भारत में फैटी लिवर के मरीजों की संख्या में तेजी से इज़ाफा हो रहा है।अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली के मुताबिक लगभग 3 में से 1 भारतीय वयस्क वर्तमान में किसी न किसी प्रकार के फैटी लिवर रोग से पीड़ित हैं। फैटी लिवर तब होता है जब लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है। हालांकि लीवर में थोड़ा फैट बढ़ना नॉर्मल है, लेकिन लिवर के वजन के 5% से 10% अधिक फैट होना लिवर के लिए खतरे की घंटी माना जाता है। खराब डाइट, बिगड़ते लाइफस्टाइल और शराब का ज्यादा सेवन फैटी लिवर की परेशानी के लिए जिम्मेदार है।
फैटी लिवर का इलाज करने के लिए सर्दी में एक साग मौजूद है वो है बथुआ। बथुआ (Bathua) सर्दियों का एक ऐसा सुपरफूड है जिसे आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही लिवर के लिए वरदान मानते हैं। सरसों और पालक के बाद ये साग दूसरे या तीसरे स्थान पर आता है, लेकिन पोषण के मामले में ये सबका ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है।
बथुआ फैटी लिवर रोग (NAFLD) को ठीक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लम्बे समय तक फैटी लिवर की परेशानी पर ध्यान नहीं दिया जाए तो ये सूजन, घाव (सिरोसिस) और यहां तक कि लिवर फेलियर का कारण भी बन सकता है। फैटी लिवर की समस्या को कम करने के लिए बथुआ जैसे साग का सेवन करना बेहद आवश्यक होता है।
बथुआ कैसे फैटी लिवर का इलाज कर सकता है रिसर्च से समझें?
Journal of Dietary Supplements में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक बथुआ में फेनोलिक कंपाउंड्स और फ्लैवोनोइड्स की मात्रा ज्यादा होती है। फैटी लिवर की स्थिति में लिवर की कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है जिससे सूजन आती है। बथुए के एंटीऑक्सीडेंट्स गुण इस स्ट्रेस को कम कर लिवर की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं। चूहों पर की गई रिसर्च के मुताबिक बथुए का अर्क शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) के स्तर को कम कर सकता है। इसमें मौजूद सपोनिन्स (Saponins) लिवर में अतिरिक्त फैट के जमाव को रोकते हैं और जमा हुई चर्बी को एनर्जी में बदलने की प्रक्रिया को तेज करते हैं।
बथुआ लिवर की चर्बी को कैसे घुलाता है?
रिसर्च के मुताबिक बथुए का सेवन बढ़े हुए लिवर एंजाइम्स जैसे ALT और AST को नॉर्मल करने में मदद करता है। जब लिवर में चर्बी बढ़ती है, तो ये एंजाइम्स खून में लीक होने लगते हैं। बथुआ लिवर की बाहरी झिल्ली को मजबूत करता है, जिससे लिवर फंक्शन दोबारा पटरी पर आ जाता है। आयुर्वेद और आधुनिक वनस्पति विज्ञान दोनों मानते हैं कि बथुआ पित्त (Bile) के उत्पादन को उत्तेजित करता है। पित्त वसा को पचाने में मदद करता है। अधिक पित्त बनने से लिवर में जमा फैट घुलने लगता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं।
एक्सपर्ट टिप्स
भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक सर्दी में कुदरत ने हमें ऐसे 5 अनमोल साग दिए हैं जिसमें से एक है बथुआ। सर्दी में इस साग का सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और बीमारियों से बचाव होता है। ये साग फैटी लिवर का इलाज करने में असरदार साबित होता है। इसका सेवन करने से लिवर साफ होता है,पाचन दुरुस्त रहता है और शरीर धीरे-धीरे डिटॉक्स होता है।
बथुआ का इस्तेमाल कैसे करें
बथुआ से पूरा फायदा लेना चाहते हैं तो उसे पकाने के तरीके पर जरूर ध्यान दें। बथुए को बहुत ज्यादा तेल-मसाले में पकाकर खाने के बजाय इसका ताजा जूस या इसके पत्तों को उबालकर उसका पानी पिएं। रिसर्च के अनुसार कच्चा या हल्का उबला हुआ बथुआ का अर्क लिवर पर ज्यादा तेजी से असर करता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
