लकवा एक ऐसी बीमारी है जिसे लेकर लोगों के मन में आज भी कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। कुछ लोगों का मानना है कि जिस हिस्से में लकवा होता है, वहां खून रुक जाने की वजह से यह समस्या पैदा होती है। इसी गलतफहमी के चलते कई लोग घरेलू इलाज के नाम पर लकवे से प्रभावित हिस्से पर कीड़े कटवाने और गर्म चिमटे दागने जैसे से उपाय अपनाते हैं, जो न सिर्फ़ बेअसर हैं बल्कि खतरनाक भी हो सकता हैं।

दरअसल, लकवा दिमाग और मांसपेशियों के बीच मौजूद संचार तंत्र (Communication Network) के टूटने का परिणाम होता है। जब दिमाग से मांसपेशियों तक जाने वाले संकेत बाधित हो जाते हैं, तो शरीर का वह हिस्सा ठीक से काम करना बंद कर देता है। यही वजह है कि लकवे की स्थिति में प्रभावित अंग में हिलना-डुलना या ताकत पूरी तरह या आंशिक रूप से खत्म हो जाती है।

स्पाइन स्पेशलिस्ट और न्यूरोलॉजिकल रिहैबिलिटेशन एक्सपर्ट डॉ. नेहा अरोरा वर्मा इंदौर मध्य प्रदेश में Shree Namo Wellness की संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वो स्पाइन, न्यूरोलॉजिकल दर्द, पैरालिसिस या लकवा रिकवरी और न्यूरो-रिहैबिलिटेशन पर काम करती हैं, ने बताया  ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर, शुगर (Diabetes), कोलेस्ट्रॉल, स्ट्रेस और स्मोकिंग जैसी आदतें हैं। आइए जानते हैं कि लकवा की पहचान कैसे करें और इसका देर होने पर भी क्या इलाज किया जा सकता है।

लकवा दरअसल होता क्या है?

लकवा कोई रहस्यमयी बीमारी नहीं, बल्कि ये ब्रेन अटैक का परिणाम होता है। जैसे हार्ट अटैक में दिल प्रभावित होता है, वैसे ही ब्रेन अटैक में दिमाग का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है। ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं जैसे
Ischemic Stroke जिसमें खून की नस ब्लॉक हो जाती है।
Hemorrhagic Stroke में नस फट जाती है और दिमाग में ब्लीडिंग होती है।
TIA (Mini Stroke) जो भविष्य के खतरे की चेतावनी देता है

लकवे के मुख्य कारण क्या हैं?

इस्केमिक और हेमरेजिक स्ट्रोक के पीछे सबसे बड़े कारण होते हैं हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल। कई बार लोग इन बीमारियों की दवाएं नियमित नहीं लेते या अपनी अनियमित जीवनशैली जैसे गलत खानपान, देर रात तक जागना, शराब, स्मोकिंग और तनाव को गंभीरता से नहीं लेते। लंबे समय तक ऐसा करने से शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान होता है, जो एक दिन ब्रेन स्ट्रोक के रूप में सामने आता है।

लकवा पहचानने का ‘BE FAST’ तरीका

B – Balance (संतुलन बिगड़ना)

E – Eyes (धुंधला दिखना)

F – Face (चेहरा एक तरफ झुकना)

A – Arms (हाथ-पैर में कमजोरी)

S – Speech (बोली में लड़खड़ाहट)

T – Time (बिना देर किए डॉक्टर के पास जाना)

क्या लकवा ठीक हो सकता है?

यह सबसे बड़ा मिथक है कि लकवा लाइलाज बीमारी है। सच ये है कि लकवा ठीक हो सकता है, बशर्ते सही समय पर सही इलाज शुरू किया जाए। लकवे के बाद पहले छह महीने शरीर के लिए बेहद अहम होते हैं। इस दौरान दिमाग में न्यूरोप्लास्टिसिटी नाम की प्रक्रिया सक्रिय रहती है, जिसमें ब्रेन खुद को रिपेयर करने की कोशिश करता है। पहले तीन महीने रिकवरी सबसे तेज़ होती है, जबकि अगले तीन महीने को गोल्डन पीरियड कहा जाता है। इस समय सही ट्रीटमेंट मिलने पर मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

पुराने लकवे में भी उम्मीद बाकी है

ऐसा नहीं है कि एक साल या कई साल पुराने लकवे में कुछ नहीं किया जा सकता। आधुनिक तकनीक, ब्रेन-बेस्ड थेरेपी, सही एक्सरसाइज, संतुलित डाइट और जरूरी सप्लीमेंट्स के ज़रिए पुराने मामलों में भी दिमाग को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। ज़रूरी ये है कि इलाज सिर्फ़ हाथ-पैर पर नहीं, बल्कि दिमाग को केंद्र में रखकर किया जाए, क्योंकि लकवा मांसपेशियों की नहीं बल्कि ब्रेन की बीमारी है।

डाइट और एक्सरसाइज क्यों हैं ज़रूरी?

लकवे के मरीजों को अक्सर बहुत फीका या उबला हुआ खाना दिया जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि इस समय शरीर को सही पोषण की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। मसल्स कमजोर होती हैं और ब्रेन-बॉडी कनेक्शन टूटता है, इसलिए एक कस्टमाइज्ड डाइट और एक्सरसाइज प्लान बेहद ज़रूरी होता है। हर मरीज की ज़रूरत अलग होती है, किसी को विटामिन B12 की कमी होती है, किसी को विटामिन D या कैल्शियम की और इलाज इन्हीं जरूरतों के अनुसार होना चाहिए।

जागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज

लकवे को लेकर आधी-अधूरी जानकारी सबसे ज्यादा नुकसान करती है। गलत तरीकों और झूठे इलाज से बचना और समय पर विशेषज्ञ की मदद लेना बेहद जरूरी है। सही जानकारी, सही इलाज और धैर्य के साथ लकवे से उबरकर मरीज दोबारा सामान्य जिंदगी जी सकता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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