हर इंसान लम्बे समय तक जवान और खूबसूरत दिखना चाहता है। बढ़ती उम्र में बॉडी में नेचुरल कोलेजन का उत्पादन कम होने लगता है और लोग इसे बढ़ाने के लिए बाजार में मौजूद कई तरह के सप्लीमेंट का इस्तेमाल करते हैं, जिनका कई बार साइड इफेक्ट भी देखने को मिलता है। न्यूट्रिशनिस्ट ने कोलेजन की समस्या का समाधान निकालने के लिए कुछ खास फूड्स का सेवन करने की सलाह दी है। कुछ ड्राई फ्रूट ऐसे हैं जिनका सेवन करने से बॉडी में नेचुरल तरीके से कोलेजन का उत्पादन किया जा सकता है। ये ड्राई फ्रूट महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट से काफी सस्ते और असरदार है। इनका नेचुरल तरीके से रोज सेवन करने से बॉडी को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और बॉडी हेल्दी रहती है। ये ड्राई फ्रूट ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में भी असरदार साबित होते हैं।  

Journal of Investigative Dermatology के अनुसार ड्र्राईफ्रूट में मौजूद विटामिन E स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाता है। जब शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है, तो मौजूदा कोलेजन सेफ रहता है और नया कोलेजन तेजी से बनता है।

कोलेजन कैसे स्किन की झुर्रियां करता है कंट्रोल

कोलेजन हमारे शरीर का मुख्य संरचनात्मक प्रोटीन है जो स्किन, कार्टिलेज, टेंडन, लिगामेंट्स और यहां तक कि ब्लड वैसल्स की दीवारों को भी एक-साथ जोड़े रखता है। जब शरीर में कोलेजन का स्तर कम होने लगता है, तो स्किन ढीली पड़ने लगती है, जोड़ों में आसानी से दर्द या जकड़न होने लगती है और छोटी-मोटी चोटों से उबरने में ज़्यादा समय लगता है। हमारी बॉडी में लगभग 25 साल की उम्र के बाद कोलेजन बनने की प्रक्रिया धीरे-धीरे कम होने लगती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये कमी तेज़ हो जाती है, खासकर अगर व्यक्ति धूम्रपान करता है, ज़्यादा चीनी खाता है या लगातार तनाव में रहता है। ब्यूटी इंडस्ट्री अक्सर कोलेजन को सिर्फ़ झुर्रियों से जोड़कर दिखाती है, लेकिन डॉक्टरों के लिए कोलेजन का मतलब सिर्फ़ सुंदर स्किन नहीं, बल्कि शरीर की मूवमेंट, हड्डियों की मजबूती और संपूर्ण मेटाबॉलिक हेल्थ से भी जुड़ा होता है। कोलेजन को सपोर्ट करना सिर्फ़ कॉस्मेटिक ज़रूरत नहीं है, बल्कि ये जोड़ों की सेहत, हड्डियों के घनत्व और लंबे समय तक आत्मनिर्भर रहने से भी जुड़ा है।

शरीर को कोलेजन बनाने के लिए क्या चाहिए?

हमारी बॉडी खुद कोलेजन बना सकती है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी पोषक तत्वों की जरूरत होती है जैसे
अमीनो एसिड
विटामिन C
कॉपर
ज़िंक
हेल्दी फैट्स
कुछ ड्राय फ्रूट्स और नट्स रोजाना की डाइट में अहम भूमिका निभाते हैं।

कोलेजन और ब्लड शुगर के बीच रिलेशन

ब्लड शुगर का बढ़ना कोलेजन को जितना नुकसान पहुंचाता है, उतना ज़्यादातर लोग समझते नहीं हैं। जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर लगातार ज़्यादा रहता है तो एडवांस ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (AGEs) नाम के हानिकारक तत्व बनने लगते हैं। ये तत्व कोलेजन फाइबर से चिपक जाते हैं, जिससे वे सख्त और कमज़ोर हो जाते हैं। इसका असर सिर्फ़ चेहरे पर नहीं, बल्कि रक्त वाहिकाओं और जोड़ों की कार्टिलेज पर भी पड़ता है। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थ जो कोलेजन को सपोर्ट करें और साथ ही ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें इसका सेवन करना जरूरी है। सभी पोषक तत्व शरीर को नया कोलेजन बनाने में मदद करते हैं।

International Journal of Molecular Sciences के अनुसार, हाई ब्लड शुगर कोलेजन के उत्पादन (Synthesis) को धीमा कर देता है, जिससे शरीर नया कोलेजन नहीं बना पाता और स्किन की रिपेयर करने की क्षमता कम हो जाती है। यही कारण है कि हाई शुगर वाले लोगों में अल्सर या चोट जल्दी ठीक नहीं होती।

काजू है कोलेजन बढ़ाने में फायदेमंद

The Journal of Nutrition में छपी एक स्टडी के अनुसार, जिन लोगों ने रोजाना 30 ग्राम काजू का सेवन किया, उनके सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में कमी आई और उनके इंसुलिन लेवल में सुधार देखा गया, बिना वजन बढ़े। कोलेजन फ्रेंडली स्नैक्स में काजू सबसे ऊपर आते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनमें मौजूद कॉपर है। कॉपर उन एंजाइम के लिए ज़रूरी होता है जो कोलेजन फाइबर को बनाने और मजबूत करने का काम करते हैं। अगर शरीर में कॉपर की कमी हो, तो कोलेजन सही तरीके से बन नहीं पाता, जिससे स्किन की इलास्टिसिटी और मजबूती प्रभावित होती है। काजू में मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें कॉपर,हेल्दी फैट्स,मैग्नीशियम,प्लांट प्रोटीन मौजूद होता है जो कोलेजन के निर्माण में मदद करते हैं और एनर्जी को बूस्ट करते हैं। इसका सेवन करने से मसल्स मजबूत होते हैं। सही मात्रा में काजू का सेवन ब्लड शुगर कंट्रोल में भी मदद करता हैं, जिससे कोलेजन को होने वाला नुकसान कम होता है।

कितना काजू खाएं?

दिन में 20–30 ग्राम  यानी एक छोटी मुट्ठी काजू का सेवन काफ़ी होता है।

बादाम खाएं कोलेजन को स्पोर्ट करेगा

बादाम भी कोलेजन सपोर्ट और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें विटामिन E, ज़िंक, हेल्दी फैट्स और थोड़ी मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स पाए जाते हैं। हालांकि बादाम में सीधे कोलेजन नहीं होता, लेकिन ये कोलेजन बनाने और उसे नुकसान से बचाने में मदद करता हैं। बादाम में मौजूद  विटामिन E स्किन और कोलेजन को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाता है, जबकि ज़िंक कोलेजन समेत प्रोटीन सिंथेसिस के लिए उपयोगी है। बादाम में मौजूद हेल्दी फैट्स दिल की सेहत के लिए असरदार साबित होता है और ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल करता है। फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर काजू और बादाम का सेवन पाचन और गट हेल्थ के लिए भी उपयोगी है।

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Disclaimer:  

इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।