Gut-Brain Axis: कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि बॉडी को खुश रखने वाला 95% सेरोटोनिन हॉर्मोन पेट में पैदा होता है। ये वो न्यूरोट्रांसमीटर है जो हमारे मूड को खुशगवार बनाते हैं। खुश रखने वाले ये हॉर्मोन पेट में पैदा होता है, दिमाग में नहीं होता। अगर आपका पेट खराब रहता है तो डिप्रेशन और एंजायटी का बढ़ना तय है। हमारी 70% से 80% इम्यून कोशिकाएं (Immune Cells) पेट की परत (Gut Lining) में रहती हैं। पेट के अच्छे बैक्टीरिया ही वायरस से लड़ने का सिग्नल देते हैं।

दिमाग से सीधा कनेक्शन

वेगस नर्व (Vagus Nerve) के ज़रिए पेट और दिमाग हर पल आपस में जुड़े रहते हैं। इसी कनेक्शन को गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। जब पेट में सूजन या ब्लोटिंग, गैस या गट डिसबैलेंस होता है तो इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है और ब्रेन फॉग, भूलने की समस्या और ध्यान न लगने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। जब हम तनाव में रहते हैं तो दिमाग पेट को तुरंत सिग्नल भेजता है जिससे हमें पाचम से जुड़ी दिक्कतें जैसे पेट दर्द, ब्लोटिंग, एसिडिटी,अपच और गैस जैसी समस्याएं होती हैं। जब पेट की सेहत खराब होती है तो वेगस नर्व दिमाग को खतरे का संकेत भेजती है। इसका नतीजा ये होता है कि व्यक्ति बिना वजह उदास, बेचैन या चिड़चिड़ा महसूस करने लगता है।

अच्छे बैक्टीरिया के दुश्मन है ये फूड

रिसर्च बताती है कि कुछ फूड्स ऐसे हैं जो हमारे पेट के सेरोटोनिन बनाने वाले बैक्टीरिया को मार कर देते हैं, जैसे

  • बहुत ज्यादा चीनी वाले फूड्स का सेवन गट हेल्थ के लिए दुश्मन है। ज्यादा चीनी खराब बैक्टीरिया का भोजन बनती है।
  • एंटीबायोटिक दवाओं का ज्यादा सेवन आपके पेट में मौजूद गुड  और बेड दोनों बैक्टीरिया को मार देते हैं।
  • प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन प्रिजर्वेटिव्स गट लाइनिंग को नुकसान पहुंचाता हैं।

पेट को मूड बूस्टर कैसे बनाएं एक्सपर्ट की राय से समझें

भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र ने बताया अगर आप पाचन को दुरुस्त रखना चाहते हैं, इम्यूनिटी को मजबूत करना चाहता हैं, मानसिक स्थिति में सुधार करना चाहते हैं तो आप रोजाना फर्मेंटेड फूड का सेवन जरूर करें। प्रोबायोटिक्स (Probiotics) फूड्स का सेवन आपकी गट हेल्थ में सुधार कर सकता है। डाइट में दही, किमची, या घर का बना अचार खाएं। ये फूड सीधे अच्छे बैक्टीरिया की फौज बढ़ाते हैं।

फाइबर (Fiber) रिच फूड खाएं

डाइट में फाइबर से भरपूर फूड्स जैसे साबुत अनाज, फल और सब्जियों का सेवन करें। ये फूड बैक्टीरिया का खाना (Prebiotics) हैं। जो गट हेल्थ को सुधारने में बेहद असरदार साबित होते हैं। फाइबर का नियमित सेवन पाचन को दुरुस्त रखता है और गट हेल्थ सुधारने में बेहद असरदार साबित होता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग भी है पेट के लिए जरूरी

इंटरमिटेंट फास्टिंग करें। फास्ट करने से पेट को मरम्मत का समय मिलता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग पाचन तंत्र को आराम और रिपेयर का समय देती है। फास्टिंग के दौरान आंतों में मौजूद कोशिकाएं खुद को रिन्यू करती हैं और सूजन कम होती है। इससे गट हेल्थ बेहतर होती है और पाचन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।

आर्टिफिशियल स्वीटनर गट के दुश्मन

आर्टिफिशियल स्वीटनर और अत्यधिक शराब का सेवन गट हेल्थ के लिए बहुत घातक माना जाता है। आर्टिफिशियल स्वीटनर जैसे एस्पार्टेम, सैकरीन और सुक्रालोज गट माइक्रोबायोम को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पाचन कमजोर होता है और ब्लोटिंग की परेशानी बढ़ने लगती है। इसका असर सीधा इम्यूनिटी और मूड पर पड़ता है।

अत्यधिक शराब भी बिगाड़ती गट हेल्थ

बहुत ज्यादा शराब का सेवन आंतों की परत (Gut Lining) को नुकसान पहुंचाता है। इससे लीकी गट सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें हानिकारक टॉक्सिन्स और बैक्टीरिया ब्लडस्ट्रीम में पहुंच जाते हैं और इसकी वजह से पेट में सूजन, ब्लोटिंग, थकान, गैस, लो इम्यूनिटी और बार-बार बीमार पड़ने जैसे लक्षण दिखते हैं।

निष्कर्ष

तो अगली बार जब आप उदास महसूस करें, तो सिर्फ अपने विचारों को नहीं, अपनी थाली को भी देखें। एक स्वस्थ पेट ही एक सुखी जीवन की पहली सीढ़ी है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।