हड्डियों में दर्द होना आम समस्या है। कभी यह ज्यादा चलने-फिरने, चोट लगने, कैल्शियम की कमी या बढ़ती उम्र के कारण हो सकता है। आप जानते हैं कि अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला ये दर्द बोन कैंसर (Bone Cancer) या किसी दूसरे कैंसर का भी संकेत हो सकते हैं। विश्व कैंसर दिवस 2026 के मौके पर डॉक्टरों का कहना है कि अगर हड्डियों का दर्द लंबे समय तक बना रहे, लगातार बढ़ता जाए या फिर रात में ज्यादा परेशान करे तो आप इसे हल्के में नहीं लें। परेशानी की बात तब और ज्यादा है जब दवा का इस्तेमाल करने के बाद भी दर्द जस का तस बना रहे।
एशियन हॉस्पिटल की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की एचओडी एवं सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रुचि सिंह ने वर्ल्ड कैंसर डे के मौके पर बात करते हुए बताया कि हड्डियों में होने वाला दर्द कुछ दिनों में आमतौर पर दवा करने पर ठीक हो जाता है। ये दर्द मांसपेशियों में खिंचाव, गलत पोस्चर, चोट या विटामिन D की कमी से हो सकता है।
ये दर्द चिंता का विषय तब बनता है अगर लगातार बढ़ता जाए तो। आराम करने पर भी दर्द ठीक न हो, दर्द बिना चोट के हो और रात में ज्यादा परेशान करें तो आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। डॉ.रुचि ने बताया अगर हड्डियों का दर्द 2-3 हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे तो आप तुरंत कुछ जरूरी टेस्ट कराएं। ये स्थिति Red Flags है जिसे नजरअंदाज नहीं करें।
कौन से लक्षण बताते हैं कि हड्डियों का दर्द कैंसर है?
डॉक्टर के मुताबिक कैंसर में हड्डियों का दर्द आमतौर पर लगातार बना रहता है। अगर हड्डियों का दर्द लगातार बना रहें और साथ ही ये लक्षण दिखें जैसे
- बिना वजह वजन कम होना
- लगातार थकान और कमजोरी
- हल्का बुखार या रात में पसीना
- दर्द के साथ सूजन या गांठ महसूस होना
- हड्डी में बार-बार फ्रैक्चर होना
- पीठ दर्द के साथ पैरों में झनझनाहट या कमजोरी
हड्डियों में होने वाले कैंसर के प्रकार
प्राइमरी बोन कैंसर-(Primary Bone Cancer)
ये वो कैंसर है जो सीधे हड्डी के अंदर ही पैदा होता है और वहीं से शुरू होता है। यह तुलनात्मक रूप से कम लोगों को होता है।
सेकेंडरी या मेटास्टेटिक बोन कैंसर (Metastatic Bone Cancer)
कई बार कैंसर शरीर के किसी दूसरे अंग जैसे- ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, या फेफड़ों में शुरू होता है। जब वहां इसका सही समय पर इलाज नहीं हो पातातो कैंसर की कोशिकाएं खून के जरिए सफर करती हुई हड्डियों में जाकर चिपक जाती हैं और वहां बढ़ने लगती हैं। मेडिकल भाषा में इसे मेटास्टेसिस (Metastasis) कहते हैं।
कैंसर का पता लगाने के लिए कौन-कौन से टेस्ट कराएं?
- X-ray प्रारंभिक जांच
- Blood Tests- CBC, कैल्शियम और विटामिन D का
- MRI और CT Scan
- Bone Scan और PET Scan जिसकी मदद से कैंसर की संभावना और फैलाव देखने को मिलता है।
- डॉक्टर कोई गांठ या असामान्य बदलाव का पता लगाने के लिए Biopsy करा सकते हैं।
- एक्सपर्ट के मुताबिक सही टेस्ट समय पर हो जाएं तो बीमारी की पहचान जल्दी की जा सकती है और उसका समय पर इलाज भी किया जा सकता है।
दर्द नॉर्मल है या कैंसर वाला, टेबल से करें जांच
| लक्षण | सामान्य हड्डियों का दर्द | कैंसर वाला दर्द (Red Flags) |
| आराम करने पर | आराम करने से कम हो जाता है। | आराम करने पर भी नहीं घटता। |
| समय | दिन में काम के दौरान ज्यादा होता है। | रात में और सोते समय ज्यादा बढ़ जाता है। |
| सूजन | सूजन कम ही होती है। | दर्द वाली जगह पर गांठ या सख्त सूजन दिखती है। |
| दवाई का असर | पेनकिलर से जल्दी ठीक होता है। | दवा लेने के बाद भी दर्द बना रहता है। |
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
बिना देरी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या फिजिशियन से मिलना जरूरी है। जरूरत होने पर मरीज को ऑन्कोलॉजिस्ट के पास रेफर किया जाता है। डॉ. का कहना है कि डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। समय पर जांच और सही सलाह जिंदगी बचा सकती है।
Myth vs Fact
मिथक: हड्डियों का दर्द हमेशा बुढ़ापे की निशानी है।
हकीकत: बोन कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, यहां तक कि बच्चों और युवाओं में भी।
मिथक: कैंसर का मतलब हमेशा मौत है।
हकीकत: अगर डॉ रूचि द्वारा बताए गए ‘Red Flags’ को समय पर पहचान लिया जाए तो इलाज और रिकवरी की संभावना बहुत अधिक होती है।
डिस्क्लेमर:
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लिए आप बॉडी में दिखने वाले लक्षणों को तुरंत समझकर अपने डॉक्टर से सलाह लें। जनसत्ता इस कैंसर की जानकारी देता है लेकिन वो किसी तरह का कोई दावा नहीं करता।
