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गृह मंत्री अमित शाह ने कराई है ‘लिपोमा’ सर्जरी, जानिए क्या होती ये बीमारी और लक्षण

लिपोमा की बीमारी को डॉक्टर प्रकार का छोटा ट्यूमर मानते हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: September 5, 2019 3:56 PM
लिपोमा से होने वाले दर्द से निजात पाने के लिए डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बीत कल यानि 04 सितंबर को अहमदाबाद में लिपोमा का ऑपरेशन करवाया है। अहमदाबाद के केडी हॉस्पिटल द्वारा जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक अमित शाह की लिपोमा का सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। लिपोमा की बीमारी को डॉक्टर प्रकार का छोटा ट्यूमर मानते हैं। जिसमें कैंसर जैसी बीमारी का खतरा नहीं होता है लेकिन इससे होने वाले दर्द से निजात दिलाने के लिए डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर लिपोमा किस तरह ही बीमारी है और इसके लक्षण क्या हैं।

क्या होता है लिपोमा?

एक लिपोमा एक धीमी गति से बढ़ने वाली, वसायुक्त गांठ है। लिपोमा के होने का कारण क्या है, इसका पता अभी नहीं लगाया जा सका है। दरअसल लिपोमा होने का कारण आनुवांशिक बातया जा रहा है। लिपोमा गार्डनर सिंड्रोम, कॉडेन सिंड्रोम, मैडेलुंग रोग और एडिपोसिस डोलरोटोसा से पीड़ित लोगों में अधिक बार हो सकता है। लिपोमा होने के कारणों में मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, यकृत रोग और ग्लूकोज आदि शामिल हैं।

लिपोमा के लक्षण

लिपोमा शरीर में कहीं भी हो सकता है। आमतौर पर यह गर्दन, कंधे, पीठ, पेट, हाथ और जांघों की त्वचा के नीचे होता है। लिपोमा का पता नरम और मुलायम और उंगली से छूकर आसानी से लगाया जा सकता है। सामान्य रूप से ये पांच सेंटीमेटर के व्यास में होते हैं जो नसों पर दबाव डालते हैं जिससे दर्द होता है।

कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह?

अगर आप अपने शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ या सूजन देखते हैं तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा यदि गांठ बढ़ती जाए या इससे दर्द का अनुभव हो तो ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

ऐसे हटाया जाता है लिपोमा

लिपोमा को खत्म करने के लिए डॉक्टर अक्सर इसका ऑपरेशन करते हैं। ऑपरेशन में त्वचा पर एक छोटा सा ऑपरेशन करता है। इसके बाद लिपोमा को स्किन से बाहर निकाला जाता है। हालांकि पूरी तरह से लिपोमा को हटाने के लिए बड़े ऑपरेशन की भी जरूरत पड़ सकती है। लिपोसक्शन का उपयोग करके कुछ लिपोमा को स्किन से बाहर निकाला जाता है।

जिस जगह पर ऑपरेशन किया जाता है वहां एक पतली, खोखले ट्यूब डालने की आवश्यकता पड़ती है। ट्यूब का इस्तेमाल शरीर से वसा कोशिकाओं के द्रव्यमान को चूसने के लिए किया जाता है। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर आमतौर पर विश्लेषण के लिए एक प्रयोगशाला में लिपोमा सामग्री भेजता है। इस तरह के ऑपरेशन अक्सर घाव भरने के बाद स्किनएक छोटा निशान छोड़ देते हैं।

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