तुलसी का पौधा लगभग हर भारतीय घर में आसानी से मिल जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखता है। पूजा-पाठ में इसके पत्तों का उपयोग मानसिक शांति और आस्था से जोड़ा जाता है। तुलसी का सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं है बल्कि ये एक औषधी भी है। तुलसी के पत्तों का सेवन सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। तुलसी की पत्तियों में मौजूद औषधीय गुण शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं। इनका नियमित सेवन करने से बार-बार होने वाली बीमारियों से बचाव होता है और शरीर अंदर से मजबूत बनता है।
सर्दी में सर्दी-खांसी और बलगम बहुत परेशान करते हैं। इस मौसम में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अगर तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बनाकर पिया जाए तो इन समस्याओं से राहत मिल सकती है। आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ.सलीम जैदी के अनुसार रोजाना तुलसी के पत्तों का सेवन तनाव और एंग्जायटी को कम करने में मदद करता है। तुलसी का काढ़ा न केवल नर्वस सिस्टम को शांत करता है,बल्कि रेस्पिरेटरी सिस्टम को भी मजबूत बनाता है, जिससे सांस से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है। आइए जानते हैं कि बरसात के मौसम में तुलसी के पत्तों का काढ़ा कैसे सेहत को फायदा पहुंचाता है।
तुलसी की पत्तियां एक नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर की तरह काम करती हैं। तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बनाकर सेवन करने से न सिर्फ सर्दी-जुकाम से राहत मिलती है, बल्कि शरीर की इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ.सलीम जैदी के अनुसार रोजाना तुलसी के पत्तों का सेवन करने से तनाव और एंग्जायटी कंट्रोल होती है। तुलसी में मौजूद प्राकृतिक तत्व नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं और मानसिक थकान को कम करते हैं। तुलसी का काढ़ा रेस्पिरेटरी सिस्टम को मजबूत बनाता है, जिससे सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो जाता है। आइए जानते हैं कि सर्दी, खांसी और छाती के बलगम का इलाज करने में कैसे तुलसी का सेवन असरदार साबित होता है।
सर्दी में सर्दी-खांसी और बलगम का इलाज करने में कैसे असर करती है तुलसी
Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक तुलसी में सिनेओल (Cineole) और यूजेनॉल (Eugenol) जैसे तत्व होते हैं। ये तत्व फेफड़ों और श्वसन नली (Bronchial tubes) में जमे हुए कफ या बलगम को पतला करते हैं जिससे वो आसानी से शरीर से बाहर निकल जाता है। यही कारण है कि इसे छाती की जकड़न (Chest Congestion) के लिए सबसे असरदार माना जाता है।
लैब टेस्ट्स में पाया गया है कि तुलसी के पत्तों का अर्क कई प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस को नष्ट करने की क्षमता रखता है जो श्वसन तंत्र के संक्रमण का कारण बनते हैं। ये इम्यूनिटी को मजबूत करते है, जिससे सर्दी-खांसी का संक्रमण लंबे समय तक नहीं टिक पाता। International Journal of Ayurveda Research के मुताबिक तुलसी में मौजूद यौगिक वायु मार्ग की सूजन को कम करते हैं, सर्दी जुकाम और बंद नाक का इलाज करते हैं। सर्दी के दौरान जब नाक और गले की नसों में सूजन आ जाती है तो तुलसी का काढ़ा उस सूजन को कम कर सांस लेना आसान बनाता है। यह अस्थमा के मरीजों के लिए भी फायदेमंद पाया गया है।
तुलसी का काढ़ा कैसे तैयार करें
सामग्री
- 8–10 ताज़ी तुलसी की पत्तियां
- 1 कप पानी
- 1/2 चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक
- 1–2 काली मिर्च
- 1/2 चम्मच शहद या गुड़
बनाने का तरीका
सबसे पहले पानी को एक पैन में उबाल लें। पानी उबलने लगे तो उसमें तुलसी की पत्तियां डालें। चाहें तो इसमें अदरक और काली मिर्च भी डाल सकते हैं। अब इसे धीमी आंच पर 5–7 मिनट तक उबलने दें, ताकि तुलसी के औषधीय गुण पानी में आ जाएं। गैस बंद करें और काढ़े को छान लें। हल्का गुनगुना होने पर इसमें शहद या गुड़ मिलाकर पिएं। तुलसी के गुणों को पूरी तरह पाने के लिए इसे बहुत ज्यादा देर तक न उबालें। ज्यादा पकाने से इसके वॉलेटाइल ऑयल्स (Volatile Oils) उड़ते नहीं हैं और सीधा शरीर को फायदा पहुंचाते हैं।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
