क्या आपको अक्सर बेवजह थकान महसूस होती है, बार-बार प्यास लगती है या अचानक वजन में बदलाव आ रहा है? अमूमन लोग इन रोजमर्रा के बदलावों को अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह लक्षण हाई ब्लड शुगर (High Blood Sugar) या डायबिटीज का शुरुआती इशारा हो सकता है। जब शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो इसके लक्षण सीधे तौर पर सामने आने के बजाय शरीर के अलग-अलग हिस्सों में धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। इसे शुरुआती चरण में ही पहचानना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते स्थिति को कंट्रोल किया जा सके।
आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। इनमें से कुछ बदलाव स्किन और हाथों पर भी दिखाई देते हैं। हाथों पर कुछ लक्षण डायबिटीज शुरु होने से पहले यानी की प्रीडायबिटीज की स्थिति में दिखाई देते हैं और कुछ साइन ऐसे हैं जो डायबिटीज होने के बाद हाथों में दिखाई देते हैं। प्रीडायबिटीज की स्थिति में हाथों में दिखने वाले इन लक्षणों को आप समझकर इस स्थिति को रिवर्स कर सकते हैं, जबकि डायबिटीज के लक्षणों को आप समझ कर ब्लड शुगर को नॉर्मल कर सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि डायबिटीज की स्थिति में बॉडी में कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं और इस स्थिति को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है।
हाथों पर दिखने वाले ये दो संकेत जो बताते हैं कि आपको डायबिटीज होने वाली है, यानी प्रीडायबिटीज लक्षण
उंगलियों के जोड़ों का काला पड़ना
हाथों को पलटकर उंगलियों के पिछले हिस्से (Dark knuckles) का काला पड़ना भी डायबिटीज के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। अगर आपके हाथों की उंगलियों के पीछे जोड़ों का रंग काला, स्किन खुरदुरी दिखाई दे रही है तो आप सावधान हो जाएं। अगर उंगली के पीछे की स्किन मोटी या मखमली (Velvety) नजर आती है, तो इस स्थिति को एकैन्थोसिस नाइग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans) कहा जा सकता है। यह स्थिति अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी होती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं। इसके साथ गर्दन, बगल और शरीर की त्वचा के दूसरे हिस्सों पर भी ऐसी गहरी और मोटी स्किन दिखाई दे सकती है। हालांकि, केवल नकल्स का थोड़ा काला होना डायबिटीज का संकेत नहीं माना जा सकता। भारतीय स्किन में नकल्स का थोड़ा गहरा दिखना सामान्य भी हो सकता है। चिंता तब ज्यादा होती है जब स्किन का रंग बदलने के साथ स्किन मोटी या मखमली महसूस हो।
हाथों पर स्किन टैग्स दिखाई देना
दूसरा संकेत स्किन टैग्स (Skin Tags) हो सकते हैं। ये स्किन पर छोटी-छोटी नरम लटकन जैसी संरचनाएं होती हैं, जो अक्सर गर्दन, पलकों, बगल या शरीर की स्किन की सिलवटों में दिखाई देती हैं। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि स्किन टैग्स और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध देखा गया है। खासतौर पर अगर किसी व्यक्ति में स्किन टैग्स के साथ एकेंथोसिस नाइग्रीकंस भी मौजूद हो, तो डॉक्टर से ब्लड शुगर और मेटाबॉलिक हेल्थ की जांच कराना जरूरी है। हालांकि, स्किन टैग्स केवल डायबिटीज के कारण नहीं होते बल्कि और भी कई बीमारियों जैसे थायराइड,पीसीओएस और कुछ जरूरी विटामिन की कमी से भी हो सकते हैं। इसलिए इन्हें देखकर खुद से डायबिटीज की पुष्टि नहीं करनी चाहिए।
डायबिटीज कंफर्म होने पर ब्लड शुगर हाई होने के संकेत
प्रेयर टेस्ट करें
भगवान के सामने प्रार्थना करते समय जैसे हम दोनों हाथों को जोड़ते हैं ऐसे ही अपने दोनों हाथों को जोड़ लें और उंगलियों को सीधा और कोहनियों को भी सीध में रखें। हाथों को जोड़ने पर अगर हाथों की उंगलियों और हथेलियों पर अगर गैप दिखता है तो इसे नजरअंदाज न करें। ये गैप बढ़ती उम्र या जोड़ों की प्रोब्लम की वजह से नहीं होता बल्कि ये ग्लाइकेशन नाम के एक प्रोसेस की वजह से होता है। जब ब्लड में शुगर का स्तर लम्बे समय तक हाई रहता है तो ये शुगर बॉडी के प्रोटीन के साथ बाइंड करना शुरु कर देती है जिसे ग्लाइकेशन कहते हैं। इस ग्लाइकेशन की वजह से स्किन और उंगलियां सख्त हो जाती है और वो सीधी नहीं हो पाती हैं। हालांकि यह डायबिटीज की पुष्टि करने वाला टेस्ट नहीं है, लेकिन अगर ऐसा बदलाव लगातार बना हुआ है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
उंगलियों का लॉक होना या अटकना
सुबह उठने पर मुट्ठी बनाकर उसे धीरे-धीरे खोलें। अगर कोई उंगली मुड़ने के बाद अटक जाती है और फिर झटके से खुलती है तो इसे ट्रिगर फिंगर (Trigger Finger) कहा जा सकता है। डायबिटीज वाले लोगों में ट्रिगर फिंगर का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। इसमें उंगली मोड़ने या सीधा करने में परेशानी, दर्द या जकड़न महसूस हो सकती है। हालांकि, उंगली का अटकना केवल डायबिटीज के कारण नहीं होता। इसके पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, इसलिए लगातार समस्या रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन होना
हाथों या पैरों में बार-बार झुनझुनी, जलन या सुन्नपन डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy) से जुड़ा हो सकता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। डायबिटिक न्यूरोपैथी में लक्षण अक्सर पैरों से शुरू होते हैं और बाद में हाथों तक पहुंच सकते हैं।
बिना दर्द वाले फफोले हो सकते हैं बुलोसिस डायबिटिकरम
डायबिटीज में एक दुर्लभ स्किन समस्या बुलोसिस डायबिटिकरम (Bullosis Diabeticorum) भी देखी जाती है। इसमें बिना किसी स्पष्ट चोट, जलने या रगड़ के हाथ-पैरों पर अचानक फफोले दिखाई दे सकते हैं। ये फफोले आमतौर पर दर्द रहित हो सकते हैं। डायबिटीज वाले व्यक्ति में ऐसा फफोला दिखाई देने पर उसे खुद से फोड़ना नहीं चाहिए। प्रभावित हिस्से को साफ रखें और डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि डायबिटीज में स्किन की चोट या घाव भरने में परेशानी और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
हाथों पर छोटे पीले दाने भी हो सकते हैं संकेत
हाथों, कोहनी या जांघों पर अचानक छोटे-छोटे पीले या मोती जैसे दाने गुच्छों में दिखाई दें, तो यह इरेक्टिव जैंथोमास (Eruptive Xanthomas) हो सकता हैं। इनका संबंध खून में बहुत अधिक ट्राइग्लिसराइड्स होने से हो सकता है। इसलिए इन्हें केवल एलर्जी या फंगल इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बहुत अधिक ट्राइग्लिसराइड्स के साथ पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis) का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे स्किन बदलाव दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
इन संकेतों को देखकर कौन सी जांच कराएं?
अगर नकल्स पर असामान्य कालापन या स्किन टैग्स जैसे बदलाव दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से ब्लड शुगर की जांच के बारे में बात की जा सकती है। आमतौर पर फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और HbA1c टेस्ट डायबिटीज या प्री-डायबिटीज की जांच में इस्तेमाल किए जाते हैं। अगर लंबे समय से डायबिटीज होने का संदेह हो या दूसरे लक्षण मौजूद हों, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार लिपिड प्रोफाइल, यूरिन टेस्ट, यूरिन एल्बुमिन/ACR और आंखों की जांच जैसी जांचों की सलाह दे सकते हैं।
डिस्क्लेमर: उंगलियों के जोड़ों का काला पड़ना कई कारणों से हो सकता है। इसे केवल घरेलू उपायों या त्वचा की देखभाल से जोड़कर न देखें। अगर कालेपन के साथ खुजली, दर्द, मोटापा या स्किन में अन्य बदलाव हों, तो डॉक्टर या स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लें।
