आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब डाइट और बढ़ते तनाव के कारण हाई ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) की समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। हाल के वर्षों में 20 से 40 साल के युवाओं में भी हाइपरटेंशन (High BP) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई हैं। अक्सर लोग ये नहीं जानते कि उनकी उम्र के हिसाब से नॉर्मल बीपी कितना होना चाहिए और कब उन्हें डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और वैश्विक स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, उम्र के साथ बीपी के आंकड़े बदलते रहते हैं।
हाई बीपी को साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर शुरुआत में नहीं दिखते। आइए ब्लड प्रेशर से जुड़ी सारी जानकारी हासिल करते हैं और चार्ट से समझते हैं कि 20, 30 और 40 की उम्र में आपका ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए और इसे कंट्रोल रखने का सही तरीके क्या हैं।
ब्लड प्रेशर कैसे मापा जाता है?
ब्लड प्रेशर को दो संख्याओं में मापा जाता है। पहली संख्या को सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है, जो तब मापा जाता है जब दिल धमनियों में खून पंप करता है। दूसरी संख्या को डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है, जो दिल की धड़कनों के बीच आराम की अवस्था में खून के दबाव को दर्शाती है। ब्लड प्रेशर का बढ़ना और कम होना दोनों ही सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
नॉर्मल बीपी की रेंज क्या है?
सामान्य ब्लड प्रेशर की बात करें तो वयस्कों में इसे आमतौर पर 120/80 mmHg माना जाता है। अगर सिस्टोलिक प्रेशर 120 से कम और डायस्टोलिक प्रेशर 80 से कम रहता है, तो इसे नॉर्मल ब्लड प्रेशर की श्रेणी में रखा जाता है। इससे ऊपर का स्तर प्री-हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर की ओर इशारा करता है, जबकि इससे बहुत कम रीडिंग लो ब्लड प्रेशर मानी जाती है।
20 साल से 40 साल की उम्र में ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए?
| आयु वर्ग (Age) | सिस्टोलिक (Top – mmHg) | डायस्टोलिक (Bottom – mmHg) | स्थिति (Status) |
| 20-24 वर्ष | 120 | 79 | सामान्य (Normal) |
| 25-29 वर्ष | 121 | 80 | सामान्य |
| 30-34 वर्ष | 122 | 81 | सामान्य |
| 35-39 वर्ष | 123 | 82 | सामान्य |
हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण कई बार साफ़ तौर पर नजर नहीं आते। लेकिन जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बढ़ा रहता है तो शरीर में कुछ संकेत दिखाई देने लगते हैं जैसे
- लगातार या तेज़ सिरदर्द खासतौर पर सुबह के समय सिर भारी महसूस होना
- सांस तेजी से फूलना, खासतौर पर हल्की मेहनत में भी सांस लेने में परेशानी होना
- धुंधला दिखना या आंखों पर दबाव महसूस होना।
- नींद न आना या याददाश्त कमजोर होना।
- सीने में दर्द या जकड़न महसूस होना
- ब्लड प्रेशर ज्यादा हाई होने पर नाक से खून आ सकता है।
उम्र के हिसाब से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी चार्ट
| आयु | न्यूनतम (सिस्टोलिक/डायस्टोलिक) Minimum (Systolic/Diastolic) | सामान्य (सिस्टोलिक / डायस्टोलिक) Normal (Systolic/Diastolic) | अधिकतम (सिस्टोलिक डायस्टोलिक) Maximum (Systolic/Diastolic) |
| 1 से 12 महीने | 75/50 | 90/60 | 100/75 |
| 1 से 5 साल | 80/55 | 95/65 | 110/79 |
| 6 से 13 साल | 90/60 | 105/70 | 115/80 |
| 14 से 19 साल | 105/73 | 117/77 | 120/81 |
| 20 से 24 साल | 108/75 | 120/79 | 132/83 |
| 25 से 29 साल | 109/76 | 121/80 | 133/84 |
| 30 से 34 वर्ष | 110/77 | 122/81 | 134/85 |
| 35 से 39 वर्ष | 111/78 | 123/82 | 135/86 |
| 40 से 44 वर्ष | 112/79 | 125/83 | 137/87 |
| 45 से 49 वर्ष | 115/80 | 127/84 | 139/88 |
| 50 से 54 वर्ष | 116/81 | 129/85 | 142/89 |
| 55 से 59 वर्ष | 118/82 | 131/86 | 144/90 |
| 60 से 64 वर्ष | 121/83 | 134/87 | 147/91 |
(Source: National Health Service (NHS)
हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कैसे करें
हाई ब्लड प्रेशर को काबू में रखने के लिए लाइफस्टाइल और खानपान में कुछ जरूरी बदलाव करना बेहद ज़रूरी है। सही आदतें और हेल्दी डाइट बीपी को नॉर्मल रखने में असरदार साबित होती है।
- नमक का सेवन कंट्रोल करें। रोज़ाना 5 ग्राम से कम नमक का सेवन नहीं करें। प्रोसेस्ड व पैकेज्ड फूड से दूरी बनाएं।
- डाइट में फल, हरी सब्ज़ियां, साबुत अनाज, दालें और कम वसा वाले डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करें। DASH डाइट हाई बीपी को कंट्रोल करने में असरदार मानी जाती है।
- रोज़ाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज करें। नियमित फिजिकल एक्टिविटी से दिल मजबूत होता है और बीपी कंट्रोल रहता है।
- ज्यादा तनाव ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। तनाव कंट्रोल करने के लिए ध्यान करें, गहरी सांस लें। पर्याप्त नींद और एक्सरसाइज की मदद से आप बीपी को नॉर्मल रख सकते हैं।
- वजन कंट्रोल करें। धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन बंद करें।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। मशीन की खराबी या गलत तरीके से बीपी चेक करने पर रीडिंग गलत हो सकती है। किसी भी बदलाव के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
