कोलेस्ट्रॉल एक खून की नसों को ब्लॉक करने वाला चिपचिपा पदार्थ है। जिसे हमारी बॉडी भी बनाती है और डाइट से भी बनता है। कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है एक गुड कोलेस्ट्रॉल जिसे HDL कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है और दूसरा होता है LDL कोलेस्ट्रॉल जिसे खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। कोलेस्ट्रॉल एक तरह का फैटी केमिकल है, जो शरीर के लिए जरूरी भी है और नुकसानदेह भी हो सकता है। ये हमारे शरीर में हार्मोन बनाने, सेल मेम्ब्रेन यानी कोशिका झिल्ली को मजबूत रखने और विटामिन डी के निर्माण में मदद करता है। बॉडी में खराब कोलेस्ट्ऱॉल का स्तर बढ़ जाने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। हार्ट अटैक और ब्लॉकेज के मामलों में हाई कोलेस्ट्रॉल अहम भूमिका निभाता है।

एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झांजेर के मुताबिक कुल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 130 से 180 mg/dL के बीच माना जाता है, लेकिन हार्ट पेशेंट्स को इसे 130 से नीचे रखने की सलाह दी जाती है।

कोलेस्ट्रॉल कैसे बढ़ता है?

खून में कोलेस्ट्रॉल दो स्रोतों से आता है एक इंटरनल यानी लीवर खुद कोलेस्ट्रॉल बनाता है। दूसरा एक्सटर्नल यानी भोजन के जरिए। डाइट में एनिमल फूड जैसे मीट, मछली, अंडा और डेयरी प्रोडक्ट का ज्यादा सेवन आपकी बॉडी में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाता है। अंडे के सफेद हिस्से में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता, जबकि दूध से मलाई हटाने पर उसमें फैट और कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर क्या होता है?

जब शरीर में LDL कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है तो यह रक्त वाहिकाओं (Arteries) की दीवारों पर चिपकने लगता है। धीरे-धीरे ये एक सख्त परत बना लेता है जिसे प्लाक कहते हैं। इससे नसें संकरी और सख्त हो जाती हैं। जैसे-जैसे नसें संकरी होती हैं बॉडी के जरूरी अंगों जैसे दिल और दिमाग तक पहुंचने वाले खून की मात्रा कम होने लगती है। इसी वजह से ब्लड प्रेशर हाई होता है, सीने में दर्द,हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा पैरों में दर्द और किडनी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती है।

कोलेस्ट्रॉल की दवा लेना कब जरूरी है?

डॉक्टर बिमल ने बताया अगर कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL से ऊपर है तो दवा की जरूरत पड़ सकती है। आमतौर पर स्टैटिन ग्रुप की दवाएं जैसे एटोरवास्टेटिन, रोसुवास्टेटिन आदि दी जाती हैं, जो लीवर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को कम करती हैं। कुछ मामलों में इजेटिमाइब या इंजेक्शन थेरेपी भी दी जाती है।

क्या कोलेस्ट्रॉल की दवा हमेशा खानी पड़ती है?

एक्सपर्ट ने बताया अगर LDL लेवल 190 mg/dL से ऊपर है या दिल के रोगों का जोखिम अधिक है तो लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ दवाएं लेना भी जरूरी है। अगर कोलेस्ट्रॉल थोड़ा बढ़ा है और कोई दूसरी बीमारी जैसे शुगर या बीपी नहीं है, तो डॉक्टर पहले 3 से 6 महीने सिर्फ लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह देते हैं। अगर मरीज को पहले स्ट्रोक आ चुका है, डायबिटीज है, या LDL का स्तर बहुत अधिक या 190 mg/dL से ऊपर है तो स्टैटिन (Statins) जैसी दवाएं लेना जरूरी हो हो जाती हैं।

क्या करें बचाव के लिए?

  • खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप डाइट में सुधार करें। डाइट में नॉनवेज और हाई फैट डेयरी प्रोडक्ट का सेवन कम करें।
  • फाइबर से भरपूर डाइट का सेवन करें। डाइट में ओट्स, दालें, सेब और ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन करें।
  • रोजाना 30 मिनट की तेज सैर (Brisk Walking) अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती है और खराब कोलेस्ट्रॉल को साफ करती है।
  • समोसे, कचोरी और पैकेट बंद फूड्स नसों में सूजन बढ़ाते हैं, इन्हें बंद करना जरूरी है।
  • नियमित व्यायाम करें और वजन को कंट्रोल करें।
  • समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराएं
  • डॉक्टर की सलाह से ही दवा शुरू या बंद करें।
  • एक्सपर्ट के मुताबिक सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल और जरूरत पड़ने पर दवाओं का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल हो सकता है जिससे दिल की बीमारियों का खतरा टलता है।

डिस्क्लेमर:

इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।