दिन में दो से तीन कप कॉफी पीने से डिमेंशिया का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सीमित मात्रा में कैफीन मस्तिष्क के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इससे अधिक कॉफी पीने से सेहत को कुछ फायदा नहीं बल्कि नुकसान हो सकता है। लाफबरो यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता ईफ़ होजेनवोर्स्ट के नेतृत्व में की गई एक रिसर्च के मुताबिक दो कप कॉफी का सेवन आपके ब्रेन के लिए बूस्टर ड्रिंक साबित हो सकता है। रिसर्च के मुताबिक जिन लोगों ने रोज 250 से 300 मिलीग्राम कैफीन का सेवन किया उन लोगों में डिमेंशिया का जोखिम 35 फीसदी तक कम था। ये असर 75 साल से अधिक उम्र के लोगों में खासतौर पर देखा गया है। आइए जानते हैं कि डिमेशिया क्या है और इस बीमारी के लिए जोखिम कारक कौन से हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

डिमेंशिया क्या है?

डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं बल्कि लक्षणों का समूह है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और रोज़मर्रा के काम करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इस बीमारी के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचना, उम्र बढ़ना, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज, सिर में गंभीर चोट लगना और कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी शामिल हो सकती है। ये परेशानी ज्यादातर बुजुर्ग में देखी जाती है।

डिमेंशिया के प्रमुख लक्षण

हाल की बातों को बार-बार भूलना, बोलने या सही शब्द याद करने में परेशानी होना,  रोज़मर्रा के काम करने में दिक्कत होना, समय, जगह या लोगों को पहचानने में भूल होना, निर्णय लेने और सोचने-समझने की क्षमता कम होना, मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन या अवसाद जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। फरवरी 2026 की JAMA में प्रकाशित एक बड़ी रिसर्च के मुताबिक रोजाना 2-3 कप कॉफी या 1-2 कप चाय पीने वालों में डिमेंशिया का जोखिम 15-20% तक कम पाया गया। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स मस्तिष्क की सूजन (inflammation) कम करते हैं। स्वीडन की एक 25 साल लंबी रिसर्च के मुताबिक जो लोग रोजाना लगभग 50 ग्राम फुल-फैट पनीर खाते हैं, उनमें अल्जाइमर का खतरा कम हो सकता है।

डिमेंशिया पर क्या कहती है रिसर्च

डिमेंशिया पर हालिया रिसर्च 2025-2026 के परिणाम काफी चौंकाने वाले और उम्मीद जगाने वाले हैं। वैज्ञानिकों ने अब इसके इलाज से ज्यादा इसकी शुरुआती पहचान और बचाव पर ध्यान केंद्रित किया है। जर्मनी के शोधकर्ताओं की अगस्त 2025 की एक स्टडी के अनुसार, अल्जाइमर और डिमेंशिया का सबसे पहला लक्षण याददाश्त कम होना नहीं, बल्कि गंध पहचानने की क्षमता (Sense of Smell) का कम होना है। मस्तिष्क का वह हिस्सा जो गंध को प्रोसेस करता है, सबसे पहले प्रभावित होता है।

कैफीन कैसे डिमेंशिया का टाल सकता है खतरा

वैज्ञानिकों के मुताबिक कैफीन मस्तिष्क में मौजूद एडेनोसाइन नामक रसायन को अवरुद्ध करता है, जो डोपामिन और एसिटाइलकोलाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को दबाता है। उम्र बढ़ने और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों में इन न्यूरोट्रांसमीटर की सक्रियता कम हो जाती है, जिसे कैफीन कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च में अमेरिका की 1,31,821 नर्सों और हेल्थ एक्सपर्ट को शामिल किया था, जिनकी हेल्थ पर 40 से लेकर 43 साल की उम्र तक नजर रखी गई थी। अध्ययन में यह भी पाया गया कि कैफीन रहित कॉफी पीने वालों में स्मृति क्षय की गति तेज़ थी। शोधकर्ताओं ने ये भी स्पष्ट किया कि कॉफी के कप का आकार अलग-अलग हो सकता है और कैफीन की मात्रा कॉफी के प्रकार और उसे बनाने के तरीके पर निर्भर करती है। रिसर्च के मुताबिक सीमित मात्रा में कैफीन का सेवन सतर्कता और मूड में सुधार कर सकता है। कॉफी का ज्यादा सेवन सेहत पर साइड इफेक्ट भी कर सकता है।

डिमेंशिया से बचाव कैसे करें

  • याददाश्त को दुरुस्त रखने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज करें। एक्सरसाइज करने से नर्वस सिस्टम इम्प्रूव होता है और याददाश्त तेज होती है।
  • लगातार लम्बे समय तक काम करने से दिमागी थकान बढ़ जाती है और भूलने की बीमारी हो सकती है। ऐसे में आप काम से कुछ समय के लिए ब्रेक लें ब्रेन शार्प होगा।
  • मेडिटेशन कीजिए, ध्यान न सिर्फ आपकी बॉडी को हेल्दी रखता है बल्कि भूलने की इस बीमारी का भी इलाज करता है। ध्यान करने से बीपी कंट्रोल होता है और ब्रेन हेल्थ में सुधार होता है।

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डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और रिसर्च पर आधारित है। यदि आप डिमेंशिया के लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं या आपकी कोई मेडिकल हिस्ट्री है, तो कॉफी या अन्य आहार में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह जरूर लें।