कैंसर कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो रातों-रात पनप जाए। इसके पीछे सालों तक चलने वाली खराब डाइट, बिगड़ता लाइफस्टाइल, लगातार तनाव, नींद की कमी और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली कुछ आदतें ज़िम्मेदार होती हैं। समय के साथ ये सभी कारण शरीर की कोशिकाओं पर असर डालते हैं और कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। कैंसर शरीर के किसी भी अंग को अपनी चपेट में ले सकता है। चिंता की बात ये है कि जो कैंसर पहले दुर्लभ माने जाते थे, वे अब तेज़ी से आम होते जा रहे हैं, जिसकी एक बड़ी वजह हमारा बदलता लाइफस्टाइल और रोज़मर्रा की आदतें हैं। ओरल कैविटी कैंसर एक तरह का ऐसा मुंह का कैंसर है जो दुर्लभ कैंसर था लेकिन अब ये आम होता जा रहा है।

जानी-मानी ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सेवांती लिमये ने कहा है कि भारत में ओरल कैविटी कैंसर अब ब्रेस्ट कैंसर को टक्कर देने लगा है। अभिनेत्री सोहा अली खान के पॉडकास्ट में बात करते हुए डॉक्टर ने बताया ओरल कैविटी कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जो हमारे देश के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। एक मामूली सा छाला कैसे कैंसर का रूप ले लेता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ओरल कैविटी कैंसर के बॉडी में कौन-कौन से दिखते हैं लक्षण और कैसे करें बचाव।

देश में सबसे आम कैंसर में शामिल हुआ ओरल कैविटी कैंसर

KIM हॉस्पिटल्स, ठाणे के हेड एंड नेक ऑनकोसर्जरी कंसल्टेंट डॉ. हितेश सिंहावी के मुताबिक ओरल कैविटी कैंसर अब देश के सबसे आम कैंसरों में से एक बन चुका है। कुछ क्षेत्रों और समुदायों में इसके मामले ब्रेस्ट कैंसर के बराबर या उससे भी ज़्यादा हैं। हर साल भारत में लगभग 1.43 लाख नए ओरल कैंसर के मामले सामने आते हैं, जिनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में छह गुना अधिक है। यानी पुरुषों में ओरल कैंसर सबसे आम कैंसर है। वहीं, ब्रेस्ट कैंसर के करीब 1.92 लाख नए मामले हर साल सामने आते हैं, जिनमें 98 प्रतिशत से अधिक महिलाएं होती हैं। यानी पुरुषों में ओरल कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर तेज़ी से बढ़ रहा है।

ओरल कैविटी कैंसर का खतरा क्यों बढ़ रहा है?

डॉ. सिंहावी ने बताया मुंह सीधे तौर पर हमारे खाने-पीने और आदतों से प्रभावित होता है। तंबाकू, सुपारी चबाना, शराब, तेज़ या टूटे दांतों से होने वाली लगातार जलन और खराब ओरल हाइजीन, ये सभी मुंह की अंदरूनी परत को लगातार नुकसान पहुंचाते हैं। समय के साथ ये नुकसान ठीक नहीं हो पाता और असामान्य कोशिकाओं के बनने का खतरा बढ़ जाता है। एक्सपर्ट ने बताया कई बार छोटा सा छाला या सफेद पैच नजरअंदाज हो जाता है। लेकिन सच्चाई ये है कि ओरल कैंसर पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली आदतों से जुड़ा है, जैसे तंबाकू और सुपारी का सेवन, जो समाज में आम और कई बार महिलाओं के बीच भी तेजी से सेवन किया जा रहा है।

लाइफस्टाइल से जुड़ा है ओरल कैविटी कैंसर, लेकिन पूरी तरह से हो सकता है कंट्रोल

डॉ. सिंहावी ने बताया ब्रेस्ट कैंसर जहां कई जैविक और हार्मोनल कारणों से जुड़ा होता है, वहीं ओरल कैविटी कैंसर मुख्य रूप से लाइफस्टाइल चॉइस का नतीजा है। यही वजह है कि बीमारी का बोझ ज्यादा होने के बावजूद ये सबसे ज़्यादा रोके जाने वाले कैंसरों में से एक है। इसके बढ़ते मामले सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि एक बड़ी पब्लिक हेल्थ और बिहेवियरल चुनौती भी हैं।

ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कौन-सी आदतें बढ़ाती हैं?

डॉ. सिंहावी के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर का खतरा मेटाबॉलिक और हार्मोनल हेल्थ से जुड़ा होता है। खराब नींद, शारीरिक गतिविधि की कमी, वजन बढ़ना और लगातार तनाव हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ते हैं, जिसका असर ब्रेस्ट टिशू की सेहत पर पड़ता है।

ओरल कैविटी कैंसर के शुरुआती लक्षण ?

ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर दर्दरहित होते हैं। डॉ. सिंहावी बताते हैं मुंह में छोटे छाले, सफेद धब्बे या हल्की जकड़न को लोग मामूली अल्सर समझकर घरेलू इलाज करने लगते हैं। क्योंकि खाने-पीने और बोलने में दिक्कत नहीं होती, इसलिए गंभीरता समझ में नहीं आती। मुंह में छोटे छाले ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।  

क्या करें बचाव के लिए?

एक्सपर्ट के मुताबिक ओरल कैविटी कैंसर से बचाव करना है तो तंबाकू किसी भी रूप में न लें, शराब का सेवन सीमित करें और मुंह की सफ़ाई पर ध्यान दें। बॉडी को एक्टिव रखें। अगर मुंह में कोई बदलाव लंबे समय तक बना रहे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। ओरल कैविटी कैंसर ज़्यादातर मामलों में रोका जा सकता है। रोज़मर्रा की आदतों के प्रति सतर्कता और छोटे लक्षणों पर ध्यान देकर बीमारी को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सकता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

रात में सोते-सोते पेशाब के लिए भागते हैं और यूरिन हो जाता है लीक, ये 2 चीजें बिना दवा रोकेंगी मूत्र रिसाव, डॉक्टर ने बताया नुस्खा। पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।