आप डाइट कर रहे हैं, वॉक कर रहे हैं, जंक फूड्स से भी परहेज कर रहे हैं फिर भी वजन वहीं का वहीं अटका है? अगर हां तो गलती आपकी मेहनत में नहीं, हार्मोनल बैलेंस में हो सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक वजन घटाना केवल कैलोरी का खेल नहीं, बल्कि हार्मोन का संतुलन है। आप अपने शरीर को सजा देने के बजाय उसे समझने की कोशिश करें। वजन बढ़ने के लिए हमेशा खराब डाइट,बिगड़ता लाइफस्टाइल जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि हार्मोनल असंतुलन भी वजन बढ़ने का कारण हो सकता है।
हार्मोन वजन बढ़ाने में कैसे हो सकते हैं जिम्मेदार
हार्मोन शरीर के fat storage, भूख और metabolism को कंट्रोल करते हैं, जब हार्मोन बिगड़ते हैं तो शरीर fat बचाने की मोड में चला जाता है, दिमाग समझता है शरीर किसी तरह के खतरे या तनाव में है। ऐसे में शरीर फैट जलाने के बजाय उसे बचाने (Fat Saving Mode) की स्थिति में चला जाता है। यही वजह है कि कई बार सही डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम नहीं होता, बल्कि वहीं अटक जाता है। हार्मोन बिगड़ने पर दिमाग को लगता है कि शरीर को एनर्जी की जरूरत है, इसलिए वह फैट को जमा करने लगता है और मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है। ऐसी स्थिति में कम खाकर भी वजन बढ़ने लगता है।
चार हॉर्मोन वजन बढ़ाने के लिए हैं जिम्मेदार
इंसुलिन (Insulin) हॉर्मोन
बॉडी में इंसुलिन का ज्यादा स्तर होने पर हमारी बॉडी फैट को बर्न करने के बजाए उसे स्टोर करने लगती है जिससे पेट और कमर पर तेजी से चर्बी जमा होने लगती है। ऐसे में अगर इस हॉर्मोन को बैलेंस नहीं किया जाए तो आप कितना भी मेहनत कर लें आपका वजन कंट्रोल करना मुश्किल होगा।
कॉर्टिसोल हॉर्मोन (Stress Hormone)
कॉर्टिसोल हॉर्मोन तनाव में रहने से बढ़ता है। जब आप लगातार तनाव में रहते हैं तो कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ता रहता है, जिससे शरीर में फैट बढ़ने लगता है। खासतौर पर पेट के आसपास फैट जमा होता है।
थायरॉइड हार्मोन
थायरॉइड हार्मोन शरीर की मेटाबॉलिज्म की स्पीड को कंट्रोल करता है। इसका स्तर कम होने पर शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता घट जाती है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है।
एस्ट्रोजन हॉर्मोन (Estrogen)
महिलाओं में एस्ट्रोजन का असंतुलन होने से तेजी से वजन बढ़ता है। इस हॉर्मोन के असंतुलन की वजह से महिलाओं के हिप्स, थाई और पेट के आस-पास फैट जमा होने लगता है।
लेप्टिन हॉर्मोन (Leptin)
लेप्टिन हॉर्मोन दिमाग को बताता है कि पेट भर गया है, जब ये काम नहीं करता, तो इंसान जरूरत से ज्यादा खाता है। जरूरत से ज्यादा खाना आपकी बॉडी में फैट को स्टोर करता है और मोटापा के रूप में दिखता है।
इंसुलिन हॉर्मोन को कैसे करें कंट्रोल
इंसुलिन को कंट्रोल करने के लिए आप डाइट में चीनी, मैदा और प्रोसेस्ड जूस का सेवन पूरी तरह बंद कर दें।
कोर्टिसोल को कैसे करें कंट्रोल
तनाव बढ़ने पर शरीर कोर्टिसोल रिलीज करता है जो सीधे पेट की चर्बी बढ़ाता है। आप इस हॉर्मोन को कंट्रोल करने के लिए दिन में कम से कम 10-15 मिनट प्राणायाम या मेडिटेशन करें। रात की 7-8 घंटे की गहरी नींद कोर्टिसोल को नेचुरल तरीके से कम करती है।
लेप्टिन सेंसिटिविटी बढ़ाएं
लेप्टिन दिमाग को बताता है कि पेट भर गया है। मोटापा होने पर दिमाग को यह सिग्नल मिलना बंद हो जाता है। ऐसे में इस हॉर्मोन को दुरुस्त करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग बहुत मददगार साबित होती है। यह लेप्टिन के सिग्नल को दोबारा सक्रिय करती है। इस फास्टिंग को करना चाहते हैं तो रात का खाना सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खा लें।
प्रोटीन और गुड फैट्स बढ़ाएं
प्रोटीन खाने से घ्रेलीन हॉर्मोन कम होता है और पीवाईवाई जो पेट भरने वाला हॉर्मोन होता है वो बढ़ता है। इस हॉर्मोन को बैलेंस करने के लिए डाइट में पनीर, दालें, अंडे, नट्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन करें। अखरोट, अलसी के बीज ओमेगा-3 के बेस्ट सॉर्स हैं।
एस्ट्रोजन हॉर्मोन को कैसे कंट्रोल करें
एस्ट्रोजन हार्मोन का संतुलन बिगड़ने पर वजन बढ़ना, सूजन, मूड स्विंग्स और पीरियड्स से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे में आप डाइट में फाइबर रिच फूड्स का सेवन करें। 30–40 मिनट की वॉक, योग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से हार्मोन बैलेंस बेहतर होता है। घर का सादा खाना हार्मोन के लिए बेहतर रहता है। नींद और स्ट्रेस पर कंट्रोल रखें।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
