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Health News: बेवक्त सोते हैं तो खतरा जान लीजिए, जानिए अच्छी नींद के लिए क्या खाएं

Diet to get sound sleep: अच्छी नींद के लिए पौष्टिक, संतुलित और प्राकृतिक आहार (कच्ची सब्जियां, फलों का रस, सब्जियों का रस और अंकुरित अनाज) लें। समय पर सोएं और समय पर जागें।

Author Published on: December 16, 2019 9:23 AM
नींद शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Health News, Sound sleep: जिस तरह दिनभर काम करके रात में नींद से शरीर को आराम और ऊर्जा मिलती है ठीक उसी तरह नींद से शरीर के आंतरिक अंगों को भी आराम मिलता है, जिससे उसकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इसलिए नींद बहुत जरूरी है। आमतौर पर माना जाता है कि छह से आठ घंटे की नींद काफी होती है। वहीं योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. राजेश बत्रा का कहना है कि इन छह से आठ घंटों में भी डेढ़ से चार घंटे नींद के ऐसे होते हैं जिसमें बहुत गहरी नींद होती है और वही नींद शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

दिनभर सोने की आदत
कई लोगों को बार-बार या बेवक्त सोने की आदत होती है। ऐसा करना ठीक नहीं है और इस आदत को जितनी जल्द हो सके बदल देना चाहिए। कारण कि ऐसा करने से चयापचय दर प्रभावित होता है। चयापचय दर के बिगड़ने से शरीर में हॉर्मोन का असंतुलन होने लगता है, जिससे चिड़चिड़ापन, रक्त चाप, सिर में दर्द होने लगता है। साथ ही इससे न्यूरोसिस्टम और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ने लगती है।

हल्की झपकी
जो लोग ज्यादा शारीरिक श्रम या फिर ज्यादा मानसिक कार्य करते हैं वे दोपहर में दस से बीस मिनट की हल्की झपकी ले सकते हैं। दस से बीस मिनट की झपकी से उनके शरीर को आराम मिलता है और शरीर की काम करने की क्षमता बढ़ जाती है। लेकिन लंबी नींद नहीं लेनी चाहिए।

ज्यादा नींद की समस्या
कहा जाता है कि किसी व्यक्ति का पेट उसकी बंद मुठ्ठी के बराबर होता है इसलिए हमें हमेशा भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए। लेकिन कई लोगों को ज्यादा खाने (ओवरइटिंग) की आदत होती है। ज्यादा खाने की वजह से ऐसे लोगों को ज्यादा नींद आती है और वे हर समय सुस्त नजर आते है। यही नहीं ज्यादा सोने से शरीर का वजन भी बढ़ जाता है। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्युनिटी) बहुत कमजोर हो जाती है या जो लोग शारीरिक रूप से बहुत कमजोर होते हैं उनमें भी ज्यादा नींद की समस्या देखी गई है।

अच्छी नींद के लिए अच्छी आदत
नींद का संबंध हमारी आदतों से है। जैसी हम आदत विकसित करते हैं हमारा शरीर उसी तरह काम करने लगता है। मान लिजिए कि आपने छह घंटे की नींद की आदत डाली तो आपके लिए छह घंटे की नींद काफी है। अगर आपने दिन में सोने की आदत डाली तो शरीर दिन में सोना चाहेगा। ऐसे में अगर आप कभी नहीं सो पाते तो शरीर में भारीपन लगेगा, सिर में दर्द, उबकाई और मन चिड़चिड़ा हो सकता है।

देर तक जगने से लगती है भूख
कई लोगों को देर रात तक जगने और मध्य रात्रि में भी खाने की आदत होती है। कारण कि आयुर्वेद के अनुसार चार-चार घंटे के अंतराल पर पित्तकाल शुरू होता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति देर रात तक जागता है या बारह बजे तक जागता है तो पित्तकाल शुरू हो जाता है और उसे भूख लग जाती है। मध्य रात्रि के बाद या रात में बार-बार खाने से नींद के साथ-साथ वजन भी प्रभावित होता है।

समय पर सोएं और समय पर जागें
अगर सोने के समय पर सोएंगे नहीं और जागने के समय पर सोते रहेंगे तो शरीर का पाचन तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती जाएंगी। यही नहीं इसका असर तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के कार्य प्रणाली पर भी पड़ेगा। इसलिए समय पर सोना और समय पर जागना जरूरी है।

संतुलन बनाकर रखें
बहुत ज्यादा सोना ठीक नहीं है लेकिन बहुत कम सोना भी ठीक नहीं है। क्योंकि अगर हम सोएंगे नहीं और रात जाग कर ही बिता देंगे तो हमारे शरीर के आंतरिक अंगों की कार्य क्षमता पर असर पड़ेगा और वे असंतुलित हो जाएंगी। इससे शरीर में कई सारी बीमारी पैदा हो सकती हैं, इसलिए छह से आठ घंटे की नींद जरूर लें।

नींद की एक आदत है जरूरी
मेट्रों शहरों में कई लोग पाली यानी शिफ्ट में काम करते हैं। ऐसे लोगों को कभी दिन में तो कभी रात में काम करना पड़ता है जिससे उनकी नींद प्रभावित होती है। नींद की कोई एक आदत यानी रात को सोना है या फिर दिन को सोना है को विकसित नहीं कर सकने के कारण वे कई सारी शारीरिक व मानसिक समस्याएं के शिकार हो जाते हैं। देखा गया है कि नींद पूरी नहीं होने के कारण ऐसे लोगों में तनाव का स्तर काफी बढ़ जाता है। साथ ही उनकी पाचन शक्ति और प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर पड़ जाती है।

रात का खाना हो हल्का
नींद का एक संबंध हमारे खाने से भी है। अगर आप रात में पेट भर या ज्यादा खाते हैं तो हो सकता है कि आपको नींद ज्यादा आए या फिर आपकी नींद ही उड़ जाए। इसलिए रात में हमेशा हल्का खाएं जैसे कि सूप, दलिया या फिर सलाद।

अच्छी नींद के लिए पौष्टिक, संतुलित और प्राकृतिक आहार (कच्ची सब्जियां, फलों का रस, सब्जियों का रस और अंकुरित अनाज) लें। समय पर सोएं और समय पर जागें। योग, कसरत या फिर पार्क में सैर करें। अच्छी नींद के लिए किसी भी तरह की शारीरिक क्रिया का करना जरूरी है।

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