उम्रदराज लोगों में होने वाली बीमारियां अब कम उम्र में ही लोगों को अपना शिकार बना रही है। युवाओं में अब वो बीमारियां 20 और 30 की उम्र में दिख रही हैं, जो पहले 50-60 की उम्र में दिखती थीं। पिछले कुछ सालों में दिल के रोगों का खतरा युवाओं में तेजी से बढ़ा रहा है। WHO के अनुसार, हृदय रोग (CVDs) दुनिया भर में मौत का नंबर एक कारण हैं। हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि हृदय रोगों से होने वाली समयपूर्व मौतों (Premature Deaths) में से 80% अब मध्यम और कम आय वाले देशों में हो रही हैं, जहां भारत जैसा देश शीर्ष पर हैं।
एशियन हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर और हेड यूनिट-II (कार्डियोलॉजी) डॉ. एल.के. झा के अनुसार 45 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में साइलेंट कार्डियक जोखिम तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अक्सर इनके स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते। डॉ. झा ने बताया 45 साल से कम उम्र के पुरुषों में शुरुआती एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में चर्बी जमना), बॉर्डरलाइन हाई ब्लड प्रेशर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। परेशानी की बात तो ये है कि ये बीमारियां बिना किसी लक्षण के आगे बढ़ती जा रही हैं।
बीमारियों के लिए जिम्मेदार कारण जो साइलेंट कर रहे हैं अटैक
डॉक्टर झा ने बताया युवाओं में इन बीमारियों के बढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे
- खराब लाइफस्टाइल जो सबसे ज्यादा दिल को नुकसान पहुंचा रहा है।
लम्बे समय तक बैठे रहने की आदत(सेडेंटरी लाइफस्टाइल) दिल के लिए खतरा है।
लगातार बढ़ता तनाव
खराब नींद और स्मोकिंग की आदत
मेटाबोलिक और आनुवंशिक कारक
इसके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर
पर्यावरण प्रदूषण
लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना भी अप्रत्यक्ष रूप से शारीरिक निष्क्रियता और शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) को बढ़ावा देता है
अनहेल्दी फूड का सेवन दिल को नुकसान पहुंचा रहा है और बीमारियों का कारण बन रहा है।
जिन लोगों की हार्ट से जुड़ी फैमिली हिस्ट्री है उनमें हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। - ये सभी ऐसे साइलेंट कारण हैं जो चुपचाप रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और दिल के रोगों का कारण बनते हैं। अगर समय रहते परेशानी को समझा नहीं जाए तो कम उम्र में ही हार्ट अटैक या गंभीर हृदय जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।
कम उम्र में पुरुष इन लक्षणों को करते हैं नजरअंदाज
डॉ. झा के अनुसार सबसे बड़ा खतरा ये है कि पुरुषों को कम उम्र में हार्ट अटैक के क्लासिक लक्षण जैसे तेज सीने में दर्द जैसे लक्षण नहीं दिखाई देते। एक्सपर्ट ने बताया युवाओं में दिल की बीमारी के लिए जिम्मेदार कुछ ऐसे लक्षण दिखते हैं जिसे वो थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
युवा मरीजों में बिना कारण थकान, हल्की शारीरिक गतिविधि में सांस फूलना, बार-बार अपच की शिकायत, हल्का सीने में असहजता, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना या नींद में गड़बड़ी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। कुछ मामलों में दर्द सीने की बजाय जबड़े, गर्दन, कंधे या पीठ तक फैल सकता है। एक्सपर्ट ने बताया मरीज को घबराहट होना, एक्सरसाइज करने की क्षमता में कमी आना, लगातार थकान होना दिल पर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकते हैं। एक्सपर्ट ने बताया युवा अगर अपनी बॉडी में इस तरह के लक्षण देखें तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं। इस लक्षणों को समझकर तुरंत डॉक्टर को दिखाकर आप दिल के रोगों से बचाव कर सकते हैं।
जिंदगी से खतरा टाल सकती हैं ये जांचें
डॉ. झा ने युवाओं को हिदायत दी है कि वो दिल के रोगों से बचाव करने के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच, लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर टेस्ट और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) की बुनियादी लेकिन बेहद जरूरी जांचें कराएं। इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) से दिल की धड़कन से जुड़ी असामान्यताओं का पता लगा सकते हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर इकोकार्डियोग्राफी की सलाह दी जा सकती है।
कुछ मामलों में स्ट्रेस टेस्ट, कोरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग या एडवांस्ड ब्लड मार्कर्स की भी सलाह दी जाती है।
एक्सपर्ट ने बताया शुरुआती जांच से समय पर लाइफस्टाइल में बदलाव और जरूरत पड़ने पर दवाओं की शुरुआत की जा सकती है। जितनी जल्दी हम जोखिम की पहचान करेंगे, उतनी ही अधिक संभावना होगी कि हम किसी बड़ी हृदय घटना को टाल सकें।
डॉक्टर की सलाह
लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता के लिए है, किसी भी लक्षण के दिखने पर स्वयं इलाज (Self-medication) के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
डिस्क्लेमर:
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी गंभीर समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लें। जंसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता है।
