हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और महिलाओं के पीरियड्स के बीच का संबंध काफी गहरा और जटिल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हालिया शोधों के अनुसार हाई बीपी न केवल पीरियड्स को अनियमित कर सकता है, बल्कि यह मेनोपॉज (Menopause) यानी पीरियड्स के स्थाई रूप से बंद होने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। हाई ब्लड प्रेशर महिलाओं और पुरुषों में दिल के रोगों का एक प्रमुख कारण है। मोटापे के बढ़ते मामलों और बदलता लाइफस्टाइल अब युवा महिलाओं में भी हाई ब्लड प्रेशर के मामले तेजी से बढ़ा रहा है। कुछ रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि हाई ब्लड प्रेशर का संबंध महिलाओं के मेंस्ट्रुअल साइकिल यानी पीरियड्स से भी हो सकता है।
सीके बिरला हॉस्पिटल, गुरुग्राम में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आस्था दयाल जो लीड कंसल्टेंट के रूप में काम करती है, ने बताया महिलाओं का ब्लड प्रेशर पीरियड्स के दौरान बदलता रहता है। मेंस्ट्रुएशन शुरू होने के समय ये सबसे ज्यादा होता है, जबकि साइकिल के 17वें से 26वें दिन के बीच ये कम हो जाता है। आपको बता दें कि करीब 20 साल पहले हुए एक अध्ययन में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) और हाइपरटेंशन के बीच संबंध पाया गया था।
हाई बीपी कैसे पीरियड पर करता है असर
कई रिसर्च और एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय तक ब्लड प्रेशर ज्यादा रहने से अंडाशय (Ovaries) को होने वाली ब्लड सप्लाई प्रभावित होती है। इससे ओवरीज समय से पहले काम करना बंद कर सकती हैं, जिससे पीरियड्स 40 की उम्र से पहले ही बंद (Early Menopause) हो सकते हैं। हाई बीपी शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को बढ़ाता है। यह हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे फीमेल हार्मोन्स के साथ छेड़छाड़ करता है, जिससे पीरियड्स समय पर नहीं आते या बहुत कम आने लगते हैं। हाई ब्लड प्रेशर की वजह से गर्भाशय (Uterus) की धमनियां सख्त हो जाती हैं। इससे पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग का फ्लो अनियमित हो सकता है और दर्द (Cramps) की समस्या बढ़ सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण:
- जब किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140/90 mmHg या उससे अधिक हो जाए तो उसकी बॉडी में कुछ लक्षण दिखते हैं जैसे
- तेज सिरदर्द होना
- दिल की धड़कन तेज होना
- नाक से खून आना।
ब्लड प्रेशर महिलाओं के मेंस्ट्रुअल साइकिल को कैसे प्रभावित कर सकता है?
कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. बंडिता सिन्हा ने बताया जब ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है, तो ये शरीर की रक्त नलिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसमें गर्भाशय (यूट्रस) की रक्त नलिकाएं भी शामिल हैं। इससे गर्भाशय और ओवरी तक ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है, जिसके कारण अनियमित पीरियड्स, ज्यादा ब्लीडिंग या पीरियड्स का रुक जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर प्रेग्नेंसी के दौरान प्री-एक्लेम्पसिया जैसी जटिलताओं का खतरा भी बढ़ा सकता है।
डॉ. आस्था दयाल ने indianexpress.com को बताया कि प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) से पीड़ित महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर होने की संभावना करीब 40 प्रतिशत अधिक पाई गई है। उन्होंने बताया कुछ छोटे अध्ययनों में ये बात भी सामने आई है कि जिन महिलाओं में कम उम्र में पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, उनमें आगे चलकर हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ सकता है।
हाई बीपी कैसे अनियामित पीरियड का बनता है कारण
एक लंबे समय तक चले अध्ययन में ये पाया गया कि जिन महिलाओं को अक्सर हैवी पीरियड्स होते हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम ज्यादा होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक क्रॉनिक हाइपरटेंशन से पीड़ित महिलाओं में हैवी और अनियमित पीरियड्स का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) और हार्मोनल असंतुलन जैसी स्थितियां भी पीरियड्स के देर से आने या अनियमित होने का कारण बन सकती हैं और आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
बीपी की दवाएं कैसे पीरियड को करती है प्रभावित?
हाई ब्लड प्रेशर सीधे तौर पर पीरियड्स को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करता, लेकिन ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दी जाने वाली कुछ दवाएं, जैसे बीटा ब्लॉकर्स और डाइयूरेटिक्स महिला हार्मोन को प्रभावित कर सकती हैं। इससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या ब्लीडिंग के पैटर्न में बदलाव आ सकता है। अपोलो स्पेक्ट्रा, पुणे के गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. नितिन गुप्ते ने कहा कि ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं ब्लड थिनर की तरह काम कर सकती हैं, जिससे ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।
महिलाएं बीपी को नॉर्मल करने के लिए क्या करें?
- एक्सपर्ट के मुताबिक महिलाएं बीपी को नॉर्मल करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं।
- धूम्रपान और शराब का सेवन करने से परहेज करें।
- डाइट में नमक और रिफाइंड फूड का सेवन कंट्रोल करें।
- वजन को कंट्रोल करें। रेगुलर वॉक और एक्सरसाइज करें।
- पूरी नींद लें और पानी का सेवन ज्यादा करें।
- समय-समय पर ब्लड प्रेशर की निगरानी करें।
- पीरियड्स के दौरान कैफीन, शराब और ज्यादा चीनी के सेवन से बचें।
निष्कर्ष:
हाई ब्लड प्रेशर और महिलाओं के पीरियड्स के बीच संबंध सिर्फ हार्मोन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे रिप्रोडक्टिव और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ से जुड़ा हुआ है। शोध और विशेषज्ञों की राय के अनुसार हाई बीपी महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता, हैवी ब्लीडिंग और PMS जैसी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। वहीं, कुछ मामलों में पीरियड्स से जुड़ी स्थिति में भी आगे चलकर हाइपरटेंशन की संभावना को बढ़ा सकती हैं।
Disclaimer:
इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
