शिफ्ट वाली जॉब के कारण बहुत से लोगों का स्लीपिंग साइकिल (Sleeping Cycle) बिगड़ जाता है। कुछ लोगों का लाइफस्टाइल भी खराब होता है, वो सुबह के समय सोते हैं और रात भर जागते रहते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि कुदरत के नियम के विरुद्ध जाकर शरीर को आराम देना आपको गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकता है? हमारी बॉडी एक सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) पर काम करती है। अगर ये रिदम बिगड़ने लगे तो न केवल मानसिक तनाव बल्कि दिल के रोग और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

पारस हॉस्पिटल गुरुग्राम में डायरेक्टर एवं एचओडी, पल्मोनोलॉजी में डॉक्टर अरुणेश कुमार ने बताया लगातार स्लीप साइकिल का उल्टा होना ओवर ऑल हेल्थ को बिगाड़ सकता है। शरीर की सर्कैडियन रिदम दिन के उजाले के अनुसार बना होता है। लंबे समय तक स्लीपिंग पैटर्न में बदलाव आने से इम्युनिटी कमजोर हो सकती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ सकता है और हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ व दिल के रोगों का खतरा बढ़ सकता है। आइए एक्पर्ट से जानते हैं कि रात में जागने और दिन में सोने से सेहत पर कैसा होता है असर?

उल्टा स्लीप साइकल शरीर पर कैसे डालता है दबाव

डॉ. कुमार बताते हैं कि रात में जागते रहने से मेलाटोनिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जो नींद, तनाव और ऊर्जा को कंट्रोल करते हैं। जब ये हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं तो मिजाज़ में चिड़चिड़ापन, मूड लो रहना, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत, लगातार थकान, यहां तक कि भूख और वजन में बदलाव जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। कई लोग मान लेते हैं कि शरीर धीरे-धीरे इस रूटीन का आदी हो जाएगा।

लंबे समय से नाइट शिफ्ट करने वाले लोगों में कुछ हद तक एडजस्टमेंट होता है, लेकिन ये पूरी तरह से नहीं हो पाता। बिगड़ता हुआ स्लीपिंग साइकिल शरीर आंशिक रूप से एडजस्ट कर सकता है, लेकिन पूरी तरह रिसेट नहीं होता। दिन में सोना अक्सर हल्की और कम अवधि की नींद देता है, क्योंकि रोशनी और आसपास का शोर नींद में बाधा डालते हैं। इससे शरीर लगातार हल्के लेकिन स्थायी शारीरिक तनाव में काम करता रहता है।

रात में जागने से और दिन में सोने से पहले धीरे-धीरे दिखने वाले लक्षण

  • पर्याप्त नींद के बावजूद थकान होना
  • बार-बार सर्दी-जुकाम या सांस संबंधी संक्रमण होना
  • सिरदर्द होना
  • मूड स्विंग
  • सांस फूलना
  • कैफीन पर बढ़ती निर्भरता

अगर नाइट शिफ्ट करते हैं तो क्या करें?

  • जिन लोगों को काम के कारण रात की में जॉब करना पड़ती है , उनके लिए कुछ कुछ आदतें अपनाना जरूरी हैं।
  • रोजाना एक तय समय पर सोने-जागने की कोशिश करें।
  • कमरे में ब्लैकआउट पर्दे लगाएं ताकि रोशनी अंदर न आए।
  • शोर को कम रखें।
  • सोने से पहले भारी भोजन न करें।
  • शिफ्ट के आखिरी हिस्से में कैफीन से बचें।
  • कम से कम 7–8 घंटे की बिना रुकावट नींद लें।

नियमित व्यायाम मेटाबॉलिज्म और मूड दोनों को बेहतर बनाए रखता है। साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराते रहना जरूरी है, ताकि शरीर पर पड़ रहे दबाव का समय रहते पता चल सके। ये उपाय सर्कैडियन रिदम के बिगड़ने से होने वाले तनाव को पूरी तरह खत्म तो नहीं करते, लेकिन लंबे समय के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इंसान का सर्कैडियन रिदम दिन के उजाले के अनुसार विकसित हुआ है। इसे लगातार अनदेखा करने के साइड इफेक्ट होते हैं, जो शुरुआत में लक्षण हल्के लग सकते हैं लेकिन समय के साथ गंभीर हो सकते हैं। अगर आप नाइट शिफ्ट करते हैं तो अनुशासन और सावधानी को बरतें तो आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत को ठीक रख सकते हैं।  

डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपनी डाइट या जीवनशैली में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें, विशेषकर यदि आप किसी पुरानी बीमारी, एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं।