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Heart Care: एंजियोप्लास्टी के बाद भी हो सकती है दिल की समस्याएं, जानिए कैसे रखें हार्ट का ध्यान

एंजियोप्लास्टी एक सर्जरी प्रक्रिया है जिसमें हृदय की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को खोला जाता है।

Heart Care: एंजियोप्लास्टी के बाद भी हो सकती है दिल की समस्याएं, जानिए कैसे रखें हार्ट का ध्यान
दिल के रोगों से बचना चाहते हैं तो डाइट में ताजे फलों और सब्जियों का सेवन करें। photo-freepik

Heart Attack Stent Surgery: भागदौड़ भरी जिंदगी में बदलती जीवनशैली और खान-पान की वजह से आजकल लोग तेजी से दिल की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में मौतों के पीछे दिल की बीमारी भी एक बड़ी वजह है। दिल की गंभीर बीमारी में मरीज को एंजियोप्लास्टी सर्जरी करानी पड़ती है। आज समय तेजी से बदल गया है, इसलिए एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया भी बहुत आसान हो गई है, लेकिन एंजियोप्लास्टी के बाद रोगी को विशेष ध्यान रखना चाहिए। मरीज को जल्दी और सही तरीके से ठीक होने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

एंजियोप्लास्टी में एक छोटे बैलून कैथेटर का उपयोग किया जाता है जहां आपकी धमनी में रुकावट होती है, वहां इसे डाला जाता है और फुलाया जाता है, जिससे धमनी चौड़ी हो जाती है। इससे हृदय में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिल जाती है। लेकिन इस प्रक्रिया से जुड़े कई जोखिम हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार “स्टेंट थ्रोम्बोसिस, जिसे एब्रप्ट वेसल क्लोजर (Abrupt vessel closure) और एक्यूट स्टेंट थ्रोम्बोसिस (Acute stent thrombosis) के रूप में भी जाना जाता है, जो कि एंजियोप्लास्टी की एक सर्जिकल कठिनाई है।

स्टेंट थ्रोम्बोसिस की समस्या

स्टेंट थ्रोम्बोसिस (ST) विभिन्न तंत्रों के कारण हो सकता है। रोगी-संबंधी कई कारक जिसमें दवाई से संबंधित, घाव- और प्रक्रिया-संबंधी कारक और जिसमें पोस्ट-प्रक्रियात्मक कारक शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेंट थ्रोम्बोसिस मौत से जुड़ा हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “स्टेंट थ्रोम्बोसिस मॉर्बिडिटी और मोर्टेलिटी की उच्च दर से जुड़ा होता है, जो अक्सर हृदय की मृत्यु या नॉन फैटल मायोकार्डियल इंफार्क्शन का कारण बनता है।” हालांकि एंजियोप्लास्टी बाईपास सर्जरी की तुलना में अवरुद्ध धमनियों को खोलने का एक आसान सर्जिकल तरीका है, लेकिन इस प्रक्रिया से जुड़े कुछ जोखिम हैं।

धमनी संकुचन और ब्लड क्लॉटिंग

जब एंजियोप्लास्टी को ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट प्लेसमेंट के साथ जोड़ा जाता है, तो ठीक की हुई धमनी के फिर से बंद होने का खतरा होता है। जब नंगे धातु के स्टेंट का उपयोग किया जाता है, तो धमनी के फिर से संकुचित होने का जोखिम अधिक होता है। एंजियोप्लास्टी के प्रक्रिया के बाद भी स्टेंट में रक्त के थक्के बन सकते हैं। ये थक्के दिल का दौरा पड़ने वाली धमनी को बंद कर सकते हैं। एस्पिरिन को क्लोपिडोग्रेल, प्रसूगल या किसी अन्य दवा के साथ लिया जाना चाहिए जो आपके स्टेंट में थक्के बनने की संभावना को कम करने के लिए निर्धारित होने पर रक्त के थक्कों के जोखिम को कम करने में मदद करती है।

कोरोनरी धमनी क्षति और एब्नॉर्मल हार्ट रिदम

एंजियोप्लास्टी करते समय कई बार कोरोनरी धमनी फटने या क्षतिग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न होती है तो उसके लिए आपातकालीन बाईपास सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। एंजियोप्लास्टी के दौरान, अचानक से धड़कन तेज हो सकती है यह फिर बहुत धीरे-धीरे धड़क सकता है। दिल से जुड़ी ऐसी समस्याएं आमतौर कम समय के लिए होती हैं लेकिन कई बार इनके लिए दवाओं या अस्थायी पेसमेकर की जरूरत होती है।

गुर्दे से संबंधित समस्याएं और स्ट्रोक

एंजियोप्लास्टी और स्टेंट लगाने के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले रंग किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही किडनी की समस्या है। यदि रोगी को किडनी की समस्या है, तो डॉक्टर किडनी की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हैं, जिससे जोखिम कम होता है। जब एंजियोप्लास्टी के दौरान एक कैथेटर को एक प्रमुख धमनी के माध्यम से पिरोया जाता है, तो प्लाक ढीला हो जाता है। जो स्ट्रोक का कारण बन सकता है। रक्त के थक्के कैथेटर में भी बन सकते हैं और यदि वे ढीले हो जाते हैं तो मस्तिष्क तक पहुंच कर सकते हैं। स्ट्रोक कोरोनरी एंजियोप्लास्टी का एक रेयर कॉम्प्लिकेशन है। प्रक्रिया के दौरान जोखिम को कम करने के लिए ब्लड थिनर का उपयोग किया जाता है।

एंजियोप्लास्टी के बाद लापरवाही से बचें

सफल एंजियोप्लास्टी के बाद डॉक्टर मरीज को पहले से ज्यादा सावधान रहने की सलाह देते हैं। डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लेते रहें। अगर आपको धूम्रपान की लत है तो इसे छोड़ देना ही बेहतर है। एक अच्छा और संतुलित आहार का पालन करना महत्वपूर्ण है। रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।

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First published on: 28-09-2022 at 05:47:42 pm
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