पेट में गैस बनना या पेट का फूलना (Bloating) आज के समय की सबसे आम पाचन संबंधी समस्याओं में से एक बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान और बढ़ता मानसिक तनाव इस परेशानी को और गंभीर बना रहे हैं। पहले यह समस्या कभी-कभार होती थी, लेकिन अब लोग रोज़मर्रा की जिंदगी में पेट के भारीपन, गैस, जकड़न और असहजता की शिकायत करने लगे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्लोटिंग सिर्फ ज्यादा खाने की वजह से नहीं होती, बल्कि क्या खाते हैं, कैसे खाते हैं और किस मानसिक स्थिति में खाते हैं, ये तीनों बातें पाचन पर सीधा असर डालती हैं। फास्ट फूड, प्रोसेस्ड चीजें, ज्यादा शुगर, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की कमी आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ देती है।
लखनऊ के हेल्थ और वेलनेस कोच कपिल कनोडिया ने एक वीडियो के जरिए पेट फूलने के 8 प्रमुख कारण बताए हैं और उनके आसान समाधान भी समझाए हैं। कपिल के मुताबिक, रोजमर्रा की सामान्य डाइट आदतें भी अगर संतुलन में न हों तो पेट फूलने की समस्या पैदा कर सकती हैं। आइए जानते हैं पाचन बिगाड़ने में हमारी कौन-कौन सी डाइट मिस्टेक्स हैं जिन्हें सुधारना जरूरी है।
पाचन बिगड़ने के कारण
लाइफस्टाइल फैक्टर्स भी इस समस्या में अहम भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और खराब नींद पाचन क्रिया को सुस्त कर देती है। इसके साथ ही, लगातार तनाव में रहने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है। यही वजह है कि तनाव के समय गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं ज्यादा महसूस होती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर ब्लोटिंग कभी-कभार हो तो यह सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, रोज़ पेट भारी रहता है या खाने के बाद असहजता बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव कर लेने से ज्यादातर मामलों में बिना दवा के भी पेट की सेहत को बेहतर किया जा सकता है।
बहुत ज्यादा या बहुत कम फाइबर लेना बन सकता है ब्लोटिंग की वजह
फाइबर पाचन के लिए जरूरी है, लेकिन इसका असंतुलन पेट की परेशानी बढ़ा सकता है। बहुत कम फाइबर लेने से आंतों की मूवमेंट धीमी हो जाती है, जिससे कब्ज, गैस और पेट फूलने की समस्या होती है। वहीं अचानक या जरूरत से ज्यादा फाइबर लेने पर आंतों में गैस बनने लगती है, क्योंकि गट बैक्टीरिया फाइबर को फर्मेंट करते हैं। इससे पेट में भारीपन, जकड़न और ब्लोटिंग महसूस होती है। इसलिए फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए और शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है।
जरूरत से ज्यादा या बहुत कम पानी पीना भी बिगाड़ सकता है गट हेल्थ
पानी पाचन तंत्र को सुचारू रखने के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इसकी मात्रा संतुलित होनी चाहिए। बहुत कम पानी पीने से फाइबर ठीक से काम नहीं कर पाता, जिससे कब्ज और पेट फूलने की समस्या बढ़ जाती है। वहीं जरूरत से ज्यादा पानी पीने से पाचन रस पतले हो सकते हैं, जिससे भोजन का पाचन ठीक से नहीं होता और ब्लोटिंग महसूस हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक पानी की मात्रा मौसम, शारीरिक गतिविधि और डाइट के अनुसार तय करनी चाहिए, ताकि गट हेल्थ संतुलित बनी रहे।
तेज खाने और ज्यादा खाने से भी बढ़ती है समस्या
एक्सपर्ट ने बताया अक्सर लोग बहुत तेजी से खाना खाते हैं, जिससे हवा निगल लेते हैं। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा खाने से पेट पर दबाव बढ़ता है। एक्सपर्ट की सलाह है कि पेट की क्षमता का सिर्फ 70% ही खाएं और धीरे-धीरे, ध्यान से चबाकर भोजन करें। इससे एसिडिटी और ब्लोटिंग दोनों कम होती हैं।
देर रात खाना और बॉडी की एक्टिविटी में कमी
एक्सपर्ट के मुताबिक देर रात तक खाना और बॉडी की एक्टिविटी में कमी होना पाचन को धीमा कर देती है। कई लोग रोज एक घंटा वर्कआउट करते हैं, लेकिन बाकी समय लगातार बैठे रहते हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन सुस्त हो जाता है और पेट फूलने की समस्या बढ़ती है।
फूड इंटॉलरेंस भी हो सकती है वजह
कुछ लोगों में किसी खास फूड को पचाने की क्षमता नहीं होती, जिसे फूड इंटॉलरेंस कहा जाता है। कपिल इसके लिए ब्लड-बेस्ड फूड इन्टॉलरेंस टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि ट्रिगर फूड की पहचान हो सके।
तनाव पाचन का सबसे बड़ा दुश्मन
कपिल बताते हैं कि लगातार तनाव रहने से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो पाचन क्रिया को धीमा कर देते हैं। इसका नतीजा गैस, एसिडिटी और कब्ज के रूप में सामने आता है।
फाइबर और पानी की सही मात्रा कैसे तय करें?
इस सवाल पर पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. जगदीश हिरेमठ कहते हैं कि फाइबर और पानी की जरूरत उम्र, एक्टिविटी और डाइट पैटर्न पर निर्भर करती है। एक्सपर्ट के मुताबिक फाइबर बढ़ाते समय अचानक बदलाव न करें। हर दिन 2–3 ग्राम फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएं और साथ में एक गिलास अतिरिक्त पानी पिएं। फाइबर और पानी का एक हफ्ते तक सेवन करने पर बॉडी कैसे रिएक्ट करती है उसे समझें। अगर फाइबर बढ़ाने के बाद लगातार गैस, भारीपन या पेट फूलना महसूस होता है तो फाइबर बहुत तेजी से बढ़ाया गया है। वहीं अगर कब्ज या सूखा मल हो रहा है, तो पानी की कमी हो सकती है।
खाना चबाकर और 70% पेट भरने की आदत डालें
एक्सपर्ट के मुताबिक धीरे चबाने से पाचन एंजाइम बेहतर काम करते हैं, हवा कम निगली जाती है, पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। 70% पेट भरकर खाना और देर रात भोजन से बचना पाचन तंत्र को प्राकृतिक लय में काम करने में मदद करता है। समस्या तब होती है जब लोग इन आदतों को कभी-कभार अपनाते हैं, रोजमर्रा की दिनचर्या नहीं बनाते।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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