क्या आप जानते हैं कि जिस RO वाटर को आप सबसे शुद्ध मानकर पी रहे हैं, वो पानी से गंदगी हटाने के साथ-साथ कुछ जरूरी खनिज भी कम कर सकता है? कई भारतीय घरों में RO वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल आम हो गया है। इस प्रक्रिया में पानी में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक मिनरल्स काफी हद तक फिल्टर हो जाते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति की बैलेंस डाइट नहीं है, तो लंबे समय तक इस पानी का सेवन हड्डियों की सेहत और शरीर के मिनरल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। अगर आपके घर में भी कई सालों से RO वॉटर प्यूरीफायर इस्तेमाल हो रहा है, तो कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की बॉडी में पर्याप्त मात्रा को जानना जरूरी है। 


मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. निखिल भसीन ने बताया फिल्ट्रेशन अशुद्धियों को हटाने के साथ-साथ कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स भी कम कर देता है। हालांकि एक्सपर्ट ये भी कहते हैं कि आमतौर पर पीने का पानी इन पोषक तत्वों का मुख्य स्रोत नहीं होता। एक्सपर्ट के मुताबिक कैल्शियम और मैग्नीशियम का अधिकांश हिस्सा हमें भोजन से मिलता है, पानी से नहीं। अगर कोई व्यक्ति संतुलित आहार ले रहा है जैसे डेयरी उत्पाद, दालें, मेवे, बीज और सब्जियां तो केवल RO पानी पीने से मिनरल की कमी होने का जोखिम कम होता है। समस्या तब हो सकती है जब किसी व्यक्ति का आहार ही पोषण की दृष्टि से कमजोर हो।

WHO की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि बहुत कम टीडीएस (TDS) वाला पानी लंबे समय तक पीने से दिल के रोगों और हड्डियों की कमजोरी का जोखिम हो सकता है। WHO की ये चेतावनी उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो पूरी तरह से RO के पानी पर निर्भर हैं। WHO की रिपोर्ट Nutrients in Drinking Water स्पष्ट रूप से बताती है कि पानी से खनिजों (Minerals) का पूरी तरह निकल जाना सेहत के लिए  स्लो प्वाइजन साबित हो सकता है। शोध बताते हैं कि बहुत कम TDS जैसे 50 से कम वाला पानी पीने से शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो जाती है। मैग्नीशियम की कमी सीधे तौर पर अचानक दिल का दौरा और हाइपरटेंशन (High BP) के जोखिम को बढ़ा देती है। मैग्नीशियम की कमी से हृदय की मांसपेशियां सख्त होने लगती हैं और खून के थक्के (Clots) बनने की संभावना बढ़ जाती है। WHO की रिपोर्ट के अनुसार कम TDS वाला पानी रासायनिक रूप से अस्थिर (Unstable) होता है। ये पानी जिस पाइप या बर्तन में रखा जाता है, वहां से धातुओं को खुद में घोलने की क्षमता रखता है। इससे शरीर में भारी धातुओं (Heavy Metals) की विषाक्तता बढ़ सकती है।

शरीर में मिनरल्स की कमी का कैसे लगाएं पता?

  • डॉ. भसीन के अनुसार कुछ टेस्ट शरीर में मिनरल की कमी का पता लगाने में मदद कर सकते हैं जैसे सीरम कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन D, किडनी फंक्शन टेस्ट, इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट।
  • अगर किसी को मांसपेशियों में ऐंठन, थकान या हड्डियों में दर्द जैसे लक्षण हों तो इन टेस्ट की मदद से कमी का पता लगाने में मदद मिलेगी। लंबे समय से तनाव होने पर या उम्र ज्यादा होने पर बोन डेंसिटी स्कैन भी कराया जा सकता है, खासकर अगर ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम हो।

TDS का सही स्तर कितना होना चाहिए

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के अनुसार पानी का टीडीएस आमतौर पर 250-500 mg/L को आदर्श माना जाता है।

क्या 10 साल तक RO पानी पीने से नुकसान हो सकता है?

डॉ. भसीन का कहना है कि ज्यादातर लोगों में केवल RO पानी पीने से गंभीर स्वास्थ्य नुकसान होने की संभावना कम होती है। एक्सपर्ट ने बताया पानी में मौजूद मिनरल्स से ज्यादा जरूरी है डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना। RO सिस्टम भले ही कुछ उपयोगी मिनरल्स हटा देता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति संतुलित आहार ले रहा है तो आमतौर पर इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ता।

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से बिना मिनरल वाला RO पानी पी रहा है, तो सबसे पहले उसे अपनी डाइट पर ध्यान देना चाहिए। डाइट में कैल्शियम से भरपूर भोजन, हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।
अगर जांच में कमी पाई जाती है तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स ले सकते हैं। एक्सपर्ट ने बताया खुद से दवा नहीं लें।
पानी के सिस्टम में भी बदलाव किए जा सकते हैं जैसे
री-मिनरलाइज्ड RO सिस्टम का उपयोग
RO में मिनरल कार्ट्रिज लगवाना
जहां तक सुरक्षित हो वहां तक नेचुरल मिनरल वाटर का उपयोग करें।

डिस्क्लेमर:

यह लेख सामान्य जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। पानी की गुणवत्ता और अपनी सेहत की स्थिति के अनुसार किसी भी बदलाव से पहले संबंधित विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। जनसत्ता किसी भी स्वास्थ्य संबंधी दावे की पुष्टि नहीं करता है।