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ब्लड में ज्यादा यूरिक एसिड बन सकता है शरीर के लिए खतरा, इन हरे पत्तों को खाने से रहेगा काबू

Tips for Uric Acid Patients: जरूरी है कि हाइपरयूरिसेमिया के मरीज अपने खानपान को लेकर सतर्क रहें और डाइट में उन चीज़ों को तवज्जो दें जिन्हें खाने से यूरिक एसिड पर काबू रहता है

uric acid, high uric acid, hyperuricemia, joint pain, gout, arthritis, gathiyaइसके कारण गठिया, गाउट और जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है

Uric Acid Home Remedies: ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके कारण गठिया, गाउट और जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है। बता दें कि ये समस्या तब होती है जब किडनी अपने फिल्टर करने की क्षमता को कम कर देता है। यूरिक एसिड एक केमिकल है जो शरीर में तब बनता है जब प्यूरिन नामक तत्व ब्रेकडाउन होता है। केवल यही नहीं, एक शोध के अनुसार हाई यूरिक एसिड के गंभीर मरीजों की आयु लगभग 11 साल तक कम हो सकती है। इसके अलावा, इससे मरीजों में कई अन्य खतरनाक बीमारियों जैसे कि हृदय रोग, स्ट्रोक और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता है।

ऐसे में जरूरी है कि हाइपरयूरिसेमिया के मरीज अपने खानपान को लेकर सतर्क रहें और डाइट में उन चीज़ों को तवज्जो दें जिन्हें खाने से यूरिक एसिड पर काबू रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि तुलसी में मौजूद तत्व यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है।

मरीजों को क्यों खाना चाहिए तुलसी: तुलसी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो यूरिक एसिड के स्तर पर लगाम लगाने में मददगार हैं। इसके अलावा, अल्सोलिक एसिड और यूजेनॉल का बेहतरीन स्रोत तुलसी पत्ते के सेवन से गठिया व जोड़ों के दर्द की शिकायत भी कम होती है। हाइपरयूरिसेमिया के लक्षणों को कम करने में भी ये पत्ते सहायक भूमिका निभाते हैं। शरीर को डिटॉक्स करने के साथ ही इसमें डाइ-यूरेटिक इफेक्ट होता है जो किडनी के दबाव को कम करता है।

कैसे करें सेवन: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो नियमित रूप से तुलसी खाने से यूरिक एसिड कंट्रोल करना आसान हो जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक तुलसी की पत्तियों को काली मिर्च और घी के साथ मिलाकर खाएं। रोज़ दिन भर में कम से कम 1 बार इसे खाने से मरीजों को आराम मिलेगा।

इन हरी पत्तियों का सेवन भी है असरदार: मेथी में कैल्शियम और आयरन उच्च मात्रा में मौजूद होता है, जो जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है। वहीं, विटामिन-सी की मौजूदगी से हाथ-पैर में आई सूजन में भी कमी आती है। डॉक्टर्स के अनुसार मेथी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है। इससे गठिया या अर्थराइटिस जैसी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा, बथुआ साग भी यूरिक एसिड के स्तर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। इससे शरीर में मौजूद टॉक्सिक पदार्थ भी आसानी से बाहर निकल जाते हैं।

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