आयुर्वेद में नीम और तुलसी को केवल पौधे नहीं, बल्कि प्राकृतिक औषधि का दर्जा दिया गया है। बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण के बीच शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है जिसे मजबूत करना बेहद जरूरी है।अक्सर हम संक्रमण (Infection) और शरीर में होने वाली अंदरूनी सूजन (Inflammation) को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती हैं। आयुर्वेद के मुताबिक नीम अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है, वहीं तुलसी को क्वीन ऑफ हर्ब्स कहा जाता है जो तनाव और संक्रमण से लड़ने में कारगर है।

एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झाजर ने इन दोनों पत्तों की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्हें सेहत के लिए अमृत बताया है। एक्सपर्ट ने बताया सदियों से ये दोनों पत्ते प्रिवेंटिव हेल्थ, इम्यूनिटी और ओवरऑल वेलनेस के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं। डॉक्टर के साथ ही रिसर्च से भी समझते हैं कि ये पत्ते सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है।

नीम के पत्ते के फायदे

नीम के पत्ते जिसका वैज्ञानिक नाम Azadirachta indica है। ये पत्ते एंटीमाइक्रोबियल गुणों से भरपूर होते हैं। नीम में लिमोनॉइड्स, निंबिन, सलैनिन, फ्लेवोनोइड्स जैसे बायो-एक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं जो बैक्टीरिया, फंगस और जर्म्स से लड़ने में मदद करते हैं। ये पत्ते दांत और मसूड़ों के इंफेक्शन से बचाने में असरदार साबित होते हैं। इसका सेवन करने से स्किन इंफेक्शन से बचाव होता है। कई टूथपेस्ट और माउथवॉश में इन पत्तों का प्रयोग किया जाता है।  एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर ये पत्ते ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं। शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) घटाने में ये पत्ते बेहद मददगार होते हैं। इनका सेवन करने से कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है।

नीम के पत्तों में डायबिटीज कंट्रोल करने वाले गुण भी मौजूद है। ये इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में मदद करते हैं और डायबिटीज मरीजों के लिए उपयोगी है। स्किन से जुड़ी बीमारियों में भी इन पत्तों का सेवन असरदार साबित होता है। ये मुंहासे, एक्जिमा जैसी समस्याओं में फायदा पहुंचाते हैं। एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर इन पत्तों का लेप, उनका अर्क या इसका सेवन सेहत के लिए उपयोगी होता है। इन पत्तों में किडनी को डिटॉक्स करने वाले गुण भी मौजूद हैं। ये शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालते हैं और डिफेंस मैकेनिज्म मजबूत करते हैं।

नीम के साइंटिफिक फायदे

Scientific Reports और कई दूसरे शोधों के मुताबिक नीम में लिमोनायड्स (Limonoids) और निम्बोली डे (Nimbolide) जैसे सक्रिय तत्व होते हैं। ये तत्व कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और ट्यूमर की कोशिकाओं को खुद नष्ट करने में प्रभावी पाए गए हैं। ये खासतौर पर प्रोस्टेट, ब्रेस्ट और कोलन कैंसर में असरदार साबित होते हैं। Journal of Pharmacy and Bioallied Sciences की एक रिसर्च के मुताबिक नीम की टहनी (दातून) या नीम आधारित माउथवॉश क्लोरहेक्सिडिन के समान प्रभावी होता है। यह मसूड़ों की सूजन (Gingivitis) कम करता है और दांतों पर प्लाक (Plaque) जमने नहीं देता। यह उन बैक्टीरिया को नष्ट करता है जो कैविटी और सांसों की दुर्गंध पैदा करते हैं।

तुलसी के पत्ते के फायदे

तुलसी के पत्तों का वैज्ञानिक नाम Ocimum sanctum (Holy Basil) होता है जिसका धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ इसमें औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं। तुलसी में एंटीमाइक्रोबियल गुण,  यूजेनॉल, कैम्फर, लिनालूल, फ्लेवोनोइड्स पाए जाते हैं जो ओरल हेल्थ सुधारने में मदद करते हैं। इसमें एडाप्टोजेनिक गुण भी मौजूद होते हैं जो मानसिक तनाव कम करने में मददगार होते हैं। इसका सेवन करने से एंजाइटी का भी इलाज होता है। ये पत्ते दिमाग और नर्वस सिस्टम को संतुलित करते हैं। इनका सेवन करने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है और बॉडी का बीमारियों से बचाव होता है। एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सीडेटिव डैमेज कम करते हैं और कोशिकाओं की सेहत में सुधार करते हैं। इन पत्तों का सेवन करने से खांसी, जुकाम, गले की खराश का इलाज होता है।
सांस से जुड़ी समस्याओं में भी ये मददगार है। 

नीम और तुलसी का साथ सेवन करने के फायदे

नीम और तुलसी के पत्ते दोनों एक-दूसरे को कॉम्प्लीमेंट करते हैं। ये पत्ते इम्यूनिटी डबल तरीके से सपोर्ट करते हैं और इंफेक्शन से बचाव करते हैं। इसका सेवन करने से सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में कमी आती है और मेटाबोलिक हेल्थ को सपोर्ट मिलती है।

सेवन कैसे करें?

नीम के पत्तों का सेवन आप चबाकर, जूस बनाकर,  पाउडर के रूप में कर सकते हैं। तुलसी के पत्ते सीधे चबा सकते हैं, तुलसी का पानी बनाकर यूज कर सकते हैं। चाय में मिलाकर भी तुलसी के पत्तों का सेवन कर सकते हैं।

जरूरी सावधानी

किसी भी जड़ी-बूटी का नियमित सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। डायबिटीज, हार्ट डिजीज या किसी गंभीर बीमारी में खुद इलाज न करें।

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डिस्क्लेमर:

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और किसी भी तरह से चिकित्सा का विकल्प नहीं है। नीम या तुलसी का औषधीय उपयोग करने से पहले हमेशा किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लें। जंसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता है।