बदलते मौसम में बढ़ गया है डेंगू का खतरा, इन हेल्थ टिप्स की मदद से खुद को रखें स्वस्थ

डेंगू की स्थिति में तेज़ सिर दर्द, थकान, सांस फूलना, उल्टी, यहां तक कि मितली की भी समस्या हो सकती है।

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डेंगू संक्रमित मच्छर के काटने से होता है (Photo-Getty/Indian Express)

मॉनसून जब आता है तो गर्मियों से राहत भी देता है। लेकिन यही सुकून हमारे लिए तब भारी पड़ जाता है जब हमारे कुछ क्रियाकलापों के द्वारा बीमारियां पनपने लगती हैं। उन बीमारियों में आज डेंगू की समस्या बहुत तेजी से अपने पांव पसार रही है। डेंगू अक्सर ठहरे हुए पानी में पनपता है। यह डेंगू वायरस से संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। इस दौरान तेज़ सिर दर्द, थकान, सांस फूलना, उल्टी, यहां तक कि मितली की भी समस्या हो सकती है।

डेंगू को रोकने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है कि मच्छरों को रुके हुए पानी में न पनपने दें और मच्छरों के काटने से बचें। तेजी से ठीक होने के लिए कुछ आहार और जीवनशैली की आदतों का पालन करना भी महत्वपूर्ण है।

इस दौरान आपको क्या करना चाहिये?

आराम करना जरूरी है- आयुर्वेद की विशेषज्ञ डॉक्टर दीक्षा भावसार ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के माध्यम से बताया, ‘मरीज को अपनी प्रतिरक्षा को ठीक करने और सुधारने के लिए पर्याप्त आराम की जरूरत है, जो समस्या को गंभीर होने से बचाती है।’

पानी का सेवन- दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं. फलों का रस (बिना चीनी के) सेवन करें। डॉक्टर ने यह भी उल्लेख किया कि छाछ, नारियल पानी, सौंफ का पानी, बिना चीनी के ताजे फलों के रस जैसे तरल पदार्थों का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।

खानपान जो कम करते हैं डेंगू के प्रभाव को- आप खट्टे फल जैसे- आंवला, कीवी, संतरा और अनानास खाएं। साथ ही अनार और पपीते का भी सेवन करें। डॉक्टर बतातीं हैं कि इसके अलावा सब्जियों के सूप का भी सेवन करना चाहिए। घर का हल्का खाना जैसे खिचड़ी और मूंग दाल के सूप खाएं। गेहूं की रोटियों से बचें, लेकिन ज्वार की रोटियों को खाया जा सकता है, क्योंकि ये पचने में हल्की होती हैं। प्रोसेस्ड और फास्ट फूड का बिल्कुल सेवन ना करें।

क्या हैं प्रभावी उपचार-

पपीते के पत्ते का रस (दिन में दो बार/तीन बार 20 मिलीलीटर) पिएं। प्लेटलेट्स में सुधार के लिए यह सबसे अच्छा होता है। इसके कड़वेपन को कम करने के लिए इसमें थोड़ा शहद मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं। आंवला और व्हीट ग्रास जूस के साथ गिलोय का रस भी रोगी की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और प्लेटलेट्स में सुधार करने में मदद करता है।

कुछ जरूरी आदतें और दिनचर्या में सुधार- सुबह की धूप में कुछ देर के लिए जरूर बैठें और साथ ही थोड़ा व्यायाम करें। यह आपको तरोताजा रखने का बेहतर विकल्प हो सकता है।

नोट: उपरोक्त लेख केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और यह पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य या किसी चिकित्सीय स्थिति के संबंध में हमेशा अपने चिकित्सक या अन्य योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ का मार्गदर्शन लें।

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