अगर सुबह उठते ही गर्दन अकड़ी हुई महसूस होती है, कंधे दर्द से भारी महसूस होते हैं और दर्द हाथ से होते हुए उंगलियों तक में झनझनाहट पैदा करता है तो ये कोई थकान की वजह से या फिर रात में गलत सोने या पॉश्चर बिगड़ने की वजह से नहीं है। बॉडी में दिखने वाले ये लक्षण गर्दन की नस दबने (Cervical Nerve Compression) का संकेत हो सकते हैं। जब गर्दन की रीढ़ यानी सर्वाइकल स्पाइन में मौजूद नसों पर डिस्क, हड्डी, सूजन या मांसपेशियों का दबाव पड़ता है, तो इस मेडिकल कंडीशन को नर्व कम्प्रेशन कहा जाता है जिसे आम भाषा में गर्दन की नस दबना कहा जाता है। मेडिकल टर्म में इसे सर्वाइकल रेडीकुलोपैथी (Cervical Radiculopathy) भी कहा जाता है।
रामा हेरिटेज सेंटर स्पाइन विद्याधर नगर जयपुर में डॉक्टर सुनील टैंक ने बताया नर्व कम्प्रेशन या गर्दन की नस दबने पर दर्द सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ये दर्द कंधे, बाजू और उंगलियों तक फैल सकता है। कई मामलों में उंगलियों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी भी महसूस होती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि गर्दन की नस दबने के कारण क्या है और इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है।
नर्व कम्प्रेशन के कारण?
नर्व कम्प्रेशन के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे स्लिप डिस्क, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, लंबे समय तक गलत पोस्चर में बैठना, मांसपेशियों में खिंचाव होना, चोट या एक्सीडेंट, लगातार मोबाइल या लैपटॉप का गलत एंगल पर इस्तेमाल होना इसके प्रमुख कारण है।
शुरुआती लक्षणों में क्या करें?
अगर समस्या हल्की है और शुरुआती स्तर पर है तो 2–3 दिन में इस परेशानी से आराम मिल सकता है। ऐसे में आप लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करें।
- आप दर्द बढ़ाने वाली एक्टिविटी से बचें। जिम, भारी एक्सरसाइज और डांस करने से गर्दन दर्द और कमर दर्द बढ़ सकता है।
- दिन में 1–2 बार हल्की गर्म सिकाई करें।
- सही तकिया और सही सोने की पोजीशन अपनाएं।
- मोबाइल आंखों के लेवल पर रखें
- हर 30 से 40 मिनट में काम से ब्रेक लें
फिजियोथेरेपी जैसे गर्दन की कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज और पोस्टर करेक्शन इस परेशानी से उबरने में काफी मददगार हो सकता हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर अस्थायी रूप से सर्वाइकल कॉलर पहनने की सलाह भी देते हैं। कुछ एक्सरसाइज इस परेशानी से उबरने में मदद कर सकती हैं।
नर्व कम्प्रेशन के लिए असरदार एक्सरसाइज।
सर्वाइकल ट्रैक्शन एक्सरसाइज
सर्वाइकल ट्रैक्शन एक्सरसाइज सर्वाइकल ट्रैक्शन नस पर पड़े दबाव को कम करने में असरदार मानी जाती है। इसे करने के लिए एक पतला तौलिया या कपड़ा लें। इसे गर्दन के पीछे उस हिस्से पर रखें जहां गर्दन का घुमाव खत्म होता है और पीठ शुरू होती है। अब तौलिये को दोनों हाथों से पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर की ओर खींचें और गर्दन को ढीला छोड़ दें। इससे गर्दन की रीढ़ के बीच के हिस्से में हल्का खिंचाव पैदा होता है, जिससे दबाव कम हो सकता है। दिन में 2 से 3 बार इसे करें आपको राहत मिलेगी।
साइड नेक स्ट्रेच भी है असरदार
अगर एक हाथ में ज्यादा दर्द है, तो उस हाथ को पीछे की ओर मोड़ लें। अब दूसरे हाथ से सिर को धीरे-धीरे विपरीत दिशा में झुकाएं। इससे गर्दन की मांसपेशियों में स्ट्रेच आता है और नसों पर दबाव कम हो सकता है। याद रखें कि ये एक्सरसाइज हल्के करें और दिन में दो बार करें।
चिन टक एक्सरसाइज
गलत पोस्चर नस दबने की बड़ी वजह बन सकता है। चिन टक एक्सरसाइज गर्दन के पोस्चर को सुधारने और सर्वाइकल स्पाइन को मजबूत बनाने में मदद करती है। इसे करने के लिए सीधे बैठें या खड़े हों। ठुड्डी यानी चिन को धीरे-धीरे अंदर की ओर खींचें, जैसे डबल चिन बना रहे हों। कुछ सेकंड रोकें और फिर नॉर्मल हो जाएं। दिन में 2 बार इसे करें और हर बार 10–15 बार इसे करें। ये एक्सरसाइज गर्दन की कई मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय करती है और नसों पर अनावश्यक दबाव को कम करने में मदद करती है।
नर्व मोबिलाइजेशन एक्सरसाइज करें
इस एक्सरसाइज में हाथ और गर्दन की मूवमेंट एक साथ होती है। हाथ को लगभग 90 डिग्री तक उठाएं और धीरे-धीरे गर्दन को विपरीत दिशा में झुकाएं। इससे नसों में स्ट्रेच और मोबिलिटी आती है। अगर गर्दन से हाथ तक खिंचाव महसूस हो, तो यह संकेत है कि एक्सरसाइज सही तरीके से हो रही है। एक्सरसाइज करने से अगर दर्द बढ़ें तो तुरंत रोक दें।
इस बात का भी ध्यान रखें
गर्दन का दर्द हर बार सामान्य नहीं होता। लंबे समय तक नजरअंदाज करने से नस पर दबाव बढ़ सकता है और समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना और सही समय पर उपचार करना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई जानकारी डॉक्टर के परामर्श और सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह जरूर लें। समस्या गंभीर होने पर खुद से इलाज के बजाय एक्सपर्ट से मिलें।
