रमजान मुसलमानों के लिए खास महीना है जिसकी तैयारियां लगभग शुरू हो चुकी है। रमजान के महीने में मुसलमान सुबह सूरज निकलने से पहले सेहरी खाते हैं और फिर रात में सूरज डूबने तक रोज़े के हालत में रहते हैं। पूरा दिन फास्ट रखना शरीर को अनुशासित करने और मेटाबॉलिज्म को संतुलित करने में मदद कर सकता है, बशर्ते व्यक्ति पूरी तरह तंदरुस्त हो। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक रोज़ा रखने से पहले व्यक्ति की सेहत, उम्र और मेडिकल स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। जिन लोगों को डायबिटीज है उनके लिए रोज़ा रखना थोड़ा जोखिम बढ़ा सकता है। 12 घंटों का उपवास ब्लड में शुगर का स्तर असंतुलित कर सकता है जिससे मरीज को कई तरह की परेशानियां जैसे चक्कर आना, कमजोरी, पसीना आना, घबराहट या बेहोशी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक सही तैयारी और चिकित्सकीय सलाह के साथ डायबिटीज के मरीज सुरक्षित तरीके से रोज़ा रख सकते हैं।

एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. संदीप खरब ने जनसत्ता को बताया डायबिटीज मरीजों के लिए रोजा रखना पूरी तरह मना नहीं है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनका शुगर लेवल कितना कंट्रोल है। जिन मरीजों की शुगर बार-बार ऊपर-नीचे होती है या जिन्हें इंसुलिन की ज्यादा डोज लगती है, उन्हें रोजा रखने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। बिना तैयारी के रोजा रखने से हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर का अचानक गिरना और हाइपरग्लाइसीमिया यानी शुगर का बढ़ जाना, दोनों का खतरा रहता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि डायबिटीज में रोज़ा कब बढ़ा सकता है खतरा।

रोज़े में डायबिटीज में क्यों बढ़ता है खतरा?

रोजे के दौरान सुबह सहरी के बाद शाम तक कुछ भी नहीं खाया-पिया जाता। इस दौरान शरीर ग्लूकोज की कमी को पूरा करने के लिए ऊर्जा के दूसरें स्रोतों का इस्तेमाल करता है। अगर दवा या इंसुलिन की मात्रा पहले जैसी ही ली जाए तो ब्लड शुगर खतरनाक रूप से गिर सकता है। दूसरी ओर इफ्तार में ज्यादा मीठा या तला-भुना खाने से शुगर अचानक बढ़ सकता है।

पहला रोजा रखने से पहले क्या करें?

डॉ. संदीप खरब सलाह देते हैं कि रमजान शुरू होने से पहले एक बार अपना फास्टिंग और पोस्टप्रांडियल शुगर टेस्ट करा लें। अगर HbA1c बहुत ज्यादा है, तो रोजा टाल देना बेहतर होता है। दवाओं की समय और खुराक डॉक्टर की सलाह से एडजस्ट करें। खुद से दवा कम या ज्यादा करना खतरनाक हो सकता है।

सहरी में क्या खाएं?

एक्सपर्ट ने बताया अगर आप रोजा रख रहे हैं तो आप अपनी डाइट में सेहरी और इफ्तार में कुछ खास फूड्स को शामिल करें। डाइट में जटिल कार्बोहाइड्रेट जैसे दलिया, ओट्स, मल्टीग्रेन रोटी का सेवन करें।  प्रोटीन स्रोत जैसे अंडा, दाल और पनीर का सेवन इफ्तार और सहरी में करें। डाइट में फाइबर युक्त सलाद खाएं बॉडी में पानी की कमी पूरी होगी। इफ्तार के बाद आप कोशिश करें कि बार बार पानी पिएं। डॉ. खरब कहते हैं कि अक्सर लोग सेहरी में चाय और ब्रेड खाकर रोजा रखते हैं जो पूरी तरह गलत है। सहरी में सिर्फ चाय और ब्रेड खाकर रोजा शुरू करना बड़ी गलती है। आप सेहरी में ऐसा भोजन खाएं जो बॉडी को धीरे-धीरे एनर्जी दें और जिससे शुगर का स्तर कंट्रोल हो सकता है। आप सेहरी और इफ्तार में सही फूड्स खाएंगे तो डायबिटीज के बढ़ते जोखिम को कम कर सकते हैं। 

इफ्तार में किन बातों का रखें ध्यान?

अगर आपको डायबिटीज है तो आप खजूर सीमित मात्रा में खाएं।
इफ्तार में मीठे शरबत और डीप-फ्राइड स्नैक्स से बचें
पहले पानी और हल्का भोजन लें, फिर मुख्य खाना खाएं
एक साथ ज्यादा खाने से बचें

कब छोड़ दें रोजा?

अगर आपको चक्कर आ रहा है, आंखों से धुंधला दिखाई देता है और पसीना ज्यादा आ रहा है और हाथ-पैरों में कंपकपी है तो आप रोजा नहीं रखें। डॉ ने बताया धार्मिक आस्था जरूरी है, लेकिन सेहत उससे भी ज्यादा जरूरी है। अगर शुगर बहुत कम या ज्यादा हो जाए, तो रोजा नहीं रखना सही निर्णय है। रोजा छोड़कर आप अपराध बोध न रखें।

पानी और आराम भी जरूरी

  • इफ्तार से सहरी के बीच पर्याप्त पानी पिएं।
  • कैफीन वाले ड्रिंक का सेवन कम करें, क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं।
  • धूप में ज्यादा देर रहने और भारी व्यायाम से बचें।
  • सही योजना बनाना जरूरी है। संतुलित आहार और नियमित निगरानी के साथ डायबिटीज के मरीज भी रमजान के रोजे सुरक्षित रूप से रख सकते हैं। लेकिन याद रखें हर शरीर अलग होता है, इसलिए व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। डायबिटीज के हर मरीज की स्थिति अलग होती है। रोज़ा रखने का फैसला लेने से पहले अपने निजी डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।