बॉलीवुड अभिनेत्री Shraddha Kapoor के दिन की शुरुआत कॉफी से होती है, जिसे वह किसी भी चीज़ से आसानी से रिप्लेस नहीं कर सकतीं। सुबह की तरह ही वह शाम को भी एक कप कॉफी पीने की आदी थीं। लेकिन शाम के समय कॉफी पीने से उन्हें घबराहट, बेचैनी और रात में नींद न आने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। श्रद्धा की यह आदत काफी पुरानी थी, इसलिए अचानक कॉफी छोड़ना उनके लिए आसान नहीं था। इसी दौरान उन्हें एक कैफे में  जापानी चाय होजीचा (Hōjicha) के बारे में पता चला, जिसमें धीरे-धीरे उनकी शाम की कॉफी की जगह ले ली। इसके बारे में जानकारी लेने पर उन्हें मालूम हुआ कि इस चाय का स्वाद हल्का नटी और रोस्टेड होता है, जो सामान्य ग्रीन टी से काफी अलग होता है।

इसके बाद श्रद्धा ने धीरे-धीरे शाम की कॉफी की जगह होजीचा चाय पीना शुरू कर दिया। कुछ दिनों तक इस चाय का सेवन करने के बाद उन्होंने अपने शरीर में कई सकारात्मक बदलाव महसूस किए। आइए जानते हैं कि जापानी होजीचा चाय क्या होती है और इसके फायदे के बारे में डायटीशियन क्या कहते हैं।

क्या होती है होजीचा चाय

न्यूट्रिशनिस्ट कृपा जलन के अनुसार, होजीचा जापान की एक खास ग्रीन टी है जिसे उच्च तापमान पर रोस्ट किया जाता है। इस चाय की पत्तियों और डंठलों को भूनकर तैयार किया जाता है, जिसकी वजह से इसका रंग हल्का लाल-भूरा और स्वाद टोस्टेड या नटी हो जाता है। रोस्टिंग की प्रक्रिया के दौरान क्लोरोफिल टूटता है और कुछ ऐसे एरोमैटिक कंपाउंड बनते हैं जिन्हें पायराजीन कहा जाता है। यही तत्व इस चाय को हल्का स्मोकी और कैरेमल जैसा स्वाद देते हैं।

जापानी चाय में कैफीन कम लेकिन फोकस ज्यादा

होजीचा में सामान्य ग्रीन टी की तुलना में कैफीन की मात्रा कम होती है। इसमें थोड़ी मात्रा में कैटेचिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट और एल-थिएनाइन नाम का अमीनो एसिड भी होता है। एल-थिएनाइन दिमाग में अल्फा ब्रेन वेव्स को बढ़ाता है, जो वही अवस्था होती है जब इंसान शांत लेकिन दिमाग सतर्क महसूस करता है। यही वजह है कि इसे पीने के बाद बहुत ज्यादा उत्तेजना नहीं होती बल्कि हल्की स्थिर एनर्जी मिलती है।

शाम की कॉफी छोड़ने पर श्रद्धा ने क्या बदलाव महसूस किए

  • श्रद्धा ने कहा कॉफी पूरी तरह छोड़ने का इरादा नहीं था, लेकिन शाम की कॉफी को बदलना जरूरी लगा। देर शाम कैफीन लेने से शरीर का सर्केडियन रिदम बिगड़ रहा था जिससे नींद प्रभावित होती थी।  अभिनेत्री ने बताया जब उन्होंने शाम 4 बजे कॉफी की जगह बादाम दूध के साथ होजीचा पीना शुरू किया तो उनकी बॉडी में कुछ बदलाव महसूस हुए।
  • दिन में एनर्जी अचानक बढ़ने और गिरने की समस्या कम हुई
  • दिल की धड़कन तेज होना और बेचैनी कंट्रोल हुई
  • काम पर फोकस ज्यादा स्थिर लगा
  • रात में नींद जल्दी आने लगी
  • यह कोई चमत्कारी बदलाव नहीं था, लेकिन ऐसा लगा जैसे नर्वस सिस्टम को थोड़ा आराम मिल गया हो।

होजीचा चाय के फायदे

गट हेल्थ न्यूट्रिशनिस्ट पायल कोठारी के मुताबिक, रोस्टिंग के दौरान बनने वाले पॉलीफेनॉल और मेलानॉइडिन शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में मदद कर सकते हैं। इस चाय का सेवन करने से शरीर में सूजन कम करने में मदद मिलती है और पाचन तंत्र को सपोर्ट मिलती है। इस चाय को पीने से  एसिड रिफ्लक्स की समस्या में राहत मिलती है। दोपहर का भारी खाना खाने के बाद इस चाय का सेवन करने से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। इस चाय में मौजूद टैनिन की कम मात्रा पेट के लिए कॉफी की तुलना में हल्की मानी जाती है। इस चाय में कैफीन कम होता है। इसका स्वाद नटी और स्मोकी होता है। होजीचा ज्यादा शांत और संतुलित अनुभव देती है। दोपहर या शाम के बाद ज्यादा कैफीन लेने से सर्केडियन रिदम प्रभावित हो सकता है, जिससे नींद और नर्वस सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

रिसर्च से समझे कैसे ये जपानी चाय सेहत पर करती है असर

कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि इस चाय में मौजूद L-Theanine मस्तिष्क में ‘अल्फा वेव्स’ को उत्तेजित करता है, जो बिना सुस्ती लाए आपको मानसिक रूप से शांत (Relaxed) रखता है। यह कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने में मदद करती है। Bioscience, Biotechnology, and Biochemistry में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक होजीचा में मौजूद कैटेचिन (Catechins) दिल की सेहत में सुधार करने में असरदार साबित होता है। इसे भूनने के बाद इसमें पॉलीफेनोल्स बरकरार रहते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और रक्त वाहिकाओं में लचीलापन बनाए रखने में मदद करते हैं। यह हाई बीपी के जोखिम को कम करता है।

डिस्क्लेमर:
यह लेख विभिन्न विशेषज्ञों की राय, उपलब्ध शोध और सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना है। इसे किसी भी तरह की चिकित्सकीय सलाह या उपचार का विकल्प न मानें। यदि आपको नींद, पाचन, दिल या किसी अन्य स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है, तो किसी योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही अपनी डाइट या जीवनशैली में बदलाव करें।