कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) और मौत के बीच अक्सर फासला चंद सेकंड का होता है। जब दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है तो दिमाग और शरीर के अन्य अंगों तक खून और ऑक्सीजन पहुंचना रुक जाता है। अगर तुरंत इलाज यानी CPR और डिफिब्रिलेशन न मिले तो कुछ ही मिनटों में मरीज की मौत हो सकती है। अब सवाल ये उठता है कि क्या कार्डियक अरेस्ट आने से पहले शरीर कोई संकेत देता है जिन्हें समझते हुए हम किसी से मदद मांग सकें।
मुंबई सेंट्रल स्थित Wockhardt Hospitals में कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. परिन संगोई ने बताया कि सडन कार्डियक अरेस्ट (SCA) को सडन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अचानक होता है, इस खतरनाक हार्ट रिद्म गड़बड़ी के कारण दिल प्रभावी रूप से खून को पंप करना बंद कर देता है। अक्सर इसे अचानक होने वाली घटना माना जाता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान और विशेषज्ञों का नजरिया कुछ अलग है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि सडन कार्डियक अरेस्ट होने से पहले बॉडी में कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं और इसे कैसे समझें।
कार्डियक अरेस्ट से पहले बॉडी में कौन-कौन से दिखते हैं लक्षण?
एक्सपर्ट ने बताया कार्डियक अरेस्ट आने से कुछ मिनट, घंटों यहां तक की कुछ दिनों पहले भी शरीर कुछ वार्निंग साइन दे सकता है। अगर मरीज इन लक्षणों को समझ जाए तो बड़ी मुसीबत को टाला जा सकता है। कार्डियक अरेस्ट से पहले शरीर 5 बड़े संकेत दे सकता है जैसे
- सीने में बेचैनी, भारीपन, दबाव या दर्द जो एसिडिटी जैसा लग सकता है।
- सांस फूलना वो भी बिना किसी भारी काम के अचानक सांस लेने में तकलीफ।
- धड़कन का अनियंत्रित होना, दिल की धड़कन का बहुत तेज होना या रुक-रुक कर चलना।
- अत्यधिक पसीना और चक्कर, ये पसीना बिना गर्मी के ठंडे पसीने के रूप में आता है और मरीज का सिर घूमता है।
- असामान्य थकान, कई दिनों पहले से महसूस होने वाली कमजोरी जिसे नजरअंदाज न करें।
क्या cardiac arrest आने पर किसी से मदद मांगने की मोहलत मिलती है?
डॉ. परिन संगोई ने बताया कार्डियक अरेस्ट आने से पहले किसी से मदद मांगने की मोहलत मिल भी सकती है और नहीं भी, क्योंकि ये मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर मरीज पहले से वॉर्निंग साइन जैसे तेज सीने में दर्द, गंभीर सांस फूलना या दिल की धड़कन का तेज या अनियमित होना महसूस करें तो मदद लेने के लिए एक छोटा लेकिन बेहद अहम समय मिल सकता है।
मरीज में जैसे ही कोई गंभीर या असामान्य लक्षण महसूस हों तो तुरंत इमरजेंसी सेवाओं को कॉल करना जान बचा सकता है। कुछ मिनट की देरी भी बड़ा फर्क डाल सकती है। हालांकि जब दिल कार्डियक अरेस्ट में चला जाता है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है तो मदद की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है। डॉ. संगोई ने कहा खून का प्रवाह रुकने के 4 से 6 मिनट के भीतर ही दिमाग को नुकसान होना शुरू हो सकता है, इसलिए चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।
इन बातों का रखें ध्यान
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. परिन संगोई ने जोर देकर कहा कि मरीज़ को अगर महसूस हो कि कुछ गंभीर गड़बड़ है खासकर लगातार सीने में दर्द, अचानक पसीना आना, चक्कर आना या बेहोश होने जैसे लक्षण दिखे तो इंतजार नहीं करें। ऐसे में मरीज सतर्कता दिखाते हुए अपने किसी साथी की मदद मांगे। इमर्जेंसी सेवाओं को कॉल करें, अगर संभव हो तो घर का दरवाजा खोल दें और आस-पास किसी को अपनी स्थिति की जानकारी दें। अगर आपको पहले से दिल के रोग, डायबिटीज है या परिवार में Sudden Cardiac Death का इतिहास रहा है तो नियमित जांच और लक्षणों का समय पर मूल्यांकन कराना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई जानकारी डॉक्टर के परामर्श और चिकित्सा विज्ञान के सामान्य सिद्धांतों पर आधारित है। यह किसी भी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आपको या आपके आसपास किसी को लेख में बताए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो बिना देरी किए तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग से संपर्क करें या एम्बुलेंस बुलाएं। Self-medication जानलेवा हो सकता है।
