेमाल करें।
कैसे काम करती हैं ये चीजें
खांसी का इलाज करने के लिए काली मिर्च बेहद असरदार साबित होती है। इसमें एक्सपेक्टोरेंट गुण होते हैं, जो जमा हुआ बलगम ढीला करके बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसका सेवन करने से बलगम वाली खांसी से राहत मिलती है। Journal of Critical Reviews in Food Science and Nutrition में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, काली मिर्च में मौजूद ‘पाइपरिन’ (Piperine) एक बेहतरीन बायो-इनहांसर और एक्सपेक्टोरेंट है। यह सांस की नलियों में म्यूकस के प्रवाह को बढ़ाकर उसे पतला करता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल जाता है। इसमें मौजूद थर्मोजेनिक प्रभाव बलगम को पिघलाने में मदद करता है।
काला नमक सांस की नलियों को रिलैक्स करता है और सूखी व कफ वाली खांसी में राहत देता है। Journal of Ethnopharmacology बताती हैं कि काले नमक में मौजूद खनिज गले की झिल्ली को हाइड्रेट करते हैं। अजवाइन चेस्ट कंजेशन कम करने और जुकाम-खांसी में फायदेमंद मानी जाती है। Biomedicine & Pharmacotherapy में पाया गया है कि अजवाइन में मौजूद थायमोल(Thymol) नामक एक्टिव कंपाउंड होता है।थायमोल में ‘एंटी-स्पैज्मोडिक’ (Anti-spasmodic) गुण होते हैं, जो फेफड़ों की मांसपेशियों को रिलैक्स करते हैं और छाती की जकड़न को खोलते हैं।
छोटी इलायची गले के इन्फेक्शन को शांत करने और बलगम कम करने में मदद करती है। Journal of Medicinal Food के अनुसार, इलायची में सिनिओल (Cineole) नामक तत्व होता है। सिनिओल एक शक्तिशाली एंटीसेप्टिक है। यह गले के इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करता है और फेफड़ों में हवा के प्रवाह (Circulation) को बेहतर बनाता है। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन कम करके गले और फेफड़ों को राहत देते हैं। Phytotherapy Research की कई रिसर्च बताती हैं कि अदरक में मौजूद जिंजरॉल (Gingerol) और शोगोल (Shogaol) सूजन कम करने में कारगर हैं। यह श्वसन मार्ग की चिकनी मांसपेशियों (Smooth muscles) को आराम देता है, जिससे सूखी खांसी और घरघराहट में तुरंत आराम मिलता है। गुड़ गले को नरम करता है और खांसी में आराम देता है।
बनाने की विधि
एक चौथाई चम्मच काली मिर्च पाउडर लें और उसमें एक चौथाई चम्मच काला नमक मिलाएं। अब इसमें एक चम्मच अजवाइन,चार चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक, चार से पांच छोटी इलायची के बीज निकाल लें। इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर लें। अब एक पैन में लगभग पांच टेबल स्पून गुड़ डालें और थोड़ा पानी डालकर धीमी आंच पर पिघलाएं। जब गुड़ पिघलने लगे तो उसमें तैयार मिश्रण डाल दें। इसे सिर्फ 1 से 2 मिनट तक हल्की आंच पर पकाएं। ध्यान रखें कि गुड़ जले नहीं, वरना स्वाद कड़वा हो जाएगा। तैयार मिश्रण को ठंडा करके कांच के जार में स्टोर कर लें।
कैसे करें सेवन
इस नुस्खे को सुबह और रात में आधा-आधा चम्मच गर्म पानी के साथ लें आपको फायदा होगा। अब इस नुस्खे के साथ ठंडी तासीर वाली चीजें और खट्टी चीजों से परहेज करें। याद रखे कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों को यह नुस्खा नहीं देना चाहिए। 10 से 16 साल के बच्चों को आधी मात्रा यानी एक चौथाई चम्मच ही दें।
डिस्क्लेमर: यह एक घरेलू उपाय है। अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे या ज्यादा गंभीर हो, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
