मेनोपॉज (Menopause) महिलाओं के जीवन का एक ऐसा पड़ाव है, जिसे अक्सर चुप्पी में काट दिया जाता है। लेकिन इसका असर महिलाओं के सिर के बाल से लेकर पैर के नाखून तक और मूड से लेकर याददाश्त तक पर पड़ता है। मेनोपॉज के दौरान महिलाओं की बॉडी में कई तरह के शारीरिक और मानसिक लक्षण सामने आते हैं, जिनमें से कुछ इतने गंभीर हो सकते हैं कि वो रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने लगते हैं। मेनोपॉज़ को याददाश्त, ध्यान और भाषा से जुड़ी संज्ञानात्मक समस्याओं से भी जोड़ा गया है। महिलाओं को मेनोपॉज़ के दौरान हॉट फ्लैशेज, अवसाद और नींद से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिनका इलाज अक्सर कई महिलाएं हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) से कराती हैं। इंग्लैंड में लगभग 15% महिलाओं को मेनोपॉज़ के लक्षणों के लिए HRT दी जाती है। यूरोप में ये आंकड़ा और अधिक है, स्पेन में 18% से लेकर फ्रांस में 55% तक है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली में सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. सुभाष कुमार वांग्नू ने बताया है कि हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है। अब सवाल ये उठता है कि HRT क्या है और ये कैसे महिलाओं के मेंटल हेल्थ और दूसरी शारीरिक परेशानियों का इलाज करती है।
मेनोपॉज का बॉडी और ब्रेन पर असर
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन (Estrogen) हॉर्मोन का स्तर गिर जाता है। ये हॉर्मोन न केवल प्रजनन क्षमता के लिए जिम्मेदार है, बल्कि ये हड्डियों की मजबूती, दिल की सेहत और दिमाग में सेरोटोनिन यानी हैप्पी हॉर्मोन को कंट्रोल करने के लिए भी जरूरी है। बॉडी में इस हॉर्मोन की कमी से हड्डियां कमजोर (Osteoporosis) होने लगती है और याददाश्त पर भी असर पड़ता है।
हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) क्या है? और ये कैसे मेनोपॉज में करती है मदद
हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) बॉडी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन की कमी को पूरा करने का इलाज है। बॉडी में इन हॉर्मोन की कमी की भरपाई दवाओं, पैच या जेल के जरिए की जाती है। मेनोपॉज के दौरान महिलाओं की बॉडी में इस हॉर्मोन की कमी होने लगती है और HRT इस कमी को पूरा करने का इलाज है। हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) एक उपचार पद्धति है, जिसमें महिलाओं को वो ओवेरियन हॉर्मोन दिए जाते हैं जो उनकी बॉडी में मेनोपॉज़ के दौरान कम हो जाते हैं। इस इलाज का मुख्य उद्देश्य मेनोपॉज़ से जुड़े लक्षणों, खासकर हॉट फ्लैश और नाइट स्वेट्स (रात में पसीना आना) को कम करना है। HRT में आमतौर पर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का संयोजन दिया जाता है, ताकि शरीर में ओवरी द्वारा बनने वाले हॉर्मोनों की कमी पूरी की जा सके। 2024-2025 में JAMA और International Menopause Society की रिपोर्ट इस थेरेपी को सुरक्षित और प्रभावी मानती हैं।
HRT कैसे मेनोपॉज में असरदार साबित होती है?
HRT को Food and Drug Administration (FDA) द्वारा मेनोपॉज़ लक्षणों के उपचार और ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए मंजूरी दी गई है। HRT हॉट फ्लैशेज में राहत देती है। इस थेरेपी की मदद से अचानक गर्मी लगना और पसीना आना 90% तक कम हो जाता है। ये थेरेपी हड्डियों को टूटने और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाती है। जो महिलाएं मेनोपॉज के दौरान ये थेरेपी लेती है उनकी मानसिक सेहत में भी सुधार देखा जाता है। ये मूड स्विंग्स, एंग्जायटी और नींद न आने की समस्या में सुधार करती है। शुरुआती चरणों में ली गई HRT दिल की बीमारियों के जोखिम को कम कर सकती है।
हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के क्या कोई साइड इफेक्ट भी हैं?
2002 में हुई एक रिसर्च को HRT के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस रिसर्च ने शुरुआत में संकेत दिया था कि HRT से ब्रेस्ट कैंसर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके बाद पूरी दुनिया में HRT का इस्तेमाल कम हो गया था। लेकिन नई रिसर्च में पुराने डेटा का पुनर्मूल्यांकन किया गया जिसमें पता चला है कि ये जोखिम मुख्य रूप से उन महिलाओं में था जिन्होंने 60 वर्ष की आयु के बाद या मेनोपॉज के बहुत साल बाद HRT शुरू की थी।
हालिया रिसर्च ये स्पष्ट करती है कि HRT का असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कब शुरू किया गया। रिसर्च के मुताबिक अगर कोई महिला मेनोपॉज शुरू होने के 10 साल के अंदर या 60 साल से कम उम्र में HRT शुरू करती है तो उसे हृदय रोगों का खतरा कम होता है और हड्डियां भी मजबूत होती है। जिन महिलाओं को स्तन कैंसर (Breast Cancer), रक्त के थक्के (Blood Clots) या लीवर की बीमारी का व्यक्तिगत या फैमिली हिस्ट्री है, उनके लिए HRT जोखिम भरी हो सकती है।
HRT शुरू करने से पहले कराएं ये टेस्ट
महिलाएं HRT शुरू करने से पहले मैमोग्राम (Mammogram) और पेल्विक अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट डॉक्टर की सलाह पर जरूर कराएं।
HRT का विकल्प क्या हो सकता है?
HRT के बिना भी आप मेनोपॉज के दौरान होने वाली शारीरिक और मानसिक परेशानियों का इलाज कर सकती है। आप लाइफस्टाइल में बदलाव करें। डाइट हेल्दी लें। डाइट में कैल्शियम रिच फूड,सोया का सेवन करें। योग और एक्सरसाइज की मदद से आप ब्रेन हेल्थ में सुधार कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
