सीने में दर्द या भारीपन महसूस होते ही ज्यादातर लोगों के मन में पहला डर ‘हार्ट अटैक’ (Heart Attack) का ही आता है। कई बार एंजियोग्राफी कराने पर जब 70%, 80% या 90% ब्लॉकेज निकलती है, तो मरीज और उनके परिजन तुरंत घबरा जाते हैं कि क्या बिना देर किए स्टेंट लगवाना ही एकमात्र रास्ता है? लेकिन क्या हार्ट अटैक आने से पहले ही स्टेंट लगा देना सुरक्षित और जरूरी होता है? या फिर दवाइयों व बाईपास सर्जरी से भी काम चल सकता है?
सीके बिड़ला अस्पताल, पंजाबी बाग, नई दिल्ली में कार्डियक साइंसेज (हृदय रोग विभाग) के निदेशक और वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल कुमार जैन ने बताया स्टेंट सिर्फ हार्ट अटैक आने के बाद ही नहीं लगाया जाता बल्कि हार्ट अटैक से पहले भी लगाया जाता है। अगर किसी मरीज की कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज है और उसकी वजह से उसे चलने, दौड़ने या काम करने पर सीने में दर्द जैसे लक्षण होने लगे हैं, तो हार्ट अटैक के बिना भी स्टेंट की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, स्टेंट लगाने का फैसला सिर्फ ब्लॉकेज के प्रतिशत के आधार पर नहीं किया जाता।
स्टेंट क्या है और हार्ट में इसे क्यों लगाया जाता है?
हार्ट में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट को कोरोनरी स्टेंट कहते हैं। इसे आमतौर पर एंजियोप्लास्टी के दौरान धमनी में डाला जाता है। जब दिल की कोरोनरी धमनियों में प्लाक जमा होने से ब्लॉकेज हो जाता है, तो हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने लगती है जिससे सीने में दर्द हो सकता है और गंभीर स्थिति में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में मरीजों में ब्लॉकेज के स्तर को देखते हुए एंजियोप्लास्टी के दौरान स्टेंट डालकर धमनी को खुला रखा जाता है। सिर्फ ब्लॉकेज दिखने का मतलब यह नहीं है कि स्टेंट जरूरी है। डॉक्टर ब्लॉकेज की जगह, उसकी गंभीरता, लक्षण, हृदय की स्थिति और दूसरी जांचों को देखकर तय करते हैं कि दवाओं, एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी में से कौन सा उपचार बेहतर रहेगा।
70% ब्लॉकेज होने पर क्या स्टेंट डालना जरूरी है?
आमतौर पर 70% ब्लॉकेज को एक सामान्य संदर्भ बिंदु माना जाता है, लेकिन यह स्टेंट लगाने के लिए कोई निश्चित मेडिकल कट ऑफ नहीं है। कुछ मरीजों में 50% ब्लॉकेज होने पर भी उपचार की जरूरत पड़ सकती है, जबकि 70% ब्लॉकेज के बावजूद हर मरीज में स्टेंट जरूरी हो, ऐसा नहीं है। स्टेंट लगाने का फैसला ब्लॉकेज की जगह और गंभीरता, रक्त प्रवाह पर उसके असर, मरीज के लक्षण और हृदय की स्थिति समेत कई कारकों को ध्यान में रखकर कार्डियोलॉजिस्ट करते हैं।
80-90% ब्लॉकेज का मतलब हमेशा हार्ट अटैक आना है?
ब्लॉकेज कितने प्रतिशत है, सिर्फ इससे यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज को हार्ट अटैक आएगा या नहीं। अगर ब्लॉकेज धीरे-धीरे कई वर्षों में बढ़ती है, तो शरीर में वैकल्पिक रक्त वाहिकाएं यानी नेचुरल कोलैटरल्स विकसित हो सकती हैं। ऐसे में गंभीर ब्लॉकेज के बावजूद लक्षण कम हो सकते हैं। दूसरी ओर प्लाक अचानक टूटने और वहां खून का थक्का बनने पर अपेक्षाकृत कम ब्लॉकेज में भी हार्ट अटैक हो सकता है।
हार्ट की तीन मुख्य नसों में किसी में भी गंभीर ब्लॉकेज खतरनाक
डॉक्टर अंशुल ने बताया दिल को खून पहुंचाने वाली तीन मुख्य कोरोनरी आर्टरीज में से किसी में भी गंभीर ब्लॉकेज हो और मरीज को संबंधित लक्षण हो रहे हों, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि ब्लॉकेज किस एक नस में है, बल्कि उसकी जगह, गंभीरता और मरीज के लक्षणों को भी देखा जाता है।
FFR और iFR से क्या पता चलता है?
एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज का प्रतिशत दिखाई देता है, लेकिन इससे हमेशा यह पता नहीं चलता कि उस ब्लॉकेज की वजह से हार्ट तक रक्त का प्रवाह वास्तव में कितना प्रभावित हो रहा है। FFR (Fractional Flow Reserve) और iFR (Instantaneous Wave-Free Ratio) जैसी जांचों का इस्तेमाल ब्लॉकेज के कारण रक्त प्रवाह पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने के लिए किया जाता है। कभी-कभी एंजियोग्राफी में 80% ब्लॉकेज दिखाई देती है, लेकिन FFR/iFR से पता चलता है कि हार्ट तक रक्त का प्रवाह पर्याप्त है। ऐसे मामलों में केवल ब्लॉकेज का प्रतिशत देखकर स्टेंट डालना जरूरी नहीं माना जाता। यानी इलाज का निर्णय सिर्फ एंजियोग्राफी की तस्वीर पर निर्भर नहीं करता।
FFR और iFR दोनों का उद्देश्य यह आकलन करना है कि किसी ब्लॉकेज से रक्त प्रवाह कितना प्रभावित हो रहा है। FFR में आमतौर पर रक्त वाहिकाओं को अधिकतम फैलाने के लिए दवा का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि iFR में अलग तकनीक से यह आकलन किया जाता है और इसके लिए वही दवा आवश्यक नहीं होती।
ब्लॉकेज का इलाज स्टेंट, बाईपास या फिर दवाएं ?
डॉक्टर अंशुल ने बताया ब्लॉकेज मिलने पर हर मरीज को स्टेंट नहीं लगाया जाता। इलाज का विकल्प मरीज की स्थिति के अनुसार चुना जाता है। इसमें दवाएं, एंजियोप्लास्टी और स्टेंट या बाईपास सर्जरी (CABG) शामिल हो सकती हैं। डॉक्टर ब्लॉकेज की संख्या, उनकी लंबाई और जगह, प्रभावित नसों की स्थिति तथा मरीज के अन्य मेडिकल फैक्टर्स को देखते हैं उसी के आधार पर इलाज के लिए स्टेंट, बाईपास या दवाओं से इलाज करने का फैसला लेते हैं।
स्टेंट और बाईपास में इलाज का कौन सा विकल्प ज्यादा बेहतर?
कुछ मरीजों में स्टेंट और बाईपास के परिणाम समान हो सकते हैं, जबकि कुछ जटिल परिस्थितियों में बाईपास बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं कुछ मामलों में स्टेंट कम इनवेसिव विकल्प होने के कारण ज्यादा उपयुक्त होता है। यानी इससे शरीर को कम काट-छांट या कम नुकसान पहुंचता है। इसलिए केवल 90% ब्लॉकेज देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज को बाईपास ही कराना चाहिए। बाईपास बड़ी सर्जरी है, लेकिन जरूरत पड़ने पर प्रभावी विकल्प है।
बाईपास ओपन-हार्ट सर्जरी है और इसमें रिकवरी के लिए स्टेंट की तुलना में अधिक समय लग सकता है। इसमें संक्रमण, ब्लीडिंग और स्ट्रोक जैसी जटिलताओं का जोखिम भी हो सकता है। हालांकि, जब मरीज की स्थिति में बाईपास उचित विकल्प हो, तो यह एक स्थापित और प्रभावी उपचार है। इसे केवल इसलिए खतरनाक नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह बड़ी सर्जरी है।
स्टेंट के बाद दोबारा ब्लॉकेज हो सकती है?
स्टेंट लगाने के बाद उसी जगह या स्टेंट के भीतर दोबारा संकुचन यानी रीस्टेनोसिस की संभावना हो सकती है। आधुनिक स्टेंट के साथ इसका जोखिम पहले की तुलना में काफी कम हुआ है, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं होता। दोबारा समस्या होने का जोखिम स्टेंट के प्रकार, मरीज की बीमारी और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करता है।
स्टेंट लगाने से हार्ट अटैक का खतरा हमेशा खत्म नहीं होता
स्टेंट का मुख्य उद्देश्य उस संकरी या बंद धमनी में रक्त का प्रवाह बेहतर करना है। यह कोरोनरी आर्टरी डिजीज की पूरी बीमारी को खत्म नहीं करता। शरीर की दूसरी धमनियों में भी भविष्य में प्लाक विकसित हो सकता है। इसलिए स्टेंट लगने के बाद भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं, संतुलित डाइट, नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से दूरी और अन्य जोखिम कारकों का कंट्रोल करना जरूरी है।
लाइफस्टाइल का क्या रोल है?
हार्ट की धमनियों में प्लाक बनने और बीमारी के बढ़ने के जोखिम को कम करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल महत्वपूर्ण है। नियमित एक्सरसाइज, संतुलित डाइट, धूम्रपान से बचना, वजन और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना तथा डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का उचित प्रबंधन हार्ट हेल्थ के लिए जरूरी हैं। हालांकि, अगर गंभीर ब्लॉकेज के कारण लक्षण या इमरजेंसी स्थिति पैदा हो चुकी है, तो केवल लाइफस्टाइल बदलाव तत्काल उपचार का विकल्प नहीं होते।
डॉक्टर की सलाह
ऑडियो में डॉक्टर ने सामान्य तौर पर कभी-कभार होने वाली हल्की चुभन को लेकर आश्वस्त किया, लेकिन वास्तविक जीवन में सीने के दर्द को केवल सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर दर्द दबाव या जकड़न जैसा हो, मेहनत करने पर बढ़े, या उसके साथ सांस फूलना, पसीना, उल्टी, चक्कर या दर्द हाथ, जबड़े या पीठ तक जाए, तो तुरंत मेडिकल मूल्यांकन जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। हार्ट ब्लॉकेज में स्टेंट, एंजियोप्लास्टी, दवा या किसी अन्य उपचार की जरूरत मरीज की जांच, ब्लॉकेज की स्थिति, लक्षण और हृदय की स्थिति के आधार पर तय की जाती है। उपचार से जुड़ा कोई भी निर्णय अपने कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह के बिना न लें।
