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हाई यूरिक एसिड के मरीज जरूर करें हल्दी का सेवन, ये आयुर्वेदिक तरीके भी आ सकते हैं काम

Uric Acid Home Remedies: आयुर्वेदिक चिकित्सीय प्रणाली में गाउट को वात्त रक्त कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि वात्त दोष के अनियंत्रित होने पर ये समस्या होती है।

2016 में हुए एक शोध के अनुसार जोड़ों के दर्द, गठिया व गाउट की समस्या के इलाज में कर्क्यूमिन (हल्दी में पाया जाने वाला तत्व) असरदार है

Uric Acid Home Remedies: शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता होने पर हाइपर यूरिसेमिया की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे गाउट नामक बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। ये बीमारी गठिया का ही एक रूप है जिसमें मरीजों को पैरों में सूजन व जोड़ों में असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। वहीं, यूरिक एसिड बढ़ने से शरीर के कई हिस्से भी प्रभावित होते हैं जिनमें किडनी का सुचारू रूप से कार्य न कर पाना आम है। कई लोग जो हाइपर यूरिसेमिया या फिर गाउट जैसी बीमारी से पीड़ित हैं वो दवाइयों के साथ अपनी जीवनशैली में परिवर्तन कर के भी इसे कंट्रोल कर सकते हैं। साथ ही, आयुर्वेदिक उपायों से भी शरीर में हाई यूरिक एसिड की मात्रा को काबू में किया जा सकता है।

हल्दी से यूरिक एसिड होता है कंट्रोल: हल्दी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख मसालों में से एक है। इसमें मौजूद तत्व कर्क्यूमिन के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। 2016 में हुए एक शोध के अनुसार जोड़ों के दर्द, गठिया व गाउट की समस्या के इलाज में कर्क्यूमिन असरदार है। वहीं, 2013 के एक शोध की मानें तो कर्क्यूमिन एक्सट्रैक्ट में पाया जाने वाला तत्व फ्लेक्सोफिटॉल गाउट के कारण पैरों में हुए सूजन को कम करने में सक्षम है। आप हल्दी को सब्जी, सूप इत्यादि में डालकर इसका सेवन कर सकते हैं।

मरीजों के लिए रामबाण साबित हो सकता है नीम: नीम का उपयोग अक्सर आयुर्वेद में सूजन को कम करने और गाउट फ्लेयर-अप को शांत करने के लिए किया जाता है। 2011 में हुए एक शोध के मुताबिक नीम में एंटी-इंफ्लामेट्री गुण मौजूद होते हैं। इससे यूरिक एसिड के बढ़ने पर जो पैरों में सूजन हो जाती है, उससे आराम मिलेगा। आप नीम के पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें और पैर में जिस जगह पर सूजन है वहां और उसके आसपास लगाएं।

यूरिक एसिड को कम करना है तो खाएं करेला: आयुर्वेदिक चिकित्सीय प्रणाली में गाउट को वात्त रक्त कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि वात्त दोष के अनियंत्रित होने पर ये समस्या होती है। आयुर्वेद में वात्त संबंधित कोई भी समस्या होने पर करेला खाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, गाउट के इलाज में भी डॉक्टर्स करेला खाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा, करेले का उबला पानी व करेले का रस पीने से किडनी अधिक एक्टिव होती है और टॉक्सिंस को बाहर निकलने में मदद मिलती है। वहीं, गठिया व हाथ पैरों में जलन होने पर करेले के रस की मालिश करना फायदेमंद होता है। बता दें कि करेले से घुटने के दर्द से भी राहत पाई जा सकती है। इसके लिए करेले को हल्का सा भून लें और इसको कॉटन में बांध लें। इसके बाद इसे घुटने पर लगाएं।

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